हम पुतले नहीं जलाते, लटकाते हैं

बीते एक माह से ‘पद्मावती’ फिल्म को लेकर चल रहे जोरदार विरोध के बीच अभी एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. जिसमें एक युवक की लाश किले की दीवार पर मिली है. लाश के पास चट्टानों पर कोयले से लिखा है कि ‘पद्मावती का विरोध – हम सिर्फ पुतले नहीं जलाते, हम लटकाते हैं.’

यह सनसनीखेज घटना जयपुर के नाहरगढ़ किले में आज सुबह सामने आई. जब किले में मॉर्निंग वॉक के लिए पहुंचे कुछ लोगों ने किले की दीवार पर लटकते एक शव को देखा. लोग सहम गए और तुरंत लोगों ने स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी दी.

सूचना के काफी देर बाद पुलिस पहुंची. इससे लोगों में रोष है. मौके पर सिविल डिफेंस टीम के सदस्य पहले पहुंच गए. इसके बाद पुलिस और सिविल डिफेंस के सदस्यों ने शव को दीवार से ऊपर खींचा और शव के गले से फंदा निकाला. पुलिस ने एफएसएल टीम को भी मौके पर बुला लिया.

पुलिस को युवक की जेब से आईडी कार्ड आदि मिला, जिससे युवक के जयपुर के शास्त्री नगर निवासी होने की जानकारी मिली है और उसका नाम चेतन सैनी है. इस युवक ने खुदकुशी की है या किसी ने उसकी हत्या कर उसकी लाश वहां लटकाई है इसका पता नहीं चल पाया है .

इस मामले में मेरे हिसाब से एक और पेच भी सामने आ सकता है. सूचना के मुताबिक नाहरगढ़ किले में जिस युवक का शव लटकता हुआ मिला है उसके पास पत्थर पर तांत्रिक चेतन राघव भी लिखा हुआ है.

मलिक मोहम्मद जायसी के महाकाव्य पदमावत में तांत्रिक चेतन का जिक्र है. तांत्रिक चेतन राघव चित्तौड़गढ़ के राजा रतनसेन के दरबार में हुआ करता था.

एक बार उसकी तंत्र विद्या से आहत होकर राजा ने उसे दरबार से बाहर कर दिया था और देश निकाला दे दिया था.

तांत्रिक ने पूर्णिमा की रात पहले ही तंत्र विद्या से पूर्णिमा का चांद दिखा दिया था . इससे पंडितों के साथ साथ राजा रतनसेन भी नाराज हुए थे जो तंत्र विद्या के खिलाफ थे.

देश निकाले के बाद तांत्रिक चेतन राघव अलाऊद्दीन खिलजी के दरबार में पहुंचा था. वहां उसने खिलजी को रानी पदमावती की सुंदरता का बखान किया था.

जायसी की पदमावत के अनुसार चेतन राघव ने जिस तरह से रानी पदमावती की सुंदरता के बारे में विस्तार से खिलजी को बताया था, उसके बाद ही खिलजी की रानी पदमावती को पाने ही इच्छा जाग्रत हुई थी और उसने चित्तौड़गढ़ के किले पर हमला किया था.

राजपूत समाज के लोग चेतन तांत्रिक को बहुत बड़ा दोषी मानते हैं. उनके मुताबिक चेतन तांत्रिक की वजह से ही खिलजी की रानी पदमावती को पाने ही इच्छा जाग्रत हुई थी, और उसने किले पर हमला किया था.

अब इस हादसे में किस चेतन की क्या और कैसी भूमिका है यह वक़्त ही बताएगा.

जो भी हो यह विवाद अब खौफनाक रूप लेता जा रहा है. संजय लीला भंसाली ने शायद एक बहुत बड़ी दुखान्तिका की रचना कर दी है!

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