संघ की पोल खोल भाग-10 : डरपोक दब्बू संघ

आंखे मत मलिये, सही पढ़ रहे हैं आप, संघ डरपोक और दब्बू ही है.

और नहीं तो क्या?

[संघ की पोल खोल भाग-1 : First Hand Experience]

अरे जहां देखो वहां हर दूसरे दिन एक RSS का स्वयंसेवक मारा जा रहा है, और संघ कीर्तन और भजन करने में व्यस्त है.

इनसे बड़े-बड़े उपदेश दिलवा लीजिये, कर कुछ नही सकते.

अरे अपने कार्यकर्ताओं को बचा नहीं पा रहे, बातें करते हैं बड़ी बड़ी.

[संघ की पोल खोल भाग-2 : संघ में जातिवाद]

इतना बड़ा संघ किस लिए है? निकालो तलवारें और काट डालो विरोधियों को, एक एक को घर में घुस कर मारो.

सही कह रहा हूँ ना मित्रों?

हाँ भाई, आप सब बिल्कुल सही कह रहे हैं, संघ ना हुआ गुंडे मवालियों का अड्डा हो गया, सही है, गली के गुंडे की तरह पेश आना चाहिए स्वयंसेवको को, है ना?

[संघ की पोल खोल भाग-3 : कम्युनल संघ]

वो एक मारें हमें उनके 10 मारने चाहिये. सही हैं संघ और ISIS में कोई फर्क थोड़े ही है?

वो भी तो यही करते हैं, अरे कानून अपने हाथ में लेना पड़े तो लो लेकिन बदला लो, है ना?

बस यहीं आपकी और संघ की विचारधारा में फर्क आ जाता है.

[संघ की पोल खोल भाग-4 : संघ प्रचारकों का पर्दाफाश]

एक स्वयंसेवक आप सब से बिल्कुल हट कर सोचता है, ऐसा इसलिए क्योंकि उसे ऐसी ट्रेनिंग मिली होती है.

जितना मैंने देखा है उतना आप सब को पहले की कड़ियों में (भाग 1-9) में बता चुका हूँ.

अगर आपको याद हो तो उन्ही में से एक भाग में लिखा था कि “संघ मारने काटने की ना तो बात करता है और ना ऐसा सिखाता है, यदि आप ये सब सुनने सीखने जा रहे हैं तो आप निराश होंगे”.

[संघ की पोल खोल भाग-5 : स्वाधीनता संग्राम और संघ का योगदान]

तो आखिर संघ है क्या?

जितने मैंने जाना और जितना मैं समझ सका उसके अनुसार संघ जीवनशैली सिखाता है, संघ आपको स्वस्थ रहना सिखाता है (शाखाओं में व्यायाम, योग और शारीरिक द्वारा). संघ आपको स्वच्छ रहना सिखाता है शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से स्वच्छ.

[संघ की पोल खोल भाग-6 : आज़ादी का आंदोलन और गद्दार संघ]

संघ में लाठी, जिसे कहा ही दंड जाता है, का इस्तेमाल केवल अतिआवश्यक होने पर दुर्जनों को दंड देने हेतु इस्तेमाल करना सिखाया जाता है.

यानी लाठी का मतलब ये नहीं कि किसी का भी सर फोड़ दो, लाठी का उपयोग दूसरों की रक्षा के लिए करना है ना कि गुंडागर्दी करने के लिए.

[संघ की पोल खोल भाग-7 : स्वाधीनता संग्राम और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]

यदि किसी स्वयंसेवक ने अनुशासन का पालन नहीं किया या अपनी skills जो कि उसे संघ ने सिखाई हैं जैसे आत्मरक्षा, लाठी चलाना, तलवार चलाना, आदि का गलत उपयोग किया तो उसकी तत्काल विदाई कर दी जाती है.

बेहद कड़ा अनुशासन है, फिर लाठी चलाना और तलवार चलाना सिखाने का क्या फायदा? फायदा है, इसका उपयोग जनमानस की भलाई के लिए करना होता है खुद के व्यक्तिगत फायदे के लिए नहीं, इन विद्याओं का उपयोग राष्ट्रहित में करना होता है.

[संघ की पोल खोल भाग-8 : राष्ट्रीय ध्वज से नफरत करने वाले और तिरंगा न फहराने वाले संघी]

अब आते है मुद्दे की बात पर, स्वयंसेवक को देशसेवा के लिए एक सिपाही के तौर पर तैयार किया जाता है ना कि गुंडे की तरह.

इसी कारण स्वयंसेवक आपको हर आपदा के समय दिखाई दे जाएंगे, चाहे बाढ़ आई हो, भूकंप आया हो या ट्रैन दुर्घटना हुई हो, हर जगह आपको स्वयंसेवक दिखाई दे जाएंगे.

अगर कहीं नहीं दिखाई देंगे तो लड़ाई झगड़ों की जगह. स्वयंसेवक डरपोक होते हैं क्या इसीलिए अपनी जान जोखिम में डाल कर दूसरों की मदद करते हैं? उनकी जान बचाते हैं किसी भी आपदा के समय? ज़रा दोबारा सोचिये? क्या अब भी आप सोचते हैं कि स्वयंसेवक डरपोक होते हैं?

[संघ की पोल खोल भाग-9 : प्रचारकों का पर्दाफाश, प्रचारकों की ऐश, बड़ी गाड़ियां, लक्ज़री लाइफस्टाइल]

मैंने कई प्रचारक देखे हैं जो पिछले कई सालों से कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट में डटे हुए हैं, उस कश्मीर में जहां हम और आप जाने से भी डरते हैं, वहां रह कर काम कर रहे हैं. उनकी जान हथेली पर रहती है फिर भी कोई पीठ दिखा कर नही भागा आज तक. ये होता है एक स्वयंसेवक, एक प्रचारक. क्या आपको अब भी लगता है कि संघ डरपोक है?

तो फिर संघ बदला क्यों नहीं लेता? क्योंकि संघ की सबसे पहली शिक्षा होती है “राष्ट्र सर्वप्रथम”. जिसकी सुबह ही “वत्सले मातृभूमि” प्रार्थना से होती है, और जो राष्ट्र को सबसे ऊपर मानते हों, वो भला अपने ही राष्ट्र का कानून कैसे तोड़ सकते हैं?

संघ का कोई भी स्वयंसेवक कभी कानून नहीं तोड़ता, कभी किसी की सिफारिश नहीं करता, संघ से आपको कुछ नहीं मिलेगा बल्कि अपना पैसा, अपना समय भी आपको देना पड़ेगा.

जो लोग अपनी जान दे कर भी राष्ट्रसेवा कर रहे हैं वे भला कानून कैसे तोड़ सकते हैं? संघ कानून के दायरे में रह कर कड़ी कार्यवाही करता है, जिसे संभवतः सोशल मीडिया पर नही लिखा जा सकता.

अब मान लेते हैं कि संघ को बदला लेना चाहिए था तो फिर क्या फर्क रह जाता संघ में और ISIS जैसे आतंकवादी संगठन में?

दूसरा, ऐसे किसी भी मामले में उलझा कर संघ को बैन कर दिया जाता और हिन्दुओं को आतंकवादी करार दे दिया जाता, तब क्या करते? क्या तब आज का संघ होता?

संघ low profile में रह कर लगातार 1925 से काम कर रहा है और इसी की बदौलत आज यहां तक पहुँचा है कि विश्व का सबसे बड़ा संगठन है, अगर बदला लेने निकलते तो कब का बैन हो जाते.

संघ बदला लेने में नहीं बदलाव लाने में विश्वास रखता है, चाहें वो आज की केंद्र सरकार हो या कुछ और, बदलाव सबके सामने है. आज हम जो हिंदुत्व की बात कर रहे हैं यह जनजागृति भी संघ ही लाया है.

पहले लोगों ने संघ को नज़रंदाज़ किया, फिर चड्ढी वाले कह कर चिढ़ाया, फिर लड़ने झगड़ने पर उतारू हो गए, फिर आतंकवादी कह कर बदनाम करने की कोशिश की.

जब कुछ भी काम ना आया तो निहत्थे और अकेले स्वयंसेवकों और प्रचारकों की हत्या की जा रही है. ये हताशा है जो साफ दिखाई दे रही है.

ऐसी ही हताशा के चलते विरोधियों ने हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी गढ़ी थी, जवाब में जनता ने हिन्दू राष्ट्रवादी को देश का प्रधानमंत्री बना दिया. इस बार का जवाब और भी ज़्यादा ताकत से दिया जाएगा.

और हाँ, एक बार फिर कह रहा हूँ हर मौत का हिसाब लिया जा रहा है, लेकिन हिसाब से समस्या हल नहीं होगी, समस्या को हल करना है और वो ऐसी देशविरोधी ताकतों को उखाड़ फेंकने से ही संभव है, और इसी दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं.

वैसे इस तरह की बात करने वाले सिर्फ वही लोग हैं जो संघ को जानते नहीं, क्योंकि संघ में मोहल्ला इकाई, बस्ती इकाई, नगर इकाई, जिला इकाई आदि में काम बंटा हुआ है और सभी को अपने अपने क्षेत्र में काम करना होता है.

ऐसे में उत्तर भारत के व्यक्ति का केरल के बारे में सवाल स्पष्ट करता ही कि वह व्यक्ति संघ से जुड़ा नहीं है. इन बातों का खयाल रखने के लिए पदाधिकारी नियुक्त हैं, निश्चिन्त रहिये वे अपना काम बखूबी कर रहे हैं.

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