कटी पतंग : रहने दो, छोड़ो भी, जाने दो यार, हम ना करेंगे प्यार…

बहुत सूक्ष्म होती हैं वो बातें
लगभग अदृश्य सी…
जो स्थूल में परिवर्तित होते हुए
बदल देती है
एक पूरा रिश्ता
एक समय का टुकड़ा
कभी कभी एक पूरा जन्म …..

और जो स्थूल तल पर
देखते हो तुम
बड़ा सा बदलाव
जैसे चेहरे की झुर्रियां
ज्वालामुखी का फटना
और मेरा रूठ जाना…..

वो उन सूक्ष्म तलों पर हो रहे
बदलाव का ही परिणाम है
जिसे तुम्हारी आँखें देख नहीं पाती
या नज़र अंदाज़ कर जाते हो
सोचकर कि एक सांस ही तो है, कम ले लेंगे….

और उसी आख़िरी सांस की मन्नत माँगते हो
मौत के दरवाज़े पर
सिर्फ एक सांस ही तो और चाहिए है
जिसे भर कर जी लूं वो आख़िरी पल
जो गँवा दिया था तेरे रूठ जाने पर
जिसे खो दिया था चुम्बन की चोरी में…

और वो एक सांस ही तो थी
जो मेरे लबों पर छोड़ते हुए कहा था तुमने
रहने दो, छोड़ो भी, जाने दो यार
हम ना करेंगे प्यार….
हम ना करेंगे प्यार….

– जीवन

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