पहले क्या कर रहे थे ये ही अधिकारी!

16 नवम्बर 2015 को टर्की की यात्रा के दौरान पत्रकारों ने राष्ट्रपति ओबामा से पूछा कि पेरिस में हाल में ही हुए आतंकवादी हमलो के बाद क्या उनको अपनी आतंकवाद से मुकाबला करने की नीति में बदलाव नहीं लाना चाहिए?

पत्रकार उनसे एक ही प्रश्न को अलग-अलग तरीके से पूछकर यह जोर दे रहे थे कि अमेरिका को अपने सैनिक सीरिया और इराक में भेज देने चाहिए.

राष्ट्रपति ओबामा ने जवाब दिया कि “आतंकवाद से निपटने के लिए उन्हें लोग जो सुझाव देते है, वे उन सुझावों को पहले से ही लागू कर रहे है.

एक अलग सुझाव जो टर्की में दिया गया, वह यह था कि आतंकवाद पर काबू पाने के लिए वह सीरिया और इराक में अमरीकी सैनिकों को बड़ी संख्या में भेज दे.

यह बात सब मानते है कि हम (अमेरिका) दुनिया में बेहतरीन सैन्य शक्ति है, बेहतरीन सैन्य दिमाग है.

मैं कई वर्षो से उन फौजियों के साथ विभिन्न विकल्पों पर चर्चा करने के लिए मीटिंग कर रहा हूँ.

यह सिर्फ मेरी राय नहीं है, मेरे करीबी सैन्य और सिविलियन सलाहकारों की राय है कि ऐसा करना (अमरीकी सैनिकों को बड़ी संख्या में भेजना) एक गलती होगी.

हमारी सेना मोसुल या रक़्क़ा या रमादी में घुस जाएगी, उन आतंकवादियों (दाएश या आईसिल) को उखाड़ फेंकेगी.

लेकिन क्योंकि हम यह पहले भी देख चुके है कि जब तक इन देशों की स्थानीय जनता लोकतान्त्रिक शासन – और सत्ता में भागेदारी – के लिए तैयार नहीं है, अगर वह वैचारिक आतंकवाद से लड़ने को तैयार नहीं हैं, तो अमेरिका को उस क्षेत्र के स्थायी कब्जे के लिए तैयार रहना होगा.

और चलिए हम सीरिया में 50,000 सैनिकों को भेजने के लिए तैयार हो जाते हैं. लेकिन जब एक अन्य आतंकवादी हमला यमन में होता है तो क्या हमें सैनिक वहां भी भेजने चाहिए? या फिर लीबिया, शायद? या दक्षिण पूर्व एशिया या उत्तरी अफ्रीका में भी आतंकवादी नेटवर्क से निपटने के लिए भी सैनिक भेजने होंगे?

इसलिए हमारी रणनीति वह होनी चाहिए जिसपर भरोसा किया जा सके, जो सतत परिणाम दे सके. इसीलिए हम जमीन पर व्यवस्थित ढंग से दाएश या आईसिल के नेतृत्व, उनके बुनियादी ढांचे को नष्ट कर रहे है, शिया समुदाय को मजबूत बना रहे है, सीरिया, कुर्दिश और इराकी सुरक्षा बलों को मजबूत बना रहे है जिससे वे उन आतंकवादियों से लड़ सकें और हरा सकें.

और हम उस रणनीति के लिए अधिक पार्टनर जुटा रहे है. हमारे कुछ प्रयास सफल नहीं होते, जबकि कुछ अन्य रणनीति सफल हो जाती है और जब हमें सफल रणनीति मिल जाती है तो हम दोगुने उत्साह से उस रणनीति को लागू करते है.”

पब्लिक पॉलिसी या जन नीति के क्षेत्र में ऐसा उत्कृष्ट पाठ आप को और कहीं नहीं मिल सकता.

GST में किये गए संशोधनों को हम इस पाठ के सन्दर्भ में समझ सकते है. कई लोग इस भ्रम में रहते है कि उनके पास कर प्रणाली के बेहतर विचार है. और मैं शिष्टाचारवश कुछ कड़ुवा नहीं लिख पाता.

पता नहीं वह यह क्यों भूल जाते है कि वित्त मंत्रालय, इनकम टैक्स, कस्टम्स और एक्साइज़ टैक्स, ऑडिट एवं एकाउंट्स सेवा और प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से भरा हुआ है.

सारे के सारे प्रशासनिक अधिकारी किसी समय जिले में कलेक्टर थे यानि कि राजस्व एकत्र करने वाले.

इनमें से कई इनकम टैक्स या एक्साइज़ टैक्स ट्रिब्यूनल या कोर्ट में भी काम कर चुके हैं और इन्हे पता होता है कैसे बड़े बिजनेसमैन और उद्योगपति कर चोरी के आरोपों से छूट जाते है.

स्वाभाविक रूप से आपके मन में यह प्रश्न आ सकता है कि फिर ये अधिकारी पहले क्या कर रहे थे?

सीधा सा उत्तर है. अगर आपका पूर्व मंत्री चोर था और अपने कुपुत्र को लाभ पहुंचा रहा था, तो क्या आप को लगता है उस मंत्री के नीचे काम करने वाले लोग ईमानदारी से कार्य करेंगे?

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