महारानी पद्मिनी की जगह ‘पद्मावती’ को स्थापित करना, भविष्य की साज़िश!

padmavati sanjay leela bhansali sushobbhit making india

आज कुछ समय पहले मैंने एक सवाल पूछा था – जौहर करने वाली चित्तौड़ की महारानी का नाम क्या था जरा बताइये तो?

जो जवाब आए उनमें सब ने बताया था कि महारानी का नाम पद्मिनी था. सही जवाब है लेकिन उसे गलत ठहराने की कोशिश कैसे हो रही है यह देखिये.

[भंसाली… दम है तो ‘कफूर-खिलजी : एक अमर प्रेम’ फिल्म बनाओ]

संजय लीला भंसाली का यह विडियो यू ट्यूब पर डला हुआ है. किसी Best Nationalist Videos ने, जिसने अपने डिस्प्ले पिक में मोदी जी की तस्वीर लगा रखी है.

उसके नीचे यह कमेंट लिखी है. उनके इंग्लिश टायपिंग में जो गलतियाँ हैं वे वैसे ही रखी गई हैं. यह पूरा पढ़िये फिर टिप्पणी देखिये.

I Personally Believe that Matter Should END Here When Director of the Movie Has Categorically said that No Distortion of History and NO LOVE SCENE Bw Barbaric Invader Allauddin KHiLji and Maa Padmavati is in the Movie.

The Movie is About HINDU Rajpoot Men & Women’s Immense Bravery and Sacrifices Against these Cruel IsLamic InVaders…

and I thinK more these kind of movie are required to showcase the real HISTORY of HINDU-STHAN that How It Survived Despite All those Horriffic Invasions and AttacKs on Its People, Territory and Culture.

(कुछ ऐसे भी लंबे और बढ़िया भाषा में सफाई देते पोस्ट्स वायरल किए जा रहे हैं जहां यह रिक्वेस्ट की जा रही है कि हम शांत रहें और फिल्म को रिलीज होने दें, हो सकता है यह फिल्म ऐतिहासिक सच्चाई को दिखा रही हो तो हमें ऐसा मौका नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि इतनी भव्य फिल्में बार बार नहीं बनती। )

अब मजा देखिये, इस व्यक्ति ने पर्सनली फिल्म देखी नहीं है, फिर कैसे केवल भंसाली के ही हवाले से फिल्म को सर्टिफ़ाई कर रहा है ये?

बाकी इस Best Nationalist Videos की कोई पहचान नहीं है वहाँ, और ट्रेस करना मुझे नहीं आता… नहीं तो वह भी कर लेता. लिंक से कोई कर सकते हैं तो कर लीजिये, लिंक दे ही रहा हूँ. यह रही – https://youtu.be/iCP2KQoB-yU

इस वीडियो में आप देख लीजिये, भंसाली कहीं भी महारानी का उल्लेख ‘पद्मिनी’ नहीं कर रहे बल्कि ‘पद्मावती’ ही कह रहे हैं. जब कि ऐसा कोई व्यक्तित्व केवल जायसी की काल्पनिक रचना में ही है.

जैसे ही ‘पद्मावती’ को स्वीकृति मिलती है, छेड़छाड़ को भी स्वीकृति मिलती है. खिलजी और चित्तौड़ सत्य हैं, तो फिर पद्मावती का काल्पनिक व्यक्तित्व क्यों लाया जा रहा है?

प्रेम कहानी ना भी दिखाएँ, चित्तौड़ और खिलजी का एक साथ उल्लेख खिलजी की क्रूरता के बिना पूरा नहीं हो सकता और ना ही स्वीकृत हो सकता है. क्या मंदिरों में मानता उतारने, शीश नवाने चित्तौड़ गया था खिलजी, लश्कर लेकर?

अगर चित्तौड़ मुहिम को लेकर खिलजी की छवि एक दयालु सत्ताधीश की बताई जाती है तो यह भी इतिहास से खिलवाड़ तो है ही.

महारानी पद्मिनी का नाम न ले कर और खिलजी के साथ झूठी प्रेम कथा न दिखाकर राजपूतों की इज्जत से भले आज खिलवाड़ न हो रहा हो, और कुछ सालों बाद हो ही जाएगा. आज ये उसका अलग नाम से एडवांस लायसेंस निकाला जा रहा है.

और लोग महारानी पद्मिनी का नाम भूलकर महारानी पद्मावती ही कहने लगेंगे. आज नहीं, कुछ साल बाद ही सही. फिर पद्मावती कहाँ मिलेगी? जायसी की कहानी में.

उसी को इतिहास स्थापित किया जाएगा और वो, जो महारानी पद्मिनी की बात करें उसे ‘निराधार’ नफरत फैलाने वाला घोषित कर के दंडित किया जाएगा.

एक सही स्ट्रेटजी यह होगी कि जिन्होंने इसे पास किया है उन सेन्सर बोर्ड के सदस्यों को भी इस मामले में party बनाना चाहिए.

क्या वे इतिहास से या वर्तमान घटनाओं से परिचित नहीं हैं? किन तथ्यों पर उन्होंने इस फिल्म को पास किया है? उनको भी अपना स्टैंड सार्वजनिक करना चाहिए.

अगर उनको भी अदालत में लाया जाएगा तो काफी कुछ साध्य होगा आगे से ऐसे खिलवाड़ रोकने के लिए.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY