घरों में टॉयलेट से भी ज्यादा गंदी चीज़ : बर्तन मांजने का गूंजा या स्पन्ज!

प्रख्यात वैज्ञानिक रिसर्च जनरल “नेचर” में प्रकाशित शोध पत्र में दावा किया गया है कि अगर आपके घर में आपके टॉयलेट के कमोड से भी ज्यादा और बैक्टीरिया से भरपूर कोई चीज है तो वह है आपके किचन के झूठे बर्तन या डिश साफ करने का “स्पंज” या “गूंजा”.

क्या आपको मालूम है आपके घर में ऐसी कई जगह हैं जहां बीमारी पैदा करने वाले करोड़ों पैथोजिन भरे पड़े हैं. उदाहरण के लिये आपके बिस्तर का गद्दा, बेड शीट, तकिया, सोफा सीट इन सबमें कई तरह के पराजीवी और सूक्ष्म कीटाणुओं की दुनिया छुपी हुई है.

बहुत से फंगस, बैक्टीरिया और ऐलर्जेंन्स इनमें मिल जाएंगे. धूल के कणों में मिश्रित डस्ट-माइट और कॉकरोचों के अण्ड़े भी मिल जाएंगे. सभी तरह के पैथोजिन यानि बीमारी पैदा करने वाले जीवाणु घातक नहीं होते. इनमें से अधिकांश हमारे शरीर की त्वचा में पनपते हैं. कुछ जीवाणु और रोगाणु पर्यावरण से आकर हम पर आक्रमण करते हैं.

न्यूयार्क विश्वविद्यालय के माइक्रो बायोलाजिस्ट और पैथॉलाजिस्ट डॉ. फिलिप्स टीअरनो के अनुसार आपके शौचालय के कमोट में जितने खतरनाक रोगाणु, विषाणु रूपी बैक्टीरिया आदि पाये जाते हैं. उनसे हजारों गुना ज्यादा तादाद में बैक्टीरिया पनपने की जगह आपके बर्तन मांजने के काम में आने वाला स्पंज का गूंजा होता है.

इस गूंजे के सूक्ष्म छिद्रों में आहार की जूठन के माइक्रोस्कोपिक कण छुप जाते हैं. पानी की नमी का वातावरण मिलने से इन छिद्रों में कई तरह के बैक्टीरिया की कालोनियां बन जाती हैं. फिर जब इस गूंजे से बर्तन मांजे जाते हैं, तो साफ किये बर्तनों में यह बेक्टीरिया चिपक जाते हैं तथा हमारे ताजा भोजन के साथ पेट में जाकर बीमारियों के कारण बन जाते हैं.

नेचर में अभी हाल ही प्रकाशित ताजा रिसर्च पेपर से ज्ञात होता है कि बर्तन मांजने के स्पंज गूंजा में जांच करने पर इन बैक्टीरिया की अधिक मात्रा में मौजूदगी पाई गई. इनमें केम्पायलोबेक्टर (campylobactor), सालमोनेला (salmonella), स्ट्राफायलोकोकस (straphylococcus), ई.कोलाइ (E.coli), लिस्टेरिया(Listeria) प्रमुख हैं.

मांसाहार के बर्तनों को साफ करने के लिेए जिस स्पंज का इस्तेमाल किया गया खास कर चिकन के बर्तनों की सफाई में केम्पायलोबेक्टर बेक्टीरिया सामान्य से चार गुना अधिक पाया गया.

इन कीटाणु युक्त स्पंज से साफ किये बर्तनों में जब खाना खाया जाता है तो यह कीटाणु हमारे गट में बैठकर अड़्ड़ा बना लेते हैं. इसके कारण दस्त, उल्टी, पेट में मरोड़, बुखार आदि बीमारी हो जाती हैं. जब यह बैक्टीरिया खून में मिल जाता है तो मरीज की गंभीर स्थिति हो जाती है.

फूड़ पॉईज़निंग या पेचिस की इस बीमारी से बचने के लिये आवश्यक है कि हम लोग जिस स्पंज गूंजे का रोज उपयोग अपने बर्तन मांजने में करते हैं उसे उपयोग में लाने के बाद पानी में ड़ुबो कर रख देना चाहिये तथा उस पानी में ‘ब्लीच’ करने का आधा चम्मच द्रव डालना आवश्यक होता है.

अगर ब्लीच न हो तो स्पंज डूबे पानी में कीटाणु नाशक पोटेशियम परमेगनेट के तीन चार क्रिस्टल जरूर डालकर रखें. फिर जब उस गूंजे का उपयोग दुबारा करना हो तो साफ पानी में धोकर काम लाना चाहिये और एक दो सप्ताह में पुराना स्पंज फैंक देना चाहिये.

स्पंज में छुपे बैक्टीरिया इतने निर्लज होते हैं कि अगर माइक्रोवेव ओवन में रखकर उसे स्टेरेलाइज किया जाय तो भी 40% जिन्दा बच जाते हैं.

Microbiome analysis and confocal microscopy of used kitchen sponges reveal massive colonization by Acinetobacter, Moraxella and Chryseobacterium specie

Abstract

The built environment (BE) and in particular kitchen environments harbor a remarkable microbial diversity, including pathogens. We analyzed the bacterial microbiome of used kitchen sponges by 454–pyrosequencing of 16S rRNA genes and fluorescence in situ hybridization coupled with confocal laser scanning microscopy (FISH–CLSM). Pyrosequencing showed a relative dominance of Gammaproteobacteria within the sponge microbiota. Five of the ten most abundant OTUs were closely related to risk group 2 (RG2) species, previously detected in the BE and kitchen microbiome.

Regular cleaning of sponges, indicated by their users, significantly affected the microbiome structure. Two of the ten dominant OTUs, closely related to the RG2-species Chryseobacterium hominis and Moraxella osloensis, showed significantly greater proportions in regularly sanitized sponges, thereby questioning such sanitation methods in a long term perspective. FISH–CLSM showed an ubiquitous distribution of bacteria within the sponge tissue, concentrating in internal cavities and on sponge surfaces, where biofilm–like structures occurred.

Image analysis showed local densities of up to 5.4 * 1010 cells per cm3, and confirmed the dominance of Gammaproteobacteria. Our study stresses and visualizes the role of kitchen sponges as microbiological hot spots in the BE, with the capability to collect and spread bacteria with a probable pathogenic potential

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