इन्दौरी सपने में अपनी प्रेमिका नहीं, पोहे के ठेले को देखते हैं!

पोहे की इज्जत यदि कोई करता है तो इंदौर वाले. ऐसे पोहाखोर मैंने पूरे हिंदुस्तान मे कहीं नहीं देखे. क्वांटिटी का पक्का तो पता नहीं पर रोज पाँच सात क्विंटल पोहे का भोग तो लगा ही लेते होगें ये भाई लोग.

इंदौरियों से अधिक पोहे से प्रेम और कोई नहीं कर सकता. ये सपने में अपनी प्रेमिका को नहीं पोहे के ठेले को देखते हैं.

पोहे की बात भर निकल आये, इंदौरियों की आँखे चमक जाती है. इंदौरी पोहा खाने के लिये ही पैदा होता है. जीता पोहे के साथ है और जब मर जाता है तो शोक जाहिर करने आये लोग, पोहा खाते हुये उसकी और पोहे की तारीफ करते हैं.

पोहा खाने को हमेशा तैयार ये बंदे इसके लिये ना रात देखते हैं ना दिन. इन्हें पोहा खाने के लिये दिन के चौबीस घंटे कम पडते हैं.

यदि किसी इंदौरी की बातचीत में पोहे का ज़िक्र नहीं आया तो क्या खाक इंदौरी हुआ वो. इंदौर से बाहर बसे आदमी से पोहे का ज़िक्र छेड़ कर देखिये. वो तड़पने लगेगा. ये ऑक्सीजन के बिना रह सकते है पर पोहे के बिना इनका जी पाना नामुमकिन है.

इंदौरियों ने पोहे के साथ जो प्रयोग किये हैं वो काबिलेतारीफ है. दुनिया में खाने लायक शायद ही कोई चीज छोड़ी होगी इन्होंने जिसे ये पोहे के साथ मिलाकर ना खा गये हों.

इंदौर में पोहा बनता भी लाजवाब है. यह तय है कि ऐसे पोहे और कहीं बनते नहीं. पता नहीं यहाँ के पानी की तासीर है ये या पोहे को ही इंदौरियों से प्यार है जो खुद बखुद इतना बढ़िया बन जाता है.

आप सफर में हो. नींद में हों आप और अचानक हवा पोहे की सुगंध से भर जाये तो आँख खोलने की ज़रूरत नहीं, ये तय है कि आप इंदौर आ पहुँचे हैं. यहाँ के रेल्वे स्टेशन, बस स्टैंन्ड होटलों को छोडिये, हर सड़क, हर नुक्कड़ पर हाथ ठेलों पर हर जगह पोहा मौजूद होता है.

आप को पोहा पसंद है या नहीं यह मैं नहीं जानता. पर इंदौर आकर आप इसके प्यार में पड़े बिना नहीं रह सकते. यकीन ना हो तो इंदौर जाकर आजमा लीजिये इसे.

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