Jesus is watching you…

Godfather फ़िल्म/ उपन्यास का मुख्य पात्र है Don Corleone… Newyork की सबसे बड़ी Mafia family का Don है…

उसकी एक आदत है… वो कभी भी किसी से फोन पे बात नहीं करता. उसका तर्क ये है कि फोन की बातचीत कोई भी तीसरा आदमी सुन सकता है और उसे record भी कर सकता है.

इसके अलावा वो अपने गिरोह में कोई भी आदेश अपने सेनापति जिसे italian mafia की भाषा में Consigliori कहते हैं, सिर्फ उसे ही देता है.

Consigliori आगे अपने Caporegime को आदेश देता है. Caporegime आगे किसी Hitman को आदेश देता है, कि फलाने को टपका दो या कूट दो…

Hit man को ये नहीं पता कि वो ये काम क्यों कर रहा है, किसके लिए कर रहा है… उसे तो सिर्फ आदेश का पालन करना है.

Don और actual हत्यारे के बीच 3 कड़ियाँ हैं. Police कभी Don तक नहीं पहुंच पाती. क्योंकि जुर्म के निशान Don के Den तक नहीं पहुंचते.

पिछले कुछ महीनों से जब भी मुझे कोई उद्यमी या व्यवसायी मिलता है तो मैं पूछता हूँ कि उसका धंधा कैसा चल रहा है. अब क्या हाल है. GST और नोटबन्दी का क्या असर हुआ है?

पहले तो वो छूटते ही कहता है कि बहुत बुरा हाल है.

पिछले दिनों एक स्टेशनरी के wholesaler ने जब यही कहा तो मैंने उससे पूछा कि क्यों??? GST लगने के बाद बच्चों ने pencil से copy पे लिखना और eraser से मिटाना बंद कर दिया क्या?

नहीं, बंद तो नहीं किया.

फिर क्या दिक्कत है?

पहले कोई पूछने वाला नहीं था, पर अब सारा हिसाब रखना पड़ेगा. पहले ज़्यादातर धंधा कच्चे में होता था पर अब हिसाब रखना पड़ेगा. पक्के बिल काटने पड़ेंगे. बस यही दिक्कत है.

नोटबन्दी से क्या दिक्कत हुई लोगों को? आम आदमी को तो 50 दिन की दिक्कत रही फिर धीरे धीरे सब ठीक हो गया.

उद्यमियों व्यापारियों Traders Businessmen को क्या दिक्कत हुई?

नोटबन्दी से पहले कुल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा था जो कच्चे में और cash में होता था. वो देश की एक parallel economy, समानांतर अर्थव्यवस्था थी…

उत्पादक ने माल बनाया बेच दिया. विक्रेता ने भी उत्पादक से माल खरीदा और बेच दिया… सरकार का कहीं कोई रोल नहीं.

ये सारा व्यापार कच्चे में होता था… करमजले नासपीटे मोदी ने वो सारा पैसा जिस से ये पूरा कारोबार होता था कच्चे में, वो सब Banks में जमा करवा लिया.

अब जब कच्चे में करने के लिए वो पूंजी ही नहीं रही तो कारोबार होगा कैसे?

नोटबन्दी ने बिना बिल पर्चे के होने वाले कारोबार की कमर तोड़ी, पहले तो नोटबन्दी करके और फिर उसके बाद GST लागू करके.

अब चूंकि देश का आधे से ज़्यादा कारोबार ही कच्चे में था तो अर्थव्यवस्था में गतिरोध आना तो स्वाभाविक सी बात है.

व्यापारियों की सिर्फ ये समस्या है कि पहले बिना किसी हिसाब किताब बिल पर्चे के धंधा करते थे पर अब Jesus is Watching…

अब ये Jesus कौन? ये कहां से आ गया?

तो हुआ ये कि एक बार एक चोर रात में एक कोठी में घुस गया, चोरी करने. अभी उसने एक कीमती सामान उठाया ही था कि कहीं से आवाज़ आयी… Jesus is watching you.

चोर ठिठक गया. उसने चारों तरफ torch मारी. कोई न दिखा. उसने सोचा मेरे मन का वहम है. उसने फिर दूसरा सामान उठाया तो फिर वही आवाज़ आयी… Jesus is Watching you…

वो फिर ठिठक गया. उसके प्राण सूख गए. उसने फिर torch घुमाई तो देखा कि कोने में एक तोता बैठा है. उसकी जान में जान आयी. उसने पूछा तुम्हीं बोल रहे थे?

तोते ने कहा, हाँ, मैं तो बस तुम्हें warn कर रहा था.

चोर ने पूछा, तुम्हारा नाम क्या है?

तोते ने जवाब दिया, मेरा नाम Moses है

चोर ने कंधे उचकाए… कैसे कैसे लोग हैं, तोते का नाम Moses रख देते हैं…

तभी पीछे से आवाज़ आयी… और अपने Rottweiler कुत्ते का नाम Jesus…

तो मितरों… दिल्ली में बैठा Jesus सब देख रहा है… Jesus is watching You…

कच्चे में धंधा करने वाले लोग Don Corleone की तरह निशान नहीं छोड़ते थे… न बिल न पर्चा और न कोई Tax, न Cheque से payment, सब काम cash में…

दिल्ली वाले Jesus ने सारा कैश bank में जमा करा लिया… now there are footmarks to follow you… And now Jesus is following you…

आपने अपना सारा पैसा bank में जमा कराया???

Jesus सब देख रहा है.

आप अब भी कच्चे में धंधा कर रहे हैं या पक्के में???

ध्यान रखिये Jesus सब देख रहा है. Jesus is watching you…

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