अलविदा कह गए अभिनय, संगीत और अध्यात्म की त्रिवेणी का संगम शशि कपूर

बात 2015 की है एक सुबह मुझे पकड़ कर चार बार यह गाना सुनवाया… यूं रूठो ना हसीना, मेरी जान पे बन आएगी…

कह रहे थे, “आज सुबह सुबह सपने में आया कि मैं आपको ये गाना सुनवा रहा हूँ… सच पूछो तो मैं कई बरसों से ये गाना आपको सुनवाना चाहता था लेकिन कभी याद ही नहीं आया… याद आया भी तो सपने में…”

“आप तो बस शशि कपूर को देखिए… आप कर सकती हैं ऐसी स्टेप्स…”, मैंने मुस्कुराते हुए हाँ में सर हिलाया…

“तो करके दिखाइएगा…”

“ये टन्न सी घंटी की आवाज़ सुनिए पहले अंतरे में, और हर अंतरे की दो लाइन्स के बाद बदलती हुई बीट्स सुनिए… तबले की थाप सुन रही हैं ना आप…”

“आपको पता है एक ज़माना था जब इस गाने का वीडियो रिकॉर्ड करके रख लिया था… ज्यादा नहीं तो कम से कम 1500 बार देखा होगा ये गाना… कोई एक बार में इतनी सारी चीज़ें एक साथ देख ही कैसे सकता है…”

“बोल कोई ख़ास नहीं, बहुत एवरेज गाना है… लेकिन वो जो… वो जो… क्या कहते हैं उसको …. होता है कुछ… कोई एक टन्न की आवाज़ समझ लो या फिर शशि कपूर ने पूरे गाने में एक बार वो जो हाथ लहराया था उसका जादू समझ लो… बस यही कुछ सामान्य सी बातें होती हैं जो किसी गाने में बाँध लेती है मुझे…”

वो गाने में शशि कपूर को देखने को कहते रहे और मैं उनकी गाना दिखाने की अदा को देखती रही…

मैं तय नहीं कर पा रही थी कि उनके दिल की बात सुनूं या अपने दिल की, आखिर दोनों ही यानी शशि कपूर और स्वामी ध्यान विनय ‘नौ नम्बरी’ जो ठहरे… दीवाना और किसे कहते है…. इन्हें ही कहते हैं…

आज भी कभी किसी बात पर रूठ जाती हूँ तो कहते हैं ये गाना आपके लिए ही बना है… यूं रूठो न हसीना मेरी जान पे बन आएगी…

कपूर परिवार, उन्हें हमेशा से ही अभिनय, संगीत और अध्यात्म की त्रिवेणी का संगम लगता है. अपने दोनों सुपुत्रों की भाव भंगिमाओं को देखकर ध्यान हमेशा कहते हैं, ये ज्योतिर्मय तो बिलकुल राज कपूर है, वैसे ही एक हाथ उठाकर भोलेपन से बात करना… और ये छुटका गीत… शम्मी कपूर की तरह अल्हड़, मस्त मौला, संगीत जिसके राग राग में बहता नहीं, फड़कता है…

मुझे छेड़ते हुए वो हमेशा पूछते थे… आप शशि कपूर कब देने वाली हैं… और मैं कहती… इस बारे में आप इत्मीनान रखिये शशिजी सौ साल की उम्र पूरी किये नहीं जाने वाले… और वो जाएंगे नहीं तो आएँगे कैसे…

लेकिन जैसे ही उनकी मृत्यु की खबर मिली… लगा… शशिजी कुछ साल तो और रुक जाते… लेकिन मृत्यु कहाँ किसी के कहने से रुकती है.  79 साल की उम्र में शशि कपूर (असली नाम बलबीर राज कपूर) हम सब को अलविदा कह गए.

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