डिजिटल युग यानी चौथी औद्योगिक क्रांति : बदले नहीं तो मिट जाएंगे हम

इंडियन एक्सप्रेस में छपे नोटबंदी के लेख के बारे में मेरी पोस्ट पर कई कमैंट्स पढ़ने को मिले, जिसके लिए मित्रों का तहेदिल से आभार.

दो प्रश्न पूछे गए, जिसका उत्तर देने का प्रयास करूँगा.

एक मित्र लिखते है, ‘इस साल इंजीनियरिंग किए छात्र 20 हजार की नौकरी के लिए भटक रहे हैं गुड़गांव जैसी जगह. 40 प्रतिशत का कट लेकर भी टेलीकॉम के कर्मचारियों को नौकरी नहीं मिल रही.

हमें तो बड़ी शर्मिंदगी होती है जब हम तमाम कोशिशों के बावजूद भी किसी को लगा नहीं पा रहे. रियल एस्टेट में काम करने वाले 15 साल के अनुभव वाले जैसे तैसे दिन काट रहे हैं.

एक अन्य मित्र ने जानना चाहा कि E commerce की वजह से जो दुकानदार बेरोज़गार हो रहे हैं उनको किस एकाउंट में रखा जाए?

वे आगे लिखते है कि भविष्य में भारत मे रोज़गार बढ़ेगा या रोज़गार देने वालों को नौकरियां करनी पड़ेगी.

दोनों ही प्रश्न एक तरह से जुड़े हुए है और आने वाले समय की तरफ इशारा कर रहे है.

पहला प्रश्न पूछने वाले मित्र से मेरा प्रश्न है कि क्या इंजीनियरिंग किए छात्र 20 हजार की नौकरी लिए इसी वर्ष भटक रहे है?

क्या सारे इंजीनियरिंग छात्रों को पिछले वर्ष या फिर सोनिया सरकार के समय नौकरी मिल गयी थी?

आपके कार्यालय में पिछले दस वर्षो में कितने इंजीनियर की भर्ती हुई? क्या स्किल देखते है आप भर्ती के समय?

टेलीकॉम के कर्मचारियों को नौकरी क्यों नहीं मिल रही है जबकि भारत में सेल फ़ोन का विस्तार नोटेबंदी के बाद भी हो रहा है?

क्या आपको अपने ही प्रश्नो में आने वाले समय की आहट नहीं सुनाई दे रही है? कल ऑटोमोबाइल इंजीनियर को नौकरी नहीं मिलेगी चाहे आप सोनिया पुत्र को प्रधानमंत्री बनवा दे?

आज पहली बार लिख रहा हूँ. मेरी पत्नी विश्व के सबसे प्रतिष्ठित कैंसर अस्पताल – मेमोरियल स्लोआन केटरिंग कैंसर सेंटर – में डॉक्टर है और पैथोलॉजी में है.

उसकी तथा अन्य जगह होने वाली रिसर्च से अधिकतर पैथोलॉजी वाले डॉक्टर अगले दस वर्ष में बेरोजगार हो जायेंगे.

इस वर्ष जनवरी में उसके अस्पताल ने नयी टेक्नोलॉजी का प्रयोग रोग-निदान में शुरू कर दिया जिससे बायोप्सी में कमी आ गयी.

क्या उसके लिए आप उस समय की सरकार को दोष देंगे?

रियल एस्टेट में काम करने वाले 15 साल के अनुभव वाले जैसे तैसे दिन क्यों काट रहे हैं? क्या कभी उन्होंने सारा कार्य उजले धन से करने का प्रयास किया?

क्या उन्होंने कभी ग्राहकों या मकान खरीदने वालो की तरफ अपने कर्तव्यों का पालन किया या वे भी बिल्डर्स की वेदी पर ग्राहकों के हित को तिलांजलि दे देते थे?

आप स्वयं बताइये कि कैसे रियल एस्टेट से काले धन का सफाया किया जाए, खरीददारों को मकान वादे के अनुसार समय पर और उम्दा हालात में मिले?

दूसरे प्रश्नकर्ता मित्र से मैंने 2 अक्टूबर को पूछा था कि क्या सरकार नवयुवक और नवयुवतियों को छोटे और पारम्परिक व्यवसायियों के लिए ऑनलाइन उद्यम लगाने से मना कर सकती है?

क्या सरकार – या कोई भी राजनैतिक दल या हम स्वयं भी – डिजिटल युग में आने वाले नए इनोवेशन या खोज को रोक सकते है?

इस डिजिटल युग में विश्व भर में होने वाले व्यापारों और उद्यमों से कैसे टक्कर लेंगे, अगर हम अपने देश में ही इस युग के विकास पर रोक लगा देंगे?

क्या हम गैर पारम्परिक ऊर्जा के स्रोतों का उत्पादन बंद कर दे, क्या इलेक्ट्रिक कार मार्केट में ना आने दे, क्यों कि पेट्रोल पंप के मालिक की दुकानें बंद हो जाएगी?

इलेक्ट्रिक कार में लगभग 24 मूविंग पार्ट्स या घूमने वाले हिस्से होंगे, जबकि पेट्रोल कार में लगभग 150 होते है. क्या कार मैकेनिक के जॉब चले जाने के डर से भारत में इलेक्ट्रिक कार ना आने दे?

डिजिटल युग के बारे में मैं कहना चाहूंगा कि हमारी आँखों के सामने चौथी औद्योगिक क्रांति हो रही है.

पहली क्रांति भाप की मशीन, जिसने जानवरों की शक्ति पर हमारी निर्भरता कम की; द्वतीय बिजली की मशीन, जिसने मॉस प्रोडक्शन या बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा दिया; तृतीय सूचना की क्रांति, जिसने हमें कनेक्ट किया.

और अब चौथी डिजिटल, जिसमें मानवीय या फिज़िकल, सूचना या डिजिटल और जैविक या जेनेटिक दुनिया को जोड़कर एक नयी संरचना 10 से 20 वर्षो में लागू हो जाएगी जो आज तक के सभी मानवीय प्रयासों और विकास को उलट-पलट देगी.

ग्रामीणों और छोटे दुकानदारों को समृद्ध बनाने के लिए तेज विकास और इनोवेशन की आवश्यकता है, जिससे उत्पादकता बढ़े.

इसके लिए 24 घंटे बिजली चाहिए, ट्रांसपोर्ट चाहिए, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधायें चाहिए, नियमों में पारदर्शिता चाहिए. भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहिए.

इसके लिए यह आवश्यक है कि लोग अपना टैक्स भरें और उस टैक्स के व्यय की जवाबदेही मांगे. जो टैक्स नहीं देते, वे स्वयं कैसे जवाबदेही मांगेंगे?

टैक्स न देने के बदले आपको कितनी घूस देनी पड़ती है, कभी आपने उसका हिसाब लगाया है? क्या घूस देना या टैक्स ना देना कुछ वर्षो में एक फायदे का सौदा होगा?

अगर आपको ऑनलाइन विक्रेता से टक्कर लेनी है तो अपनी दूकान और उसके आस-पास का वातावरण साफ़ रखना होगा, एसोसिएशन के द्वारा पार्किंग उपलब्ध करानी होगी. ग्राहकों को उत्तम सेवा देनी होगी.

अगर उन्हें शिकायत है तो उसे तुरंत दूर करना होगा. और ग्राहकों को ऑनलाइन प्राइस को मैच करने का वादा करना होगा. यात्रा कठिन है, लेकिन संभव है.

अंत में, समूचे 125 करोड़ भारतीयों का धन और समृद्धि पर संकट है क्योंकि विश्व में बहुत तेजी से तकनीकी बदलाव आ रहे है, बिज़नेस मॉडल बदल रहा है, उत्पादक और ग्राहक का रिश्ता बदल रहा है.

हमारे लोग अभी भी पुरानी और भावनात्मक अनुभूति से बंधे हुए है, समाज और बिज़नेस का आधुनिकीकरण नहीं हो रहा है.

यह समय और आने वाला समय मुश्किल है और चुनौतियों से भरा है. उस सुलझाने के लिए दूरदर्शी नेतृत्व चाहिए, जो प्रधानमंत्री मोदी जी में हमें मिला है.

विपक्ष, लोगों को गरीब बनाये रखना चाहते हैं जिससे उनकी दूकान जमी रहे. यही कड़ुआ सत्य है.

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