पहले मेंटेनेंस, फिर चले ट्रेन! लेट-लतीफी को रहें तैयार

पिछले दिनों एक मित्र की एक पोस्ट आयी थी… बेहाल परेशान मित्रवर 5 घंटे से इटावा स्टेशन पे बैठे, लखनऊ जाने को, गोमती express का इंतज़ार कर रहे थे. और ट्रेन थी कि आने का नाम न ले… 5 घंटे लेट.

अभी एक और मित्र का फेसबुक स्टेटस देखा. कहते हैं कि भारतीय रेल सामान्य परिस्थिति में भी, मने कोहरा कुहासा न होने पर भी लेट लतीफी का रिकॉर्ड बना रही है.

ये सच है कि आजकल रेलें बहुत ज़्यादा लेट चल रही हैं. यात्रियों का नाराज़ निराश होना स्वाभाविक है.

पर आपने कभी सोचा कि आजकल रेलें इतनी लेट आखिर चल क्यों रही हैं? मैं आपको कुछ महीने पीछे ले चलता हूँ. खतौली की रेल दुर्घटना याद है? क्यों हुई थी खतौली रेल दुर्घटना?

उसमें आपराधिक मानवीय लापरवाही तो एक कारण था ही… पर इसके अलावा एक दूसरा कारण ये भी था कि पटरी की मरम्मत maintenance करने के लिये रेल का इंजीनियरिंग विभाग ब्लॉक मांग रहा था पर परिचालन विभाग ने ब्लॉक देने से साफ मना कर दिया…

ब्लॉक लेने का मतलब होता है कि हम अगले दो घंटे तक पटरी की मरम्मत करेंगे और उस दो घंटे में कोई रेल वहां से नही गुजरेगी. अब ब्लॉक देने का मतलब कि उस रुट पर चलने वाली तमाम रेल गाड़ियाँ, माल गाड़ियाँ यहां वहां खड़ी कर दी जाएंगी.

इसको इस उदाहरण से समझ लीजिए कि कोई हाई-वे टूटा पड़ा है और उसकी मरम्मत के लिए ट्रैफिक दो घंटे रोक दिया जाए. ऐसी में एक व्यस्त हाई-वे पर कितना लंबा और कैसा भयंकर जाम लगेगा? और वो जाम एक बार लग गया तो उसे क्लियर होने में कितना समय लगेगा?

खतौली रेल दुर्घटना हुई तो पूरी रेलवे की भयंकर छीछालेदर हुई. ऐसी हुई कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु से लेकर पूरे रेलवे बोर्ड की नौकरी चली गयी.

आज तक रेलवे की पहली प्राथमिकता Punctuality (समयबद्धता) थी. चाहे कुछ हो जाये गाड़ी पिटनी नहीं चाहिए. रेल समय से चले. ऐसे में संरक्षा से समझौता कर पिछले 50 साल से इसी तरह देश की रेल चल रही थी.

नए मंत्री पीयूष गोयल आये तो उन्होंने प्राथमिकता बदल दी… अब उनका मूल मंत्र है… punctuality गई तेल लेने… खड़ी कर दो साली को साइड में… जर्जर पटरियों पर अब रेल नही चलेगी… खड़ी रहे… पहले maintenance करो, फिर रेल चलाओ…

दूसरी बात ये कि अगर रेल दुर्घटना होती है तो पूरी दुनिया जान जाती है, पूरी दुनिया में थू थू होती है, पूरी दुनिया गरियाती है… अगर रेल लेट होती है तो सिर्फ उस रेल में बैठे कुछ हज़ार यात्री गरियाते हैं और वो लेट लतीफी अखबार में नहीं छपती… TV पर नहीं दिखती.

इसलिए, अगले साल-दो साल रेलों की लेट लतीफी के लिए तैयार रहिए. पीयूष गोयल रेल को साइड में खड़ी कर पहले पटरी की मरम्मत करेंगे.

वैसे भी रेलवे का प्लान है कि अगले 3 से 5 साल में अपना आधे से ज़्यादा लोड सड़क और हवाई यात्रा की तरफ मोड़ दिया जाए.

नितिन गडकरी जो सड़कें बना रहे हैं उनपर बस सेवा आज की रेल से दुगनी तेज़ होने जा रही है.

दिल्ली-लखनऊ रुट पर राजधानी 9 घंटे लेती है जबकि बस आजकल सिर्फ 6 घंटे में लगा देती है. वो दिन दूर नहीं जब दिल्ली से वैष्णो देवी कटरा की बस यात्रा सिर्फ 7 – 8 घंटे में होगी.

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