बिल्ली मर गई होगी

दुलार की भाषा अक्लमंद हो गई है,
अक्लमंद होना लोप होने की तरह ही लगता है मुझे,
मेरा अनहोनी पर सख्त मिजाज टूटता जा रहा है आज कल
क्या इतना क्षीण हो गया हूं मैं, कि धारणाएं कमजोर होकर टूटने लगे
या अदृश्य हो जाएं कोई कठोर दावे,

मैं तुमसे ये सवाल नहीं करूंगा कि मैं तुम्हारी कुछ बातें क्यों मानने लगा हूं
मैं विश्वास नहीं कर पा रहा कि पिछले तीन रोज से मेरी एक पालतू बिल्ली गायब है
शायद उसे मार दिया गया हो,
विधाता ने डाल ही दिया शायद मौलिक अधिकारों की गिरेबां में हाथ !

मैं उसके साथ तुम्हारी तमाम बिल्लियों से भी प्यार करता रहा हूं
क्या अब भी तुम्हारी पालतू बिल्लियां
तुम्हारे पैरों में गिरती है, क्या अब रगड़ती है वे अपनी नाक और पूंछ तुम्हारे कदमों से!

अगर ऐसा है
तो वे भी तुमसे
उतना ही प्यार करती है
जितना कि मैं,

मुझे किसी मृत बिल्ली की देह चाहिए इस वक्त,
क्या तुम्हारी तमाम बिल्लियां पूजनीय हैं प्राचीन मिस्र की बिल्लियों की तरह
क्या तुम आज भी किसी बिल्ली की मौत के बाद उसकी ममी बनाकर रख देने की बात पर कायम हो
क्या तुम चूहों और दूध की कटोरी के साथ दफनाना पसंद करोगी उन्हें

मैं ये भी पूछना चाहता हूं कि
तुम्हारी किताबों के पास बैठने वाली नखरीली और नीली आंखों वाली बिल्ली जब मर जाएगी तो क्या तुम अपनी भौंहें शेव करवा लोगी!
मुझे कभी कभी लगता है ये नवंबर हत्यारा था
मुझे मेरी बिल्ली चाहिए, या कुछ दिन के लिए तुम्हारी वो बिल्लियां भेज दो…

जिसे सबसे ज्यादा सहलाया तुमने, सबसे ज्यादा जिस बिल्ली ने अपनी नाक, मूंछ या गर्दन को रगड़ा तुम्हारे कदमों से,
या सबसे जियादा बार तुम्हारे साथ सोई जो बिल्ली
जो सबसे जियादा अभ्यस्त हो गई हो तुम्हारे कोमल स्पर्श की या जिस बिल्ली से
सबसे जियादा प्यार किया तुमने…

– एस.एस.पंवार

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