रोहित, तुम खुद हिंदू होकर ना खुद को पहचान पाये और ना इन हिंदू नेताओं को

मैंने नहीं किया समर्थन रोहित सरदाना का… हाँ, मैंने नहीं किया कभी भी समर्थन रोहित सरदाना का और ना ही हुआ इतना भावुक कि उसकी पिक अपनी वॉल पर लगाता क्योंकि मैं पहले ही जानता था इस एपिसोड का क्लाइमैक्स.

मेरे मस्तिष्क में पहले से ही थे इसके स्पष्ट चार पक्ष :

1. रोहित सरदाना : गलतफहमी में जी रहा एक हिंदू जो सोच रहा था कि वो एक सेलिब्रिटी है, एक पत्रकार जिसके बड़े बड़े लोगों से परिचय हैं, उसके एक कॉल पर बड़े बड़े मंत्री और फैन फॉलोअर्स हाहाकार मचा देंगे.

लेकिन घबरा गया बेचारा देखकर कि एक सुई भी नहीं खडकी उसकी चीख पुकार पर.

2. भाजपा, बजरंग दल और हिंदू संगठन और सरकारें : ये नख-दंत हीन शेर हैं. इनकी मर्दानगी केवल वैलेंटाइन डे पर बच्चों को पीटने तक ही सीमित है. मुसलमानों के सामने इनकी पेंट गीली हो जाती है.

अगर ओवैसी कहता है कि 15 मिनिट के लिये पुलिस हटा लो फिर हिंदुओं को उनकी औकात बतायेंगे, तो गलत क्या कहता है?

संबित पात्रा और योगी की दहाड़ केवल चैनलों और चुनावी सभाओं तक सीमित है और दोष उनका भी नहीं, वे भी हमसे से ही तो आते हैं जो जानते हैं कि हिंदुओं का कोई भरोसा नहीं कब जाति के नाम पर बंट जायें और अगली बार सत्ता सुख मिले ना मिले तो पचड़े में काहे पड़ें. अपनी अपनी भुगतो सभी.

3. जातिगत संगठन : आज जाट महासभा का खून नहीं खौला? आज एक जाट की बेटी को धमकी देने पर पूरे जाट समाज का अपमान नहीं हुआ?? वैसे तो बात बात पर सड़कों पर उतर आते हो, अब क्या लहू ठंडा हो गया??? अब सड़कों पर नहीं उतरोगे???

और राजपूत करणी सेना के लठैतों, तुमसे बड़ा कृतघ्न मुझे कोई नहीं दिखता. ये वही रोहित सरदाना है जो पत्रकारों की भीड़ में अकेला तुम्हारे पक्ष में खुलकर खड़ा था, तुम्हारे पक्ष में आवाज उठा रहा था और अब उसी कारण उस पर मुसीबत आन पड़ी तो घरों में छिप गये? कहां हैं तुम्हारी तलवारें और मूंछें?

पर जानता हूँ, तुम लोग सिर्फ गुंडे हो जो अपने पैसा खाऊ नेताओं के इशारों पर गुंडागर्दी कर सकते हो. अगर आज तुम रोहित के पक्ष में खड़े हो जाते और मुसलमानों को खुला चैलेंज कर देते तो मैं और मेरे जैसे सैकड़ों लोग कल ही करणी सेना की सदस्यता ले लेते.

4. सोशल मीडिया : इसका भरपूर दोहन राजनेताओं द्वारा किया जा चुका है और चुनाव से पहले इसकी कोई औकात नहीं, इसलिये इसके 100% समर्थन के बावजूद जमीनी स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ सकता.

कुल मिलाकर कोई व्यक्ति, जाति, संगठन या सरकार आपके लिए नहीं आने वाला. अगर आपको मुस्लिमों के विरुद्ध कुछ बोलना भी है तो बेशक बोलिये पर अपनी रिस्क पर वरना आम कायर हिंदू की तरह गरम रजाई में बैठकर पनीर पकौड़ों के साथ गर्म चाय का लुत्फ उठाइये और जब मुस्लिम भीड़ दरवाजे पर आ जाये तो दो लाइन का कलमा पढ़ लीजिएगा.

अफसोस, रोहित सरदाना तुम खुद हिंदू होकर ना तो खुद को पहचान पाये और ना इन हिंदू नेताओं को.

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