षड्यंत्र का पर्दाफाश : इस प्रचंड महाझूठ में आखिर ‘पद्मावती’ है कहाँ पर

कुछ समय से समाचार चैनलों से तौबा कर रखी है. कारण वही है, झूठी खबरें देखकर खून जलता है. आज एक पोस्ट पर अशोक शर्मा जी का कमेंट आया. उन्होंने अपनी वॉल पर प्रकट हुआ एक वीडियो देखने के लिए कहा.

मैं उनकी वॉल पर गया और आजतक चैनल के इस स्टिंग को देखा. देखकर समझ आ गया कि स्टिंग की चीरफाड़ करना अति आवश्यक है.

दस-बारह बार देखने के बाद सब ऐसा दिखने लगा जैसे क्रीज़ पर दस ओवर टिकने के बाद बल्लेबाज़ को लेदर बॉल फुटबॉल की माफिक दिखने लगती है.

पिछले दिनों एक पत्रकार महोदय छत्तीसगढ़ सेक्स सीडी कांड में धरा गए थे. उसमें बहुत ही गंदे तरीके से असली आदमी का चेहरा काटकर भाजपा नेता का चेहरा लगाया गया था. कोई सस्ता एडीटर था जिसने अपना काम ठीक से नहीं किया और उस एडिटर की गलती पत्रकार पर भारी पड़ी.

अब आते हैं चैनलों के स्टिंग पर. भारतीय दर्शक दुनिया का सबसे भोला दर्शक है. उसे कुछ भी गटका दो, गटक जाता है.

आज तक चैनल ने ये स्टिंग करणी सेना के पदाधिकारियों पर करने का दावा किया. स्टिंग ब्रेकिंग न्यूज़ के रूप में बाहर आता है.

सितंबर में इस स्टिंग को इसलिए बाहर लाया गया क्योंकि उन्हें भरोसा था कि दिसंबर में भंसाली की फिल्म को बचाने के लिए ये बहुत काम आएगा. वे जानते थे कि अगले दो माह करणी सेना विरोध जारी रखने वाली है.

जैसे ही पद्मावती पर निर्णय हिन्दुओं की ओर जाता दिखाई देता है, ये वीडियो अचानक अन्य माध्यमों से सोशल मीडिया पर छा जाता है. देखने वाले कुढ़ते हैं लेकिन एक बार भी दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते.

(स्टिंग ऑपरेशन में जो बातें आपको दिग्भ्रमित करती हैं पहले उनके बारे में जान लीजिये)

– बैग में, शर्ट की बटन में लगे माइक्रो कैमरों के आड़े-तिरछे एंगल देखकर आप सकते में आ जाते हैं.

– फर्जी स्टिंग की एडिटिंग में दृश्यों में जानबूझकर अंधकार डाला जाता है ताकि दर्शक भ्रम में आ जाए.

– स्टिंग की कमजोरियों को छुपाने के लिए ‘स्टॉक शॉट’ डाले जाते हैं ताकि आपका ध्यान भटक जाए और आप बैकग्राउंड में चल रही कमेंट्री को सच मान लें.

आज तक चैनल के रिपोर्टर ख़ुफ़िया कैमरा लेकर करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव के जयपुर स्थित निवास पहुँचता है. वह सुखदेव से कहता है

‘हम भंसाली फिल्म प्रोडक्शन के लोकेशन मैनेजर बनकर सुखदेव के जयपुर स्थित घर पहुंचे. हमने उन्हें कहा कि औरंगजेब पर फिल्म बना रहे हैं. फिल्म में औरंगजेब के राजपूत सिपहसालार की पत्नी के साथ नकारात्मक दृश्य हैं. इससे राजपूतों की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है. हम बिना विरोध इसकी शूटिंग करना चाहते हैं. यदि आप चाहे तो हम भंसाली से बात कर सकते हैं. इस पर सुखदेव ने हमें अपने विरोधी आंदोलनो की क्लिप दिखाना शुरू कर दिया. उसने हमें मुंबई में उम्मीद सिंह से मिलने की सलाह दी.

(ये बात बेकग्राउंड में वॉइसओवर आर्टिस्ट कह रहा है, न कि ये बात स्क्रीन पर आजतक का रिपोर्टर सुखदेव से कहता दिखाई देता है, यही वो पॉइंट है जहाँ सत्तर प्रतिशत दर्शक झांसे में आ जाता है. पूरी फुटेज में कहीं भी सुखदेव वीडियो क्लिप रिपोर्टर को दिखाते नज़र नहीं आते.)

स्टिंग में फर्जीवाड़ा इतनी बारीकी से किया गया है कि इसे कई बार देखने पर ही समझ आता है.

कहानी ऐसी है कि रिपोर्टर लोकेशन मैनेजर बनकर मिलता है और मदद मांगता है. सुखदेव कहते हैं मुंबई में उम्मेदसिंह से मदद मिल जाएगी. ये स्पष्ट नहीं होता कि रिपोर्टर ने सही में सुखदेव से क्या बात की थी.

वीडियो से ये साबित होता है कि रिपोर्टर ने सुखदेव से फिल्म की बात की थी और आखिर में वो कहता भी है यदि राजपूत विरोध में आए तो क्या करेंगे. तब सुखदेव कहते हैं ‘अपन दिखा देंगे, जो भी है’.

बातचीत में सुखदेव शासकीय अनुमति का जिक्र करते हुए कहते हैं कि लेनी पड़ेगी. लेनदेन की बात करने पर सुखदेव कहते हैं ‘इस बारे में आप उम्मेदसिंह जी से बात कर लेना’.

ये सारी बातचीत स्क्रीन पर है यानि वॉइसओवर आर्टिस्ट नहीं है. अब आप कह सकते हैं ‘लेनदेन’ की बात तो हुई है. कथा का सार उम्मेदसिंह के फुटेज में छुपा है.

(मुंबई में उम्मेदसिंह से बात के दौरान पीछे से वॉइसओवर आर्टिस्ट क्या कह रहा सुनिए, ये ध्यान रखियेगा कि ये बाते उम्मेद नहीं बल्कि वॉइस आर्टिस्ट बोल रहा है.)

‘हम मुंबई में उम्मेदसिंह के पास पहुंचे. रुपयों की डील के लिए उसने हमें बुलाया था. जैसे ही उसे पता चला कि हम भंसाली के यहां से आए हैं, उसकी जीभ लपलपाने लगी. उसने हमें धमकाते हुए कहा कि यदि भंसाली ने हमारे साथ डील नहीं की तो फिल्म के साथ-साथ वो भी अंजाम भुगतेगा.

जो उन्होंने ऑनस्क्रीन कहा – ‘शूटिंग तो अब नहीं हो रही, कैसे तोड़फोड़ होगी. यहाँ मुंबई में सेफ हैं लेकिन कोल्हापुर में जलाया था ना. वो बोल रहे आपको पचास आदमी चाहिए एक महीना के लिए’.

यही है वो सार मित्रों. लेनदेन की बात शूटिंग के लिए आदमी उपलब्ध करवाने के लिए की गई थी, जिसका सिरा उम्मेदसिंह की बात से आकर मिल रहा है.

आप समझ सकते हैं कि एक फर्जी स्टिंग की कहानी को किस धूर्तता से करणी सेना के खिलाफ प्रयोग किया गया. अब इस पोस्ट के जरिये आप लोग ‘आजतक’ चैनल से निम्नलिखित प्रश्न कर सकते हैं.

– पूरे स्टिंग में रिपोर्टर, सुखदेव और उम्मेदसिंह ने एक भी बार ‘डेढ़ करोड़’ की बात नहीं की. ये बात आप कहाँ से ले आए.

– जब उम्मेदसिंह और सुखदेव ने पैसे मांगे तो उसकी फुटेज आपके पास क्यों नहीं है.

-स्टिंग एक झूठ के आधार पर किया गया. इसके लिए आपको क़ानूनी नोटिस क्यों न भेजा जाए. और यदि आपके पास फुटेज है तो देश के सामने प्रस्तुत करें.

– आप स्टिंग में ‘औरंगजेब की कहानी’ की बात करते हैं लेकिन अपने स्टिंग को ‘ऑपरेशन पद्मावती’ के नाम से क्यों चलाते हैं.

– और सबसे अहम् सवाल. क्रांतिकारी पत्रकार ये बताएं कि आपके इस प्रचंड महाझूठ में आखिर ‘पद्मावती’ है कहाँ पर

आजतक वालों, फर्जीवाड़ा करना ही है तो कुछ ढंग से करो. यूं छत्तीसगढ़ के उस सस्ते एडिटर की तरह क्रांतिकारी को फंसाने का काम न करो. ये सोशल मीडिया है. तुम्हारी चमड़ी के भीतर घुसे फर्जीवाड़े को भी सूंघ सकता है.

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