काश, देशवासियों को सही इतिहास पढ़ाया होता

एक मित्र कहने लगे कि आप इतिहास में बहुत जाते हैं, भविष्य की बात क्यों नहीं करते?

मैंने कहा कि जो अपने भूतकाल को नहीं जानते उनका भविष्य अंधकारमय होता है. भूतकाल अनुभव है जिसके सहारे ही सुनहरे भविष्य को संवारा जा सकता है.

जड़हीन पेड़ को हरा-भरा क्या किसी ने कभी देखा है? हो ही नहीं सकता. ठीक इसी जड़ की तरह इतिहास अति महत्वपूर्ण है. विशेषरूप से किसी भी जागरूक और विकासशील सभ्यता के लिए इतिहास की सही जानकारी होना बहुत जरूरी है.

गलत और भ्रामक इतिहास के क्या नुकसान हैं और सही इतिहास के क्या फायदे हैं, इस पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है, मगर यहां एक छोटे से उदाहरण से समझा जा सकता है.

वामपंथियों द्वारा ये झूठ फैलाया गया कि मुग़ल-तुर्क आदि आदि बाहरी आक्रमणकारी शासक महान थे. यही नहीं इतिहास में उनके शासनकाल का गलत बखान किया गया और उन्हें महिमामंडित करने का सफल प्रयास हुआ. मुगले आज़म फिल्म तक बन गई और अकबर जैसा अय्याश महानतम सम्राट के पद पर आसीन हो गया.

इससे यह हुआ कि देश का मुसलमान अपने आप को अकबर से जोड़ कर गर्व करता है. और महसूस करता है कि चूँकि वो इन शासकों से संबंधित है इसलिए उसका बुनियादी हक़ इस देश पर शासन करने का है.

उसे लगता है कि हिन्दुओं पर शासन करने के लिए ही वो पैदा हुआ है. उसे यह पता ही नहीं कि उसका यह अभिमान झूठ की बुनियाद पर टिका है. लेकिन वो इस भ्रम में पूरी जिंदगी गुजार देता है.

वो वर्तमान में नहीं जीता. वो आज के समय की मांग के अनुसार ना शिक्षा ग्रहण करता है, ना अध्ययन के लिए प्रयासरत है. वो तो बिना कुछ किये सब कुछ पाना चाहता है, और अगर कुछ करना ही पड़े तो तलवार की धार तेज रखना चाहता है, क्योंकि उसे अपने तमाम शासकों की महानता को स्थापित करने के लिए यही सब बताया गया है.

वो यह नहीं स्वीकार कर पाता कि इस दौर में वो सब सम्भव नहीं. झूठे इतिहास के कारण उसे रंगीन सपनों में उलझाना उसके मौलवियों के लिए आसान हो जाता है. इस मानसिकता में वो जाने अनजाने अपने को भी मुग़ल शासकों की तरह बाहरी मान लेता है.

उसे लगता है कि उसके अंदर भी अरब का खून बह रहा है. इस झूठे अहसास के आते ही उसे वंदे मातरम् से तकलीफ होने लगती है. इस देश समाज और मिट्टी से अपने आप को जोड़ नहीं पाने का वो कितना भुगतान कर रहा है उसे स्वयं नहीं पता.

अगर सही इतिहास पढ़ाया जाता कि कैसे बाहरी दानवों ने आकर हमारे पूर्वजों पर अत्याचार किये. कैसे कैसे लोगों को मार काटा गया. धर्म परिवर्तन के लिए कितनी यातनाएं दी जाती थीं. कैसे गांव के गांव उजाड़ दिए गए. मंदिरों को तहसनहस किया गया.

अगर उसे सही इतिहास पढ़ाया जाता तो उसे पता चलता कि कैसे बाबर ने राम मंदिर को तुड़वाया था. ऐसे में वो बाबरी मस्जिद की ज़िद नहीं करता. जब उसे अपने पूर्वजों के बारे में सही जानकारी मिलती कि उसकी किस पीढ़ी के किस परदादा-परनाना के साथ क्या हादसा हुआ था, तो वो फिर कभी अपने आप को बाबर-खिलजी से नहीं जोड़ पाता.

वो मुसलमान तो बना रहता मगर कम से कम गलतफहमी में नहीं जीता कि उसके पूर्वज अरब से आये थे. और इस तरह से जाने अनजाने वो इस जमीन से अपने आप को जोड़ता. यहां की मिट्टी की खुशबू अपने खून में पाता. यहाँ की महान सनातन संस्कृति में अपने अंश को ढूंढता और उसमे गर्माहट महसूस करता.

ऐसा करते ही वो मूलतः हिन्दुस्तानी बन जाता जिसके कारण फिर उसका भी भला होता और समाज और देश का भी कल्याण होता. इसलिए कहता हूँ कि सही इतिहास के बड़े फायदे हैं, क्योंकि सच कड़वा ज़रूर होता है मगर हर बीमारी का इलाज कड़वी दवाई से ही संभव है.

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