हिन्दुओं को ‘चार्ली एब्दो’ के हमलावरों के समकक्ष खड़ा करने की नाकाम कोशिश

फरवरी 2006 में फ्रांस की एक मैगजीन चार्ली एब्दो ने एक विवादित कार्टून छापा था जिसके प्रतिशोध के लिये 7 जनवरी 2015 को दो हमलावरों ने उस पत्रिका के दफ्तर पर हमला कर 12 लोगों की हत्या कर दी थीं…

पूरी दुनिया ने उस हमले के साथ उन हमलावरों द्वारा लगाये गये नारों और उनकी मानसिकता के साथ उनकी बर्बरता की लाईव तस्वीरें देखी थी.

पिछली यूपीए सरकार जो पूरे देश में हो रहे अनेक आतंकी हमलों और 26/11के हमले के बाद भी किसी समुदाय को आतंकी बताने से बचती रहीं उसने खुलेआम हिंदू और भगवा आंतकवाद शब्द का उपयोग किया था…

और इसी ऐजेंडे को आगे बढ़ाते हुए उसने स्वामी असीमानंद, प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित को बरसों तक बिना किसी अपराध के जेल में डाल दिया.

जब इस सबसे भी मन नहीं भरा तो यूपीए सरकार ने हिंदूओं को प्रताड़ित करने और उन्हें पूरी तरह अल्पसंख्यकों के रहमोकरम पर जीने के लिये साम्प्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निवारण विधेयक तैयार किया.

जिसमें हर तरह की साम्प्रदायिक हिंसा के लिये केवल हिन्दुओं को ही दोषी ठहराया गया था… इस विधेयक के प्रावधान कितने आपत्तिजनक थे इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हो कि यदि हिंसा के दौरान किसी हिंदू महिला का बलात्कार अल्पसंख्यक समुदाय के लोग कर दे तो उस अल्पसंख्यक समुदाय के अपराधी को दोषी नहीं माना जायेगा न उस हिंदू महिला को पीड़ित मानकर उसे किसी प्रकार की कानूनी और वैधानिक सहायता दी जायेगी.

2014 में सरकार बदल गयी पर षड़यंत्रकारियों के मंसूबे और दिमाग अभी भी सक्रिय है… हिंदू विरोधियों और उनके सीमा पार बैठे आका ये चाहते हैं कि येनकेन प्रकारेण हिंदू आतंकवाद का ठप्पा किसी भी तरह भारत के बहुसंख्यक समुदाय पर लग जाये…

इसके लिये हिन्दुओं को उकसाकर हर संभव कोशिश की जा रही हैं कि जिस तरह फ्रांस के चार्ली एब्दो पर आतंकियो ने हमला किया था वैसा ही हमला कोई हिंदू कार्यकर्ता भी किसी पत्रिका, न्यूज चैनल, फिल्म निर्माता-निर्देशक, या अभिनेता-अभिनेत्री पर कर दे, ताकि हिंदू आंतकवाद की जो काल्पनिक थ्योरी इन्होंने तैयार की है उसे अमली जामा पहना कर भारत के बहुसंख्यक हिन्दुओं को पूरी दुनिया में बदनाम किया जा सके…

इसके लिये हर तरह के प्रयास पिछले कई सालों से किये जा रहें हैं. इसके लिये कभी समलैंगिक महिलाओं को लेकर “फायर” जैसी फिल्म बनाई जाती हैं जिसमें महिला पात्रों के नाम जानबूझकर “राधा और सीता” (बाद में विरोध होने पर गीता) रखा जाता है…

मणिरत्नम “रावण” बनाता है जिसमें राम को खलनायक बताने की कोशिश की जाती है… गोवारीकर “जोधा अकबर” बनाता है तो एक यौन कुंठित चित्रकार एमएफ हुसैन “सरस्वती” और पौराणिक “देवी देवताओं” के अश्लील चित्र बनाता है… हालिया विवाद “पद्मावती” उसी कड़ी का अगला भाग है.

पर हिंदू अपने पारम्परिक संस्कारों और सहिष्णुता के कारण कभी इनके षड़यंत्र में नहीं फंसता… न तो किसी की “हत्या” करता है न “बमविस्फोट”… अधिक से अधिक धरना-प्रदर्शन, रैली, ज्ञापन या पुतला फूंक देता है…

बहुत अधिक उत्साही नवयुवक थोड़ी बहुत “मौखिक धमकी” या किसी सिनेमा हाल में “तोड़फोड़” कर देते है या दो चार “चांटे” भंसाली को जड़ देते हैं… पर न तो किसी की हत्या करते है न बमविस्फोट…

पर भारत का भांड और लिबरल वामपंथी सेकुलर मीडिया इन्हीं थोड़ी बहुत घटनाओं को दिनभर टीवी व अन्य माध्यमों में दिखाकर हिन्दुओं को “चार्ली एब्दो” के हमलावरों के समकक्ष खड़ा करने की कोशिश करता रहता है… ताकि अंतर्राष्ट्रीय षड़यंत्रकारियों का ऐजेंडा पूरा किया जा सके… और “पाकिस्तान और दुबई” में बैठे अपने आकाओं को खुश किया जा सके.

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