दो महीने में रोहिंग्या शरणार्थियों की घर वापसी, चीन की योजना पर अमेरिका को शक

यांगून. म्यांमार और बांग्लादेश दो महीने में रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी की प्रक्रिया शुरू कर देंगे. शरणार्थी संकट को लेकर वैश्विक दबाव के बीच ढाका ने 23 नवंबर को यह जानकारी दी.

म्यामां के रखाइन प्रांत में सैन्य कार्रवाई के बाद अगस्त से अब तक छह लाख बीस हजार लोग पलायन कर बांग्लादेश चले आए हैं.

वहीं, अमेरिका ने चीन के इस कथन पर संदेह जताया है कि ‘जटिल’ रोहिंग्या शरणार्थी संकट के समाधान के लिए बांग्लादेश और म्यांमार दोनों ने उसकी तीन चरणों वाली योजना को मंजूरी दी है.

तीन चरण वाली योजना में संघर्ष विराम, शरणार्थियों की वापसी और दीर्घावधि समाधान पर वार्ता शामिल है जिसकी घोषणा चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने की थी. उन्होंने सप्ताहांत में बांग्लादेश और म्यांमार दोनों देशों की यात्रा के बाद यह घोषणा की थी.

म्यामां की नेता आंग सान सू ची और बांग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हसन महमूद से राजधानी नेपीताव में बातचीत की. हफ्तों की रस्साकस्सी के बाद दोनों देशों ने इस बारे में एक करार पर हस्ताक्षर किया.

अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “हम रखाइन प्रांत के बारे में विदेश मंत्री वांग की घोषणा की खबर से अवगत हैं. हम चीन से इस बारे में और विस्तृत बातें सुनना चाहते हैं कि किस तरह वह जटिल मुद्दों का समाधान करेगा.”

बांग्लादेश ने कहा कि दोनों पक्षों ने दो महीनों में शरणाथियों की म्यामां में वापसी शुरू कराने पर सहमति जताई है. उसने कहा कि तीन सप्ताह के भीतर एक कार्य समूह का गठन किया जाएगा जो शरणार्थियों की वतन वापसी की तैयारियों का मार्ग प्रशस्त करेगा.

सू ची और उनकी बांग्लादेशी समकक्ष के बीच यह बातचीत पोप फ्रांसिस के इन दोनो देशों के दौरे से पहले हुई है. रोहिंग्या की दुर्दशा के बारे में पोप मुखर होकर सामने आये हैं.

बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने मीडिया के सामने दिए एक संक्षिप्त वक्तव्य में कहा, ‘यह शुरुआती कदम है. वे रोहिंग्या को वापस लेंगे. अब हमें काम शुरू करना होगा.’

बहरहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि कितने रोहिंग्या शरणार्थियों को वापसी करने दी जाएगी और इस पूरी प्रक्रिया में कुल कितना समय लगेगा.

इससे पहले अमेरिका ने कहा कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा ‘नस्ली संहार’ है. अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा कि इन अत्याचारों को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता.

उन्होंने हिंसा के लिए म्यांमार की सेना और स्थानीय तत्वों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए.

अमेरिकी सांसद और अधिकार समूह ट्रंप प्रशासन से आग्रह करते रहे हैं कि म्यांमार में हिंसा को नस्ली संहार घोषित किया जाए. म्यांमार के रखाइन प्रांत में हिंसा के कारण छह लाख से अधिक रोहिंग्या भागकर बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY