क्या अपराध करना भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है?

विवादित फिल्म पद्मावती के निर्माता संजय लीला भंसाली की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं. फिल्म के खिलाफ देश भर के हिन्दुओं का आक्रोश और विरोध झेल रहे भंसाली के सामने अब एक नई परेशानी आई है.

सेंसर बोर्ड के सदस्य और भाजपा नेता अर्जुन गुप्ता ने भंसाली द्वारा की गई विभिन्न गंभीर और आपराधिक अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भंसाली के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है.

गुप्ता ने पत्र में लिखा है – मैं फिल्म पद्मावती के निर्माता संजय लीला भंसाली की नियमविरुद्ध कार्यप्रणाली की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करके उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाही की मांग करता हूँ ताकि भविष्य में कोई फिल्म निर्माता इस तरह भारतीय कानूनों का मखौल ना बना सके.

उन्होंने कहा कि – फिल्म पद्मावती के निर्माता ने सर्वप्रथम बिना सेंसर बोर्ड से पास कराये कुछ चुनिन्दा पत्रकारों को फिल्म दिखाई और उनके जरिये मीडिया में कहलवाया कि फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है, यह कानून के मुताबिक़ नहीं है.

अभी हाल ही में उन्होंने ब्रिटेन के सेंसर बोर्ड को दिखाकर सर्टिफिकेट ले लिया. बिना भारतीय सेंसर बोर्ड से पास कराये वे इसे ब्रिटेन तक ले गए.

भारतीय कस्टम विभाग ने कैसे इसकी इजाजत दी, या वह इसे स्मगल करके बाहर ले गए. इसकी जांच हो और उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही हो, क्योंकि सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 अनुसार फिल्म तब तक ट्रेवल नहीं कर सकती जब तक कि उसके साथ सर्टिफिकेट ना हो.

उन्होंने कहा कि भाजपा नेता व सांसद सुब्रमनियम स्वामी ने भी इस बात का दावा किया है कि फिल्म की फंडिंग दुबई से हुई है, उनकी फंडिंग की भी ED (प्रवर्तन निदेशालय) से जांच कराई जाए.

उन्होंने कहा कि फिल्म के निर्माता ना सिर्फ इतिहास से बल्कि भारतीय कानून से भी खिलवाड़ कर रहे हैं, मैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करता हूँ.

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