मेकिंग इंडिया गीतमाला : ज़िन्दा रहने के लिए तेरी कसम एक मुलाक़ात ज़रूरी है सनम

तुम्हारे लिए कोई शब्द बना ही नहीं
फिर भी मैं ‘तुम्हें’ कहती हूँ
कहते-कहते तुम्हारे क़रीब होती जाती हूँ
किसी दिन मैं तुम हो जाऊँगी
फिर तुम मेरी ख़ामोशी सुनना
मैं तुम्हारी आँखें पढ़ लूँगी

कभी-कभी लगता है
सच में कोई हो
कोई जो पलकें चूम ले
कोई जो तैयार होती को निहारता रहे

कोई जो दर्द में हाथ थाम कर पास बैठे
कहे, देखो तुम तो कितनी बहादुर हो
कोई जो किसी पहाड़ पे साथ चले
सुबह जब कोहरे से ढंकी हों सड़कें
नाक से बह रहा हो पानी

हाथ में हाथ डाल कर ख़ामोश साथ चले
भीगा तन, भीगा मन , भीगी हुई रूह
कोई जो जिसके साथ मैं जैसलमेर का
कालबेलिया नृत्य देखूँ

रात को बॉन फायर के पास
रेगिस्तान की अनन्तता से मुग्ध होते हुए
चलती हुई बस में काँधे पर सर रख सो जाऊँ
यूँ तो सब ठीक है
ख़ुद के साथ ख़ुश हूँ मैं
अपना घर ख़ुद हूँ मैं
अपनी छाया भी ख़ुद
तुम मेरे अंदर ही तो रहते हो
फिर भी कभी-कभी यूँही दिल कर जाता है

अभी कुछ-कुछ इंसान बाक़ी हूँ मैं

रूहों का लमज़ तो है
ज़रा जिस्मों को भी ख़बर होने दो
लोग जिस्मों से रूह तक उतरते हैं
हम रूह में जिस्म उतारेंगे

इक मुलाक़ात तो ज़रूरी है सनम

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY