Fidel Castro : जिसे सिर्फ वीडियो गेम में ही मार सका अमेरिका

केरेबियाई सागर के सबसे बड़े द्वीप क्यूबा को ‘एंटिलीज का मोती’ कहा जाता है. कोलम्बस ने 1492 में क्यूबा की खोज की थी और स्पेन ने चार शताब्दियों तक इस पर राज किया था.

इस मोती से 13 अगस्त 1926 को एक ऐसे हीरे का उदय हुआ जिसकी “चमक” और “आभा” को अमेरिका जैसा सर्वशक्तिमान देश भी धूमिल नहीं कर सका.

फिदेल कास्त्रो ने 26 जुलाई 1953 को क्यूबा के राष्ट्रपति फल्गेंसियो बतिस्ता के विरूद्घ विद्रोह किया. अमेरिकी राष्ट्रपति “आईजनहावर” ने इस विद्रोह के समय बतिस्ता की हर तरह से मदद की. आर्थिक, राजनीतिक और हथियारों की मदद द्वारा कास्त्रो को खत्म करने का प्रयास किया गया. क्यूबा का यह संघर्ष अमेरिकी साम्राज्यवाद के विरोध में “राष्ट्रवाद+साम्यवाद” के युद्ध के रूप मे जाना गया.

यह वह दौर था जब “साम्यवाद और शीतयुद्ध” अपने चरम पर था. इस संघर्ष मे अंततः कास्त्रो विजयी हुए. जनरल बतिस्ता 31 दिसबंर 1958 को देश छोड़कर भाग गया और यहीं से कास्त्रो और अमेरिका के बीच संघर्ष की शुरूआत हुई जो पूरे “49 साल” तक चला और इस दौरान ‘अमेरिका’ के “11 राष्ट्रपति” उन्हे हटाने का असफल प्रयास करते रहे.

अमेरिका और कास्त्रो के सबंध उस समय सर्वाधिक बिगड़ गये थे जब क्यूबा में अमेरिका के फ्लोरिडा से मात्र 144 किमी दूर सोवियत संघ द्वारा परमाणु हथियारों से लेस मिसाईले तैनात करने की योजना दुनिया को पता चली. “जॉन केनेडी” की इस चेतावनी के बाद कि इस तरह की मिसाईलो की तैनाती अमेरिका पर हमले के समान मानी जायेगी.. .तब “सोवियत संघ” ने अपने हथियार वहां रखने की योजना निरस्त की. अमेरिका ने क्यूबा पर हर तरह के प्रतिबंध लगाये पर सोवियत मदद से वह हर अमेरिकी चुनौती से पार पाता गया. यह सोवियत मदद ‘मिखाईल गोर्बाच्योफ’ के आने के पूर्व तक चली.

गोर्बाच्योफ के मदद रोकने के और सोवियत संघ के विघटन के बाद घाटे की भरपाई कास्त्रो ने पर्यटन को बढ़ावा देकर पूरी की पर अमेरिका के सामने घुटने नहीं टेके.

इस दौरान अमेरिका कास्त्रो को रास्ते से हटाने का हर संभव प्रयास करता रहा. अमेरिकी ऐजेंसी सीआईए ने 634 बार कास्त्रो को मारने की कोशिश की… जहरीली सिगार/गोली/पावडर से लेकर जानलेवा हमले तक, दाढ़ी उखाड़ने से लेकर जेम्सबॉंड की फिल्मों के हर हथकंडे अपनाये, पर कास्त्रो अडिग रहे. अमेरिका को झांसा देने के लिये कास्त्रो जब तक क्यूबा के शासक रहे हर रात एक नयी जगह सोते थे, जिसकी खबर कुछ गिने चुने लोगों को ही होती थी क्योकि उन्हें पता था कि अमेरिका उन्हें खत्म करने के लिये सोते समय उन पर धोखे से हमला करवा सकता है.

‘चे ग्वेरा’ जैसे क्रांतिकारी भी उनके ही आंदोलन से निकले. अमेरिका ने उनको खत्म करने के लिये परिवार में भी फूट डालने की कोशिश की. उनकी बेटी ‘एलिना फर्नांडीज’ को भड़काकर उनके विरूद्घ विद्रोह करने का भी अमेरिका ने असफल प्रयास किया.

कास्त्रो के नाम अमेरिका के विरोध में सबसे बड़े भाषण देने का भी रिकॉर्ड है. 29 सितबंर 1960 को संयुक्त राष्ट्र में 4 घंटे 29 मिनट और1986मे हवाना मे ‘कम्युनिस्ट पार्टी कॉग्रेस’ के कार्यक्रम मे 7घंटे10मिनट का भाषण देने का रिकॉर्ड है.

कास्त्रो को हटाने में नाकामी से कुंठित होकर अमेरिका ने एक वीडियो गेम बनाया जिसमे अमेरिकी सैनिक विमान से क्यूबा की धरती पर उतरते है और क्यूबा मे तबाही मचाते हुऐ कास्त्रो के महल की और बड़ते है और कास्त्रो के शयनकक्ष मे घुसकर उनकी गोली मारकर हत्या कर देते है. “कास्त्रो इज डेड” के साथ गेम खत्म होता है.

अमेरिका जिसने हजारो मील दूर बैठे सद्दाम हुसैन और ओसामा बिन लादेन को “घर” में घुसकर खत्म कर दिया वो “कास्त्रो” को अपने पड़ोस में होने के बाद भी केवल “वीडियो गेम” में ही खत्म करके खुद को महाशक्ति होने की तसल्ली देता रहा. विगत वर्ष 25 नवम्बर 2016 को कास्त्रो के निधन के बाद अमेरिका को अब इस बात का अफसोस हमेशा रहेगा कि वो कास्त्रो का आजीवन कुछ न कर सका.

उस गेम का क्या नाम था ये तो अब याद नहीं है पर उस गेम को देखकर आप जान सकते हो कि अमेरिका कास्त्रो के सामने कितना मजबूर था.
स्कूल समय में न चाहते हुऐ भी मैंने अनेक बार उस वीडियो गेम मे कास्त्रो को खत्म किया था. कास्त्रो क्रांतिकारियो की स्मृति में हमेशा बने रहेंगे.

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