बिना लाभ की आशा के कौन करता है निवेश?

पिछले लेख पर पूछे प्रश्न – क्यों हम सस्ती बिजली, पानी से खुश हैं, और फिर शिकायत करते हैं कि बिजली 8 घंटे गोल रहती है – पर एक मित्र ने टिप्पणी की कि मुझे यह नहीं पता कि बिजली उत्पादन की वास्तविक दर क्या है… सर्विस प्रोवाइड करने वाली कंपनियां भी अच्छा खासा लाभ कमा लेती है.

वह मुझे सलाह देते हैं कि मैं पहले आरटीआई से पता कर लू कि एक्चुअल कॉस्ट क्या है फिर लेख लिखूं.

उनका प्रश्न उचित है क्योंकि बहुत से लोगों के मन में यह धारणा बनी हुई है कि बिजली उत्पादन वाली कंपनियां भारत में अच्छा खासा लाभ कमा रही है. अतः जनता को बिजली की ज्यादा कीमत देने की आवश्यकता नहीं है. क्या यह वास्तव में सही है?

तो क्यों नहीं वह कंपनियां अधिक से अधिक बिजली बेचें और अधिक से अधिक लाभ कमाएं. फिर तो बिजली में कटौती तो होनी ही नहीं चाहिए थी.

आप भाजपा की सरकार को छोड़ दीजिए. पुरानी सरकार के समय में भी बिजली कंपनियों को ‘लाभ’ मिल रहा था. तब भी बिजली में इतनी कटौती क्यों होती थी?

क्यों बिजली में इतना उतार चढ़ाव या फ्लक्चुएशन होता है जिससे विद्युत के उपकरण खराब हो जाते हैं? क्यों हर घर में उपकरणों की सुरक्षा के लिए वोल्टेज स्टेबलाइज़र रखना पड़ता है? क्यों घर और दूकान में इनवर्टर लगे हुए हैं? क्या इसकी कोई कीमत नहीं है?

जब आपके घर में बिजली नहीं आती, आपका कंप्यूटर एकाएक बंद हो जाए, और आपके बच्चे या आप उस पर काम ना कर पाए, उसका लाभ हानि का हिसाब कौन निकाल कर रखेगा? कैसे आप विदेशों में रहने वाले बच्चों या वहां के व्यवसाय से मुकाबला करेंगे जब उनके यहां चौबीसों घंटे बिजली बिना फ्लक्चुएशन के आती है.

बिजली आपके घर तक आए इसके लिए बिजली उत्पादन एक कंपनी करती है, उस उत्पादन क्षेत्र से आपके जिले तक बिजली लाने का काम एक दूसरी कंपनी या व्यवस्था करती है, और उस जिले में बिजली वितरण का कार्य एक तीसरी कंपनी करती है.

अगर आप केवल लागत की ही बात करेंगे तो उस वितरण का पैसा कहां पर जोड़ा जाएगा? विद्युत प्रणाली के रखरखाव और उसके अपग्रेडेशन में होने वाला खर्चा कहां से आएगा? कैसे बिजली के उपकरण, ट्रांसफार्मर इत्यादि के आधुनिकीकरण का खर्चा आएगा?

कैसे कृषि को बाज़ार से कम भाव में बिजली दी जाएगी और कैसे उस नुकसान की भरपाई होगी? कैसे कम आय वाले घरों में कम दर पर या फ्री की बिजली दी जाएगी और किस से उसका पैसा वसूला जाएगा?

अंत में, क्या लाभ कमाना गलत है? क्यों कोई कंपनी विद्युत वितरण के क्षेत्र में आएगी? क्या सरकारी क्षेत्र में बिजली का वितरण ठीक ठाक था? क्यों सरकारी क्षेत्र के उद्यम घाटे में चल रहे थे?

अगर लाभ कमाना इतना बुरा है तो आप जिस सेल फोन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, उसकी कीमत 17 हजार रुपए थी और वह फोन एक चाइनीज़ कंपनी का था. क्या उस फोन के लिए आप लाभ नहीं दे रहे हैं? उसमें लाभ देना मंजूर है लेकिन जिससे आपके घर में बिजली आ रही है और जिसके बिना आप का काम नहीं चल सकता उस में लाभ आप देना नहीं चाहते?

जनता की इसी भावनाओं का लाभ राजनीतिज्ञ उठाते हैं. फ्री या लागत से कम दर की बिजली के नाम पर वे सरकार तो बना ले जाते हैं लेकिन यह नहीं सुनिश्चित कर पाते कि बिजली चौबीसों घंटे बिना फ्लक्चुएशन के मिले तथा बिजली के उत्पादन से लेकर वितरण की व्यवस्था दुरुस्त रहे.

क्या आपको लगता है कि बिजली उत्पादन से लेकर वितरण में निजी क्षेत्र दान-दक्षिणा के उद्देश्य से निवेश कर रहा है?

क्या किसी भी क्षेत्र में या किसी भी व्यवसाय में व्यक्ति बिना लाभ की आशा के निवेश करता है?

क्या बात है कि भारत में ना तो गूगल, ना ही एप्पल, ना ही फेसबुक, ना ही अमेज़न और ना ही माइक्रोसॉफ्ट बन पाया? मत भूलिए कि एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट को छोड़कर यह सभी पिछले 10-15 वर्षो में अस्तित्व में आयी है.

कहीं इस स्थिति के पीछे हम भारतीयों में लाभ को ‘गंदा’ समझना, तथा पूर्व की सरकारों के द्वारा अपने नाते रिश्तेदारों और अभिजात्य वर्ग को ही बढ़ावा देने की मंशा तो जिम्मेवार नहीं है?

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