चुंबकीय क्षेत्र में हैं हम इक दूजे के

यह भी होगा अंतत: किसी दिन
कि बैठेंगे पास -पास
साथ -साथ
चाय की चुस्कियाँ भरते हुए
देखेंगे एक दूजे को मुस्कुराते हुए
मन के अंदर छुपी हज़ार बातों पर
जो कभी ज़ाहिर ही नहीं की

हंसगे उन लड़ाईयों पर
जो अक्सर बेवजह लड़ीं
कभी तुम मुझे बाहों में ले लोगे
मेरे बिना कहे
बिना बोले हो जाएँगी वो तमाम
हज़ारों बातें

कभी मैं तुम्हारे सीने पे सर रख
आँखें मूँदे लेटूँगी
तुम्हारे बिन कुछ भी कहे
वो तमाम रातें जो तुम्हें सोचते बिताईं मैंने
हो जाएँगी तुम तक तबादल
मेरे बिना कुछ बोले

कभी हम घूमेंगे आधी रात को
सुनसान सड़कों पे हाथों में हाथ डाले
बिना कुछ बोले
बिना कुछ कहे
तुम रीत जाओगे
मुझ से भर जाओगे
मैं रीत जाऊँगी
तुम से भर जाऊँगी

हाँ, जानती हूँ, इक दिन ऐसा ज़रूर होगा
चुंबकीय क्षेत्र में हैं हम
इक दूजे के
कब तक नॉर्थ पोल साउथ पोल का चक्र चलेगा

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