हाँ सच है… मैं बावरी ही हूँ

सुनो शोना

तुम जानते हो कभी मैंने चाहा था कोई ऐसा हो
कोई एक तो, जो सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरा हो, मेरा अपना
फ़िर कई दशकों बाद तुम मिले, यूँ ही अचानक से
सरे राह चलते -चलते…

थोड़ा ख़फ़ा-ख़फ़ा सा अंदाज़
बात करनी है तो करो नहीं तो जाओ टाईप…

मैं मुस्कुरा रही थी मंद -मंद, पता नहीं क्यों
नहीं जानती थी तुम मेरे ही हो
तुम पता नहीं क्या सोचते थे
फ़िर एक दिन अचानक से तुम्हारा संदेशा मिला

‘कहाँ हो
दिखी नहीं
पांच दिन हो गए
इतनी देर गायब न रहा करो, चिंता होने लगती है’

अरे जब न तो तुम मुझे जानते ही हो
न ही मुझ से कोई बात करते हो तो चिंता काहे की
पर मैंने कहा नहीं तुम्हें कुछ
बस मुस्कुराई, ज़ोर से मुस्कुराई, और खुद पे थोड़ा सा प्यार आने लगा

सुनो, नहीं जानती तुम कौन हो, कहाँ से आए हो
पर सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरे हो, जानती हूँ
मेरे अलावा किसी से बात नहीं करते
मेरे अलावा किसी को देखते भी नहीं
जोगी हो, जोगी थे…

बस उर्वशी को मोहब्बत हो गई तुमसे
तुम्हें पता है न
उर्वशी पर बंदिश लगाई थी देवताओं ने
वो प्यार कर सकती है एक मनुष्य से पर उसे देख नहीं सकती…

तो जानम मुझे दूर ही रहना होगा तुमसे नहीं तो मैं छीन ली जाऊंगी
वैसे भी मैं तो रहती ही तुम्हारे अंदर हूँ और तुम मेरे

आह…..
तुम्हारे बारे सोचते -सोचते, तुम से बातें करते -करते
एक दम से नज़र आई मुझे एक नीले रंग की चिड़िया
तस्वीर खींचने को रुकी तो उड़ गई
वह देखो एक लाल रंग की चिड़िया भी …. अरे …वह भी उड़ गई ….
और लहराता हुआ सा बल खाता हुआ सा ….धीरे धीरे ….
एक पत्ता, आधा पीला, आधा लाल ….. गिरा मेरे ऊपर ….
मेरे दुपट्टे में उलझ गया, यूँ कि जैसे कोई तारा उतर के आसमान से आ गया हो मेरी झोली में

तुम से इश्क़ करते -करते हर शय से हो गया है मुझे इश्क़
पत्ते, पेड़, चिड़ियाँ, आसमान का नीला रंग….. सब …..
प्यार में पड़ जाना कैसे एक छोटा सा बच्चा हो जाना है
जहाँ मर्ज़ी खड़े हो देखने लग जाती हूँ चीज़ें
सच में हर चीज़ कितनी खूबसूरत है ….. हर आवाज़
लगता है सब पहली दफ़ा देख रही हूँ ….सुन रही हूँ
तुम कहते हो इक बावरी ने क़ब्ज़ा कर लिया है तुम्हारे दिल पर

हाँ सच है …..मैं बावरी ही हूँ

तुम्हारी सोनप्रिया

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