सेठ का काला जब सफ़ेद हो गया तो क्यों मना रहे नोटबन्दी पे छाती पीट मुहर्रम

आज मुझे फेसबुक पर बड़ा दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ…

एक बड़े ज्ञानी ध्यानी महापुरुष ने बताया कि किसी किस्म की सरकारी कार्यवाही से, जैसे कि इनकम टैक्स के छापे से या ED के Notice इत्यादि से किसी सेठ, व्यापारी या बिज़नेस मैन का बाल भी बांका नहीं होता.

उसे कोई फर्क नहीं पड़ता. बल्कि ऐसे छापों के बाद तो उसका स्वर्ण काल शुरू हो जाता है. उसका व्यापार बिज़नेस, उसकी साख Goodwill समाज मार्किट में बढ़ जाती है.

उसके बच्चों का भाव शादी-ब्याह के बाज़ार में बढ़ जाता है. बाजार में उसको उधार / कर्ज़ा देने वालों की संख्या भी बढ़ जाती है.

ये सब जान समझ के तो मुझे अब ऐसा प्रतीत होता है कि सेठ जी लोग तो इनकम टैक्स वालों को कुछ ले दे के अपने यहां छापा डलवा लेते होंगे.

सुना है कि हरियाणा में गांव गांव में बिन ब्याह लोगों की फौज तैयार हो रही है… हर गांव में ऐसे 25 – 50 अधेड़ होते युवा घूम रहे हैं जिनकी शादी ना हो रही… कोई उनको अपनी बेटी ना दे रहा…

उनको चाहिए कि किसी तरह जुगाड़ बैठा के अपने यहां इनकम टैक्स का छापा पड़वा लें…

पर मुझ मूढ़ बुद्धि को एक बात समझ ना आ रही कि जब नोटबन्दी फेल ही हो गयी, नोटबन्दी से किसी सेठ का कुछ न बिगड़ा. सबकी ब्लैक मनी, सफेद बोले तो White हो गई… देश का 99% पैसा बैंकों में जमा हो गया…

तो फिर ये चिहाड़ कायकू मची हुई है??? पिछले एक साल से ये छाती पीट मुहर्रम क्यों मनाया जा रहा है???

इसको मने इस सवाल को इस उदाहरण से समझिए…

एक सेठ जी के पास 10 करोड़ की ब्लैक मनी Liquid Cash पड़ा था तहखाने में. वो उस 10 करोड़ से सच-झूठ बोल के, डरा-सहमा सा, अपना काम धंधा चलाता था.

फिर नासपीटे करमजले मोदी ने नोटबन्दी कर दी.

अब बकौल राहुल गांधी, सेठ जी ने वो सारा पैसा बैंक में जमा करा दिया… और वो सारा पैसा सफ़ेद हो गया… (ये भी एक दिव्य ज्ञान ही है कि बैंक में जमा करा देने से ब्लैक मनी वाइट हो जाती है).

अब सेठ जी के पास 10 करोड़ या फिर 8 करोड़ White Money है (बकौल राहुल गांधी)… तो धंधा करना अब आसान है… या पहले आसान था जब कि ये पूरा पैसा black money थी?

सेठ जी को तो मोदी के पांव पूजने चाहिए, घी के दिये जलाने चाहिए, दीपावली मनानी चाहिए और नोटबन्दी को धन्यवाद देना चाहिए कि उनका 10 करोड़ का काला धन white हो गया.

फिर ये चिहाड़ कायकू मची है, नोटबन्दी पे छाती पीट मुहर्रम क्यों मनाया जा रहा है???

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