इतिहासकारों का षडयंत्र : मिथ्या, खण्डन और सत्य

राजस्थान की रेतीली जमीन में चाहे अनाज की पैदावार भले ही कम होती रही हो, पर इस भूमि पर वीरों की पैदावार सदा ही बढ़ोतरी से हुई है.

अपने पराक्रम और शौर्य के बल पर इन वीर योद्धाओं ने राजस्थान के साथ-साथ पूरे भारतवर्ष का नाम समय-समय पर रौशन किया है. कर्नल जेम्स टॉड ने राजस्थान नाम पड़ने से पहले इस मरू भूमि को ‘राजपुताना’ कहकर पुकारा था. इस राजपूताने में अनेक राजपूत राजा-महाराजा पैदा हुए..

आजकल एक मैसेज सभी जगह फ्लो कर रहा है —

एक मुस्लिम का पोस्ट. शायद सही है या नहीं. मुझे इतिहास की इतनी जानकारी नहीं. मगर शर्म बहुत आई.

मो……. अली.

वीरता इतनी कि जान बचाने के लिए बेटियां ब्याह दी मुग़ल बादशाहों से. अंग्रेजो ने बेटियां लेने से मना कर दिया तो सवर्ण हिन्दू युध्द हार गए और देश 7वीं बार गुलाम बन गया.
“अकबर”
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इतना इतिहास काफी है वीरता की कहानियों का सच जानने के लिए… मुगल जिंदा थे तब तो कुछ उखाड़ नहीं पाये ओर आज उनकी बनाई इमारतों पे गुस्सा उतार रहे हो… हिन्दू वीर, हिन्दू शेर, जय राजपुताना आदि संज्ञाओं से इतिहास नहीं बदल जाता..

आइये इस वायरल मैसेज की पोस्टमार्टम करते है और देखते है कि सच क्या है और झूठ क्या —

अकबर की राजपूत राजकन्याओं से शादी

अकबरनामा (Akbarnama) में जोधा का कहीं कोई उल्लेख या प्रचलन नही है.. (There is no any name of Jodha found in the book “Akbarnama” written by Abul Fazal )

तुजुक-ए-जहांगिरी /Tuzuk-E-Jahangiri (जहांगीर की आत्मकथा /BIOGRAPHY of Jahangir) में भी जोधा का कहीं कोई उल्लेख नही है (There is no any name of “JODHA Bai” Found in Tujuk -E- Jahangiri ). जबकि की ऐतिहासिक दावे और झूठे सीरियल यह कहते हैं कि जोधा बाई अकबर की पत्नि व जहांगीर की माँ थी जब की हकीकत यह है कि “जोधा बाई” का पूरे इतिहास में कहीं कोई नाम नहीं है.

जोधा का असली नाम (मरियम- उल-जमानी) ( Mariam uz-Zamani ) था जो कि आमेर के राजा भारमल के विवाह के दहेज में आई परसीयन दासी की पुत्री थी उसका लालन पालन राजपुताना में हुआ था.

अरब में बहुत सी किताबों में लिखा है written in parsi ( “ونحن في شك حول أكبر أو جعل الزواج راجبوت الأميرة في هندوستان آرياس كذبة لمجلس”) हम यकीन नहीं करते इस निकाह पर हमें संदेह है.

ईरान के मल्लिक नेशनल संग्रहालय एन्ड लाइब्रेरी में रखी किताबों में इन्डियन मुग़लों का विवाह एक परसियन दासी से करवाए जाने की बात लिखी है.

अकबर-ए-महुरियत में यह साफ-साफ लिखा है कि (written in persian “ہم راجپوت شہزادی یا اکبر کے بارے میں شک میں ہیں” (we don’t have trust in this Rajput marriage because at the time of mariage there was not even a single tear in any one’s eye even then the Hindu’s God Bharai Rasam was also not Happened ) “हमें इस हिन्दू निकाह पर संदेह है क्योंकि निकाह के वक्त राजभवन में किसी की आखों में आँसू नहीं थे और ना ही हिन्दू गोद भरई की रस्म हुई थी.

सिक्ख धर्म के गुरू अर्जुन और गुरू गोविन्द सिंह ने इस विवाह के समय यह बात स्वीकारी थी कि (written in Punjabi font – “ਰਾਜਪੁਤਾਨਾ ਆਬ ਤਲਵਾਰੋ ਓਰ ਦਿਮਾਗ ਦੋਨੋ ਸੇ ਕਾਮ ਲੇਨੇ ਲਾਗਹ ਗਯਾ ਹੈ “ ) कि क्षत्रीय ने अब तलवारों और बुद्धि दोनों का इस्तेमाल करना सीख लिया है. मतलब राजपुताना अब तलवारों के साथ-साथ बुद्धि का भी काम लेने लगा है ..( At the time of this fake mariage the Guru of Sikh Religion ” Arjun Dev and Guru Govind Singh” also admited that now Kshatriya Rajputs have learned to use the swords with brain also !! )

17वीं सदी में जब परसी भारत भ्रमण के लिये आये तब उन्होंने अपनी रचना (Book) ” परसी तित्ता/PersiTitta ” में यह लिखा है कि “यह भारतीय राजा एक परसियन वैश्या को सही हरम में भेज रहा है , अत: हमारे देव (अहुरा मझदा) इस राजा को स्वर्ग दें ” ( In 17 th centuary when the Persian came to India So they wrote in there book (Persi Titta) that ” This Indian King is sending a Persian prostitude to her right And deservable place and May our God (Ahura Mazda) give Heaven to this Indian King.

निष्कर्ष

इतिहास में अकबर की सिर्फ 3 पत्नियों का उल्लेख मिलता है जो — रुक़इय्याबेगम बेगम साहिबा, सलीमा सुल्तान बेगम साहिबा और मारियाम उज़-ज़मानि बेगम साहिबा है. कहीं भी कोई राजपूत या क्षत्रिय राजकन्या से विवाह का कोई उल्लेख नहीं मिलता है इसलिए राजपूतों ने डर से अपनी लड़कियां अकबर से ब्याह दी सरासर झूठ है.

शाहजहाँ की शादी

शाहजहाँ की कुल 7 शादियों का उल्लेख मिलता है जिनमें से किसी का भी हिन्दू या राजपूत होने का कोई प्रमाण नहीं मिलता है. ताजमहल को प्रेम की निशानी मानने वाले जिसको मुमताज की याद में बनाया बताया जाता है वो जान लें कि उसका नाम मुमताज महल था ही नहीं अपितु उसका वास्तविक नाम “मुमताज – उल – ज़मानी” था.
और तो और जिस शाहजहाँ और मुमताज के प्यार की इतनी डींगे हांकी जाती है वो शाहजहाँ की ना तो पहली पत्नी थी और ना ही आखिरी.

मुमताज, शाहजहाँ की सात पत्नियों में चौथी थी.

इसका मतलब है कि शाहजहाँ ने मुमताज से पहले तीन शादियाँ कर रखी थी और मुमताज से शादी करने के बाद भी उसका मन नहीं भरा तथा उसके बाद भी उस ने तीन शादियाँ और की.

शाहजहाँ की सातों पत्नियों में सबसे सुन्दर मुमताज नहीं अपितु इशरत बानो थी, जोकि उसकी पहली पत्नी थी.

उससे भी बुरा तथ्य यह है कि शाहजहाँ से शादी करते समय मुमताज कोई कुंवारी लड़की नहीं थी अपितु वो शादीशुदा थी और उसका पति शाहजहाँ की सेना में सूबेदार था, जिसका नाम “शेर अफगान खान” था. शाहजहाँ ने “शेर अफगान खान” की हत्या करने के उपरान्त मुमताज से शादी की थी.

शाहजहाँ का अपनी ही सगी बेटी “जहाँआरा” के साथ भी यौन सम्बन्ध थे.

शाहजहाँ ने अपनी बेटी जहाँआरा की मदद से मुमताज के भाई शाइस्ता खान की पत्नी के साथ कई बार बलात्कार किया था.

शाहजहाँ के प्यार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके अपनी सगी बेटी, मुमताज के भाई की पत्नी के अलावा मुमताज की बहन फरजाना बेगम के साथ भी अवैध सम्बन्ध थे.

फरजाना से शाहजहाँ को एक बेटा भी था. साथ ही मुमताज की मौत के महज एक हफ्ते के अन्दर ही शाहजहाँ ने मुमताज की बहन फरजाना से शादी कर ली थी.

उसकी बीबियां —
कन्दाहरी बेग़म
अकबराबादी महल
मुमताज महल
हसीना बेगम
मुति बेगम
कुदसियाँ बेगम
फतेहपुरी महल
सरहिंदी बेगम

जहाँआरा जहाँ अपने ही बाप शाहजहाँ की रखैल थी, तो दूसरी बेटी रोशनारा जिन्दापीर औरंगजेब की रखैल थी, तीसरी बेटी मेहरुन्निसा शिवाजी के बेटे शम्भा जी के चक्कर में फंस गयी थी.

औरंगजेब की शादी

औरंगजेब एक समलिंगी था इसकी एक शादी का उल्लेख मिलता है दिलरास बानो बेगम से जिसे राबिया-उद-दौरानी के नाम से भी जाना जाता है . और इसने अपनी ही सगी बहन को रखैल बना लिया था ये भी आप शादी मान सकते है.

किसी भी राजपूत या क्षत्रिय राजकन्या को देने या शादी करने की बात सिर्फ कल्पना है झूठ है.

निष्कर्ष

जो पोस्ट मीडिया में फैलाई जा रही है वो सिर्फ झूठ है सच यही है कि मुस्लिम कन्याएं हिन्दू राजाओं को दी गयी या उनके साथ भाग गई उसके विषय में अलग विस्तृत लेख लिखूंगा.

विशेष

राजा मानसिंह द्वारा अपनी पोत्री (राजकुमार जगत सिंह की पुत्री) का जहाँगीर के साथ विवाह किया गया. जहाँगीर के साथ मानसिंह ने अपनी जिस कथित पोत्री का विवाह किया, उससे संबंधित कई चौंकाने वाली जानकारियां इतिहास में दर्ज है.

जिस पर ज्यादातर इतिहासकारों ने ध्यान ही नहीं दिया कि वह लड़की एक मुस्लिम महिला बेगम जैनब कयूम की कोख से जन्मी थी. जिसका विवाह राजपूत समाज में होना असंभव था.

आदि-काल से क्षत्रियों के राजनीतिक शत्रु उनके प्रभुत्व को चुनौती देते आये हैं. किन्तु क्षत्रिय अपने क्षात्र-धर्म के पालन से उन सभी षड्यंत्रों का मुकाबला सफलतापूर्वक करते रहे हैं. क्षत्रियों से सत्ता हथियाने के लिए भिन्न भिन्न प्रकार से आडम्बर और कुचक्रों को रचते रहे. कुरुक्षेत्र के महाभारत में जब अधिकांश ज्ञानवान क्षत्रियों ने एक साथ वीरगति प्राप्त कर ली, उसके बाद से ही क्षत्रिय इतिहास को केवल कलम के बल पर दूषित कर दिया गया. इतिहास में क्षत्रिय शत्रुओं को महिमामंडित करने का भरसक प्रयास किया गया ताकि क्षत्रिय गौरव को नष्ट किया जा सके.

जहाँ एक मुग़ल शरीर को हाथ ना लगा सके इसके लिए औरते जौहर कर लेती थी और उनके मान सम्मान की रक्षा के लिए पुरुष शाका करते थे वो खुद से अपनी बहन बेटी को मुग़लों से ब्याह देंगे इसकी कल्पना करना भी मानसिक विकलांगता है और सत्य को अब सबके सामने लाना ही होगा जो हमपर थोपा गया है.

लेख के कुछ अंश विकिपीडिया और नेट से लिये गए है जिनकी सत्यता की पुष्टि की जा चुकी है.

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