सुष्मिता जन्मोत्सव : Love You मेरी जान!

19 तारीख मेरे लिए कई मायने में महत्वूर्ण है. इस दिन कई सशक्त महिलाओं का जन्मदिन आता है. जैसे 19 नवम्बर को झांसी की रानी लक्ष्मी बाई का जन्मदिन है, 19 नवम्बर इंदिरा गांधी का जन्मदिन है, 19 नवम्बर मेरी सबसे प्रिय नायिका सुष्मिता सेन का जन्मदिन है.

और यह तारीख महत्वपूर्ण इसलिए हैं क्योंकि मेरा जन्म नवम्बर में न सही लेकिन 19 को ही आता है. तो मुझे ख़ुद पर गौरान्वित होने का बहाना मिल जाता है कि ज़रूर इस तारीख में कुछ तो ख़ास बात है.

आप इसे मेरा अभिमान समझें इसके पहले मैं कह दूं कि हर स्त्री के लिए उसका जन्मदिन ख़ास होना ही चाहिए. इसलिए नहीं कि उसके पहले इस तारीख को किसी महान विभूति ने जन्म लिया है.

सिर्फ इसलिए कि आपको एक नारी देह में जन्म प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है. समानता के अधिकार की झंडाबरदार औरतें कितना इस बात को अंगीकार कर पाती है ये तो उनके रहन सहन और विचारों की अभिव्यक्ति से सोशल मीडिया पर खूब पता चलता है.

लेकिन नारी स्वतंत्रता और सशक्तिकरण वास्तव में क्या होता है उसका साक्षात रूप मैंने यदि किसी में देखा है तो वो सिर्फ और सिर्फ सुष्मिता सेन है.

अपनी शर्तों पर जीवन जीने का माद्दा, अपने सपनों को पूरा करने का हौसला तो अमूमन सबमें होता ही है. लेकिन उन सपनों और हौसलों में अपने चारित्रिक गुणों का समावेश कर दुनिया के सामने हर बार सर उठाकर चलने का दुस्साहस मैंने सुष्मिता में देखा है.

वो भी तब जब उसकी जीवन शैली कहीं भी भारतीय परमपराओं में फिट न बैठती हो, लेकिन फिर भी उस जीवन शैली को उसी भारत भूमि पर सम्मान दिला भारतीय परम्पराओं में एक नया आयाम जोड़ती है.

19 वर्ष की उम्र में जब मैंने उसे पहली बार देखा था तो हम दोनों हम उम्र ही थीं. विश्व सुन्दरी प्रतियोगिताओं का दौर और ऐश्वर्या राय के साथ प्रतिद्वंदिता के दौरान मेरी भावनाएं हमेशा सुष के साथ जुड़ी रही.

पता नहीं हमारे यहाँ सुन्दरता का क्या पैमाना है लेकिन मुझे कभी भी ऐश्वर्या सुन्दर नहीं लगी… नैन नक्श से अधिक इंसान का आभामंडल उसे सुन्दर बनाता है.

आज की तारीख में भी मैं अपनी उसी बात पर अडिग हूँ, कि ऐश ने अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए जो भी हथकंडे अपनाए… उसका आभामंडल धीरे धीरे और विकृत होता गया. उसका प्रेम कभी भी अभिषेक बच्चन नहीं रहा बल्कि बच्चन सरनेम को पाना ही उसका उद्देश्य था.

खैर सबका अपना अपना तरीका होता है जीवन जीने का लेकिन आगे पीछे उसके परिणाम भी खुद ही भुगतना होते हैं. वहीं दूसरी ओर सुष के जीवन में कई मर्द आए होंगे. जिसको उसने कभी बताया नहीं तो छुपाया भी नहीं.

कुछ लोगों का जीवन चाहे कितना ही सार्वजनिक हो जाए, वो अपने व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पहलू को इतना व्यक्तिगत रखते हैं कि आप चाहकर भी उस सीमा को लांघ नहीं सकते.

रेखा के लिए भी मैंने हमेशा यही कहा है और सुष पर भी वही बात लागू होती है. रेखा से कब प्रेम हो गया ये तो मुझे याद नहीं. लेकिन जब सुष से प्रेम हुआ तब मैं सिर्फ 19 वर्ष की थी.

उसके व्यक्तित्व से मैं इतनी प्रभावित थी कि उन दिनों मैं उसकी हेयर स्टाइल से लेकर बातचीत का तरीका और चेहरे के हाव भाव कॉपी किया करती थी. उसके हर बात पर “मेरी जान” और “लव यू” कहना भी मैंने उसी से सीखा है ये कहने में भी मुझे कोई झिझक नहीं.

किसी व्यक्ति का कोई गुण आपको इतना प्रभावित कर जाए कि आपके अन्दर वो स्वत: ही समाने लगे तो आपके व्यक्तित्व में निखार ही आता है, ये मेरा व्यक्तिगत अनुभव है.

और मैं तो इतनी प्रभावित थी कि मैंने सोच लिया था मेरी जीवन शैली भी सुष की तरह ही होगी. मैं भी उसकी तरह बेटी गोद लेकर अपना जीवन अपनी मर्जी से जीयूँगी.

लेकिन अपना सोचा हर बार पूरा कहाँ होता है. नियति ने मेरे लिए कुछ और ही सोच रखा था. और वो मेरी सोच से अधिक सुन्दर निकला.

रेखा, तब्बू और सुष्मिता का मेरे व्यक्तित्व को संवारने में बहुत बड़ा योगदान है… लगता है कभी इन तीनों से मिलूंगी तो सबसे पहले यही कहूंगी… Love You मेरी जान….

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