मसीही धर्म शिक्षा भाग – 4 : ‘बाईबल’ को जानिये

‘जामनिया’ के उस यहूदी धर्मालय में जब पवित्र-शास्त्र के किताबों को लेकर विवाद शुरू हुये तब वहां जो यहूदी धर्मगुरु मौज़ूद थे उन्होंने भी यही माना कि पुराने-नियम में केवल 39 किताबों को ही शामिल किया जाये.

इन विवादों के बीच बाईबिल के संकलन की प्रक्रिया को “केननाइजेशन” नाम दिया गया और आजतक ये प्रक्रिया किसी ने किसी रूप में चल ही रही है. (इसपर अलग से विस्तार से लिखूंगा)

[मसीही धर्म शिक्षा भाग – 1 : ‘बाईबल’ को जानिये]

प्रश्न है कि ईसाइयों के पास जब नया-नियम था तो आखिर उन्होंने पुरातन-नियम को भी क्यों अपना स्वीकार किया?

ईसाइयों ने पुरातन यहूदी धर्मशास्त्र (तनाक) को स्वीकार किया इसकी कई वजहें थी. पहली और सबसे अहम वजह थी ‘मूल पाप’ का सिद्धांत, जिसके अनुसार सारी मानवजाति पापी पैदा होती है.

जो आदम और हव्वा के मूल पाप की वजह से पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और ईसा पर विश्वास ही उस मूल पाप से मुक्ति दिलाती है. अब आदम और हव्वा की कहानी की पुष्टि के लिये पुरातन-नियम पर अवलंबन मसीहियों की अनिवार्यता है क्योंकि आदम और हव्वा की कहानी ओल्ड-टेस्टामेंट के सबसे पहले चैप्टर में है.

[मसीही धर्म शिक्षा भाग – 2 : ‘बाईबल’ को जानिये]

दूसरी वजह ये थी कि मसीह ईसा के कई आदेश सीधा-सीधा पुरातन व्यवस्था की ओर देखने के लिये कहती थी. तीसरी वजह ये कि ईसा ने खतना, बप्तिस्मा वगैरह संस्कारों को उसी रूप में जारी रखा जैसी वो यहूदी धर्मशास्त्र में वर्णित थी.

चौथी अहम वजह थी कि पुरातन-नियम को छोड़कर मसीही खुद को प्रतिश्रुत भूमि और भावी प्रजा के अधिकार से वंचित नहीं करना चाहते थे और पांचवी और सबसे अंतिम वजह थी कि मसीह धर्मगुरुओं के अनुसार ‘ओल्ड-टेस्टामेंट’ में ‘मसीह ईसा’ से संबंधित कई भविष्यवाणियाँ की गई हैं.

[मसीही धर्म शिक्षा भाग-3: ‘बाईबल’ को जानिये]

आज ‘ओल्ड-टेस्टामेंट’ में कई सारी अ-वैज्ञानिक, अ-कल्पनीय, अ-ऐतिहासिक, क्रूरता और हिंसा का आदेश देने वाली बातें तथा अश्लील और मानवजाति को शर्मसार करने वाली बातों के सामने आने की वजह से कई ईसाई खुद को ओल्ड-टेस्टामेंट से अलग कर लेते हैं क्योंकि ओल्ड-टेस्टामेंट की बातों और कंटेट पर जवाब देने की उनकी हिम्मत नहीं होती.

8 सितंबर, 1957 को एक पत्रिका ‘AWAKE’ में ‘50000 ERRORS IN THE BIBLE?’ शीर्षक से छपे एक आलेख के अनुसार बाईबिल में पचास हज़ार से अधिक वैज्ञानिक गलतियां और विरोधाभासी बातें हैं.

बाईबिल के अंदर के कई प्रसंग तो इतने अश्लील हैं कि उन्हें आप अपने घर वालों के सामने पढ़ भी नहीं सकते. शायद इसीलिये जॉर्ज बर्नाड शॉ ने बाईबिल के बारे में कहा था “The Bible is the most dangerous book on earth, keep it under lock and key. Keep the Bible out of your children’s reach.”

इसके अलावा बाईबल में कई बातें घोर स्त्री विरोधी हैं, कई अध्याय पशु-बलि और उनकी ऊपर क्रूरता का आदेश देती है और कई तथ्य तो ऐसे हैं जो नस्लभेदी और मानवजाति को शर्मिंदा करने वाली है.

जारी…

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