अनसुलझी पहेली और मात्र 600 साल

जिस दिन दुनिया के पहले भाप के इंजन के लिए पहला पेड़ काटा गया था, उसी दिन पृथ्वी पर एक नए युग की शुरुआत हो गई थी. इसे वैज्ञानिकों ने ‘एन्थ्रोपोसिन युग’ का नाम दिया.

यानि जबसे मनुष्य इस लायक हो गया कि वो अपने क्रिया-कलापों से प्रकृति को नुकसान पहुंचा सके, उस दिन से ये अनचाहा युग शुरू हो गया.

लंबी वैचारिक बहसों के बाद ‘एन्थ्रोपोसिन’ को वैज्ञानिक मान्यता देकर ये बताया गया कि मानव ने पृथ्वी पर प्रलय को आमंत्रण दे दिया है.

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग नई घोषणा करते हुए बताते हैं कि प्रलय आने में बस 600 साल ही बाकी है.

उनकी थ्योरी दो बातों पर टिकी हुई है. एक मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस. हम देख ही चुके हैं कि एक रोबोट को सऊदी अरब ने नागरिकता दे दी है.

स्टीफन हॉकिंग वो व्यक्ति हैं कि जब वे बोलते हैं तो दुनिया की धड़कने तेज़ हो जाती है. उनकी लिखी ‘अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम’, ‘ग्रेंड डिजाइन’ और ‘द यूनिवर्स इन अ नटशैल’ मानव इतिहास के लिए अनमोल पूंजी बन चुकी है.

वे लगातार मानव जाति पर भविष्य में आने वाले संकट के बारे में चेतावनी देते रहते हैं. और ये बात कोई सिरफिरा नहीं कह रहा बल्कि एक महान भौतिक विज्ञानी और एक कॉस्मोलॉजिस्ट कह रहा है.

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि ‘सन 2600 तक पृथ्वी एक जलता हुआ आग का गोला बन जाएगी. जनसँख्या का अत्यधिक बोझ और बिजली की बढ़ती मांग के कारण आने वाले वर्षों में स्थितियां नियंत्रण से बाहर होंगी.

ऊर्जा का अधिक इस्तेमाल साल दर साल गर्मी में इजाफा करेगा. इससे बचने का हॉकिंग ने एक ही उपाय बताया है. उनका कहना है 600 साल के भीतर ही हमें नया सौर मंडल खोजना होगा, पृथ्वी जैसा मित्र ग्रह खोजना होगा, जिसका अपना एक सूर्य हो.

पहले के लेखों में अक्सर ये कहता रहा हूँ कि होमो सीपियन को इस अनंत ब्रह्माण्ड में एक पहेली सुलझाने के लिए छोड़ दिया गया है.

प्रसिद्ध रहस्यशास्त्री पीडी ओस्पेंस्की की चर्चित किताब ‘इन सर्च ऑफ़ मिराक्यूलस’ में एक नक्शा बनाकर बताया गया है कि पृथ्वी ब्रम्हांड की पूंछ में स्थित है. हम जानते ही नहीं कि इस अनंत विश्व की सुंदरता क्या है.

पुराने रहस्यदर्शियों ने भी इस बारे में अपुष्ट ढंग से काफी कुछ कहा है. द ग्रेट गुरजिएफ ने तो कहा था ‘हम बहुत देर से जागे हैं’.

हालांकि आगामी प्रलय को लेकर पूर्व उतना फिक्रमंद नहीं है. ओशो ने अपने अंतिम क्षणों में कहा था ‘पृथ्वी अभी युवा है, इसे अभी लाखों वर्ष तक जीवन को चलाना है’.

हालांकि ये बात सही है कि सन 2600 तक स्थितियां काबू से बाहर हो जाएंगी यदि अभी और तुरंत कुछ नहीं किया गया तो. ये समस्या पश्चिमी देशों की उपजाई हुई है, जिसकी चपेट में हम भी आ गए हैं.

प्राचीन ग्रंथों से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक पृथ्वी पर पांच बार महा जलप्रलय हुई है. इनमें मनु वाली प्रलय भी शामिल है, जो सबसे भयंकर जल प्रलय मानी जाती है.

इस प्रलय से यूरोप, एशिया, अफ्रीका बुरी तरह प्रभावित हुए. कहते हैं यहाँ से देव-मानव सभ्यता का विनाश हुआ और एक नई सभ्यता विश्व पटल पर उभरी.

सबसे आखिरी जल प्रलय द्वापर युग के अंत में उत्तर-पश्चिम भारत में हुई थी. इसी समय सरस्वती नदी विलुप्त हुई.

अब तक पृथ्वी ने पांच हिमयुगों का सामना किया है. इनके अलावा कुछ लघु हिमयुग भी हुए लेकिन उनका उल्लेख उतना नहीं हुआ.

स्वयं प्राचीन केदारनाथ हिमयुग का साक्षात प्रमाण है. एक हिमयुग ने सम्पूर्ण केदार को ढँक लिया था. केदार की दीवारों पर आज भी बर्फ की रगड़ के निशान मौजूद हैं.

होमो सीपियन स्वयं एक पहेली है. हम यहीं जन्मे या अंतरिक्षीय धूल पर सवार होकर पृथ्वी पर चले आए. या हम किसी अनजानी सभ्यता के वंशज हैं, जो हमें ब्रम्हांड के इस अंधकार में छोड़ गई थी.

हॉकिंग की ताज़ा भविष्यवाणी और होमो सीपियन की पहेली दरअसल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. जिस दिन हमें अपने स्त्रोत का पता चलेगा, उस दिन हॉकिंग की परेशानी का हल भी मिल जाएगा.

कहीं ऐसा न हो कि इस पहेली का हल उन वेदों की सूक्तियों में छुपा हो, जो आर्कटिक प्रदेश में ‘देव पुरुषों’ द्वारा सुनाई गई थी.

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