ज़्यादा इतराया न करो, ओ मेरे प्यारे प्यारे चाँद, मैं हूँ तो तुम हो

मैं इंतज़ार करती रहती हूँ
रोज़ उचक उचक कर देखती हूँ

घर के बनेरे पे मोमबत्तियाँ जला कर रखती हूँ
बार बार खोलती हूँ बंद दरवाज़ा

कोई आहट हुई क्या
कोई ऐसा meteorological department नहीं है
जो मेरे चाँद के आने का वक़्त तय कर दे

मेरा चाँद तो कभी कभी सूर्य के साथ भी आ जाता है
कभी कभी घनघोर बारिशों में भी
आता ज़रूर है

अब भी आएगा
उसने वादा किया था एक दिन
जब तक मैं ज़िंदा हूँ आता रहेगा

लो, वो आ गया
उसके आने में छुपे होते हैं
सारी कायनात के एक हो जाने के रहस्य

सब कुछ है भी और नहीं भी
सब कुछ मुझ में है और नहीं भी

उसके आने में छुपी होती है मेरे चेहरे की मुस्कुराहट
जो उसके जाने के और उसके फिर से आने के बीच
मुझे देती रहती है ज़िंदगी

ज़्यादा इतराया न करो, ओ मेरे प्यारे प्यारे चाँद
मैं हूँ तो तुम हो

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY