किसने दी उन्हें यह शक्ति… उनके आतंक ने या हमारे भय ने?

हैरी पॉटर पढ़ी है? या कम से कम टीवी पर देखी तो होगी?

हैरी पॉटर सिर्फ बच्चों की किताब नहीं है. इसके पन्ने पन्ने में राजनीति, समाजशास्त्र, सत्ता और प्रतिकार के कितने ही रूपक भरे पड़े हैं. उनमें से हर एक पर अलग से लिखा जा सकता है.

पर हैरी पॉटर की दुनिया में जो सबसे सशक्त रूपक है, वह है लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट. वोल्डेमॉर्ट सिर्फ एक दुष्ट जीनियस नहीं है, वह अपने आप में सत्ता और शक्ति का प्रारूप है.

पूरी कहानी में हैरी और डम्बलडोर को छोड़ कर कोई वोल्डेमॉर्ट को नाम से नहीं बुलाता. वोल्डेमॉर्ट हैरी को मारने आता है और अपनी सारी शक्तियाँ खो बैठता है. अपनी शक्तियाँ ही नहीं, अपना शरीर भी खो बैठता है.

पर बिना शरीर के, बिना शक्तियों के भी उसकी सत्ता बरकरार है. उसके अनुयायी अभी भी उसके लिए वफादार हैं. वे अपना जीवन, अपना शरीर, अपना मस्तिष्क तक दे देते हैं.

ऐसे ही एक अनुयायी के मस्तिष्क में अपने सूक्ष्म और अक्षम अस्तित्व के साथ वह रहता है. कमजोर, निस्तेज, पराजित…

फिर भी लोग उसका नाम लेने से डरते हैं. एक छोटे बच्चे से हार कर अपनी शक्ति और लगभग अपना अस्तित्व खोए हुए उस दुष्ट जादूगर से लोग अभी भी इतना डरते हैं कि कोई भी उसका नाम नहीं लेता.

यह आदर नहीं है, आतंक है. यही आतंक उसकी शक्ति है. अब लोग उससे इसलिए नहीं डरते क्योंकि वह शक्तिशाली है. बल्कि लोग उससे डरते हैं इसलिए वह शक्तिशाली है…

लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट की शक्ति देखनी है? अपने परिवेश में देखिए. रोहित सरदाना ने एक सवाल पूछा जो बिल्कुल ही उचित और प्राकृतिक सवाल है…

आप सेक्सी दुर्गा फ़िल्म बना सकते हैं, यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है… तो कभी सेक्सी फातिमा या सेक्सी आएशा फ़िल्म क्यों नहीं बनाते?

कोई मुझे यह समझा दे कि यह सवाल गलत क्यों है? बल्कि यही बता दीजिए कि आपने खुद आजतक यह प्रश्न क्यों नहीं पूछा?

क्या किया रोहित सरदाना ने? बस, लार्ड वोल्डेमॉर्ट का नाम ले लिया… लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट को मारा नहीं, लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट को गालियाँ भी नहीं दीं… बस नाम ले लिया…. और सारे डेथ-ईटर्स उसकी जान के पीछे पड़ गए.

इस्लाम का इतिहास रहा है, इस्लाम हारी हुई कौमों का मज़हब है… मैं नहीं कह रहा, मुस्तफा कमाल पाशा ने कहा था. जो हारे वही मुसलमान हैं…हिन्दू तो लड़ा, जीतता, जीता ही रहा.

ये मध्य युग में क्रूसेड में हारे… भारत में हार कर भागे, मराठों से हारे, सिखों से हारे, जाटों से, बुंदेलों से हारे… पूरा अरब अंग्रेजों का गुलाम रहा…

आज भी यहूदियों से इतना भयभीत हैं कि एक अकेला इज़राइल चार-चार देशों की सेनाओं को छह दिनों में मार के भूसा भर देता है… लेकिन कुछ है कि लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट का आतंक बरकरार है. आज भी कोई इनसे प्रश्न नहीं पूछ सकता…

यही आतंक इनकी ताक़त है, वरना इनकी अपनी ताकत कुछ नहीं है. भारत में केंद्र में हिन्दू बहुमत की सरकार है, लगभग हर राज्य में हिन्दू बहुमत की सरकार है… 80% आबादी आज भी हिन्दू है…

और हारा हुआ, दुर्बल निस्तेज लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट डार्क मार्क का निशान आकाश में छोड़ रहा है? यह शक्ति उसे किसने दी है… उसके आतंक ने या हमारे भय ने?

एक रोहित सरदाना ने खुल के एक सीधा सरल सा प्रश्न पूछा है… जो हर किसी को पूछना चाहिए था… एक हैरी पॉटर खड़ा हुआ है जिसने लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट को नाम लेकर पुकारा है. उसके साथ खड़े हों.

सब एक साथ मिलकर एक आवाज में खुल के यह सवाल पूछें – सेक्सी दुर्गा फ़िल्म बनाते हो तो सेक्सी फातिमा या सेक्सी आएशा क्यों नहीं बनाते, जवाब दो?

लॉर्ड वोल्डेमॉर्ट को नाम से पुकारें… अपने हैरी पॉटर का साथ दें… रोहित सरदाना का साथ दें…

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