मसीही धर्म शिक्षा भाग – 3 : ‘बाईबल’ को जानिये

दो वर्ष पूर्व इसी दिसंबर महीने में मैंने चर्च के एक फादर के साथ 2012 में हुआ अपना एक संवाद यहाँ लिखा था. उस संवाद के दौरान फादर ने जब मुझसे ये कहा था कि ईसा की शरण में आना ही मुक्ति की राह है तो मैंने उनसे पूछा था कि मेरे हिसाब से तो दुनिया में एक भी ईसाई नहीं है जो परमेश्वर के शाप से मुक्त है तो फिर ईसाई होकर मैं अपनी मुक्ति को कैसे कन्फर्म मान लूँ?

फादर बोले, ये आप कैसे कह रहे हो कि हर ईसाई शापित है?

[मसीही धर्म शिक्षा भाग – 1 : ‘बाईबल’ को जानिये]

मैंने कहा, ये मैं नहीं आपकी ‘बाईबल’ कहती है. अगर आप अपनी किताब पढ़ेंगें तो उसकी सबसे आख़िरी किताब “प्रकाशितवाक्य” में लिखा है:-

“I warn everyone who hears the words of the prophecy of this scroll: If anyone adds anything to them, God will add to that person the plagues described in this scroll. And if anyone takes words away from this scroll of prophecy, God will take away from that person any share in the tree of life and in the Holy City, which are described in this scroll.” (Revelation, 22:18-19)

यानि, “यदि कोई मनुष्य इन बातों (मतलब बाईबिल के पद) में कुछ बढ़ाये, तो परमेश्वर उन विपत्तियों को जो इस पुस्तक में लिखीं हैं, उस पर बढ़ायेगा और अगर कोई इस पुस्तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्वर उस जीवन के पेड़ और पवित्र नगर में से जिस की चर्चा इस पुस्तक में है, उसका भाग निकाल देगा”.

[मसीही धर्म शिक्षा भाग – 2 : ‘बाईबल’ को जानिये]

ये बताने के बाद मैंने फादर से पूछा, ये बात आपकी किताब में लिखी है या नहीं? उन्होंने ‘हाँ ‘ में सर हिलाया तो मैंने उनको बताया कि पुराने-नियम के यूनानी भाषा में अनुवाद कार्य के बाद बहुत सारी किताबें सामने आ गई थी जिससे ये शंका उत्पन्न हो गई थी कि इनमें से वो कौन सी किताबें हैं जिसे पवित्र-धर्मशास्त्र में शामिल किया जाये.

ये समस्या मसीह ईसा के समय भी उपस्थित थी इसलिये उनके कथित सूलीकरण के करीब सत्तर साल बाद इस समस्या को सुलझाने के लिये उस वक़्त के लगभग सौ के करीब ‘रब्बी’ जेरूसलम के पश्चिमी हिस्से के एक यहूदी धर्मालय ‘जामनिया’ में इकट्ठे हुये थे जहाँ उनके दो दलों के बीच इस विषय पर बहुत भयंकर विवाद हो गया था.

फादर शायद इस बात से अनभिज्ञ थे सो थोड़े जिज्ञासु दिखे.

ये विवाद था कि बाईबल के पुराने नियम में उन्तालीस (39) पुस्तकों को शामिल किया जाये या 46 पुस्तकों को? पहले वाले दल के पास जो सूची थी उसमें उन्तालीस (39) पुस्तकें चिन्हित थीं जिन्हें ‘केनन’ कहा गया और दूसरे दल की सूची में 46 पुस्तकें चिन्हित थी जिन्हें Deuterocanonical पुस्तकें कहा गया.

दोनों दलों के मध्य इस विवाद को सुलझाने की भयंकर चुनौती आ पड़ी थी पर इस विवाद का निपटारा न तब हो पाया और न आज हो रहा है. जामनिया में हुई सुलह की कोशिशों की भ्रूण-हत्या वहीं पर हो गई.

यानि, पहले दल की मानें तो बाईबल में कुल मिलाकर 66 किताबें हैं (39 ओल्ड टेस्टामेंट में और 27 न्यू टेस्टामेंट में) और दूसरे दल वालों की मानें तो बाईबल में किताबों की कुल संख्या 73 है (46 ओल्ड टेस्टामेंट में और 27 न्यू टेस्टामेंट में).

अब जब प्रोटेस्टैंट वाले ‘बाईबल’ छापते हैं तो उनकी ओर से छपी ‘बाईबल’ में केवल 66 किताबें ही होती है और रोमन कैथोलिक, एंग्लिकन (एपिस्कोपल) तथा ईस्टर्न orthodox चर्च वाले जो बाईबल छापते हैं तो उसमें 73 किताबें होती हैं.

ये मसला आज तक चला आ रहा है, इस क्रिसमस में आप भी अपने निकटवर्ती कैथोलिक और प्रोटेस्टैंट चर्चों में जाकर कन्फर्म कर सकतें हैं.

इतना कहने के बाद मैंने उस फादर से कहा –

“इसका अर्थ ये है कि दोनों यानि प्रोटेस्टेंट और रोमन कैथोलिकों में कोई एक तो झूठा है. क्योंकि अगर सच में बाईबल में 73 किताबें ही हैं तो फिर प्रोटेस्टेंट वाले शैतान और शापित हैं क्योंकि उन्होंने प्रकाशितवाक्य के आदेश (And if anyone takes words away from this scroll of prophecy, God will take away from that person any share in the tree of life and in the Holy City) की अवहेलना की.

और अगर प्रोटेस्टेंट वाले सही हैं तो फिर रोमन कैथोलिक, एंग्लिकन (एपिस्कोपल) तथा ईस्टर्न orthodox चर्च वाले गलत और शापित हैं क्योंकि उन्होंने प्रकाशितवाक्य के आदेश (If anyone adds anything to them, God will add to that person the plagues described in this scroll) की अवहेलना करते हुये पवित्र धर्मशास्त्र में 7 किताबें और भी जोड़ दी.

तो आप ये तय करके बतायें कि ईसाईयत के इन दो बड़े धडों में कौन शापित है और कौन नहीं है, जहाँ तक मेरा ताअल्लुक है तो मेरी मुक्ति की चिंता आप बाद में कर लेना पहले आपस में इस विवाद का निपटारा कर लो.

जारी…

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