बच्चों की सेहत : आनेवाली पीढ़ी को योद्धा बनाइये बीमार नहीं

Parenting tips by dr Avyact Agrawal Photo Geet Nayak Making India

परसों दिल्ली के कुहासे और दमघोटू वातावरण की जानकारी के साथ साथ वहीं से एक जिज्ञासा प्रश्नरुप में मेरे सामने आई.

मेरा चार साल का बेटा आज दोपहर जब स्कूल से वापस आया उसको सांस लेने में दिक्कत हो रही थी आननफानन में उसको हास्पिटल ले गये वहां एडमिट कर उसको आक्सीजन दी गई व नेबुलाइज किया गया तब उसको आराम मिला.

आप कोई ऐसी दवा बताइये जिससे उसकी इम्युनिटी बढ़े.

मैंने उनको जो उत्तर दिया वह हूबहू लिख रहा हूं.

देखिये इम्युनिटी हमारे शरीर की वह अदृश्य व महत्वपूर्ण क्रिया है जिसको हम बाहर से कैसे भी उपार्जित नहीं कर सकते.

इंम्युनिटी उत्पन्न करने या उसे बढ़ाने के लिये हमें प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ना होगा और बिना लड़े हम इम्युनिटी को कभी नहीं पा सकते.

आप अपने बच्चे को भरी दोपहर बाहर की कड़ी धूप में कम से कम पंद्रह मिनट के लिये जाने दीजिये.

कड़ाके की सर्दी में उसे सुबह रजाई से निकाल नंगे पांव बिना स्वेटर के बाथरूम जाने दीजिये.

बारिश में भीग कर घर आने पर उसको एक दम ड्राय ना कर उसके बालों को गीला रहने दीजिये.

शुरुआत में थोड़ी तकलीफ तो होगी बच्चा भी कभी पसीने से लथपथ होगा,कभी छींकेगा तो कभी कंपकम्पाएं पर कई बार के दोहराव के बाद ऐसे परिवर्तन का अभ्यस्त हो जायेगा.

और हां ये पिज्जा बर्गर छोड़ उसको नाश्ते में अंकुरित अनाज दीजिये.

अब आप हार्लिक्स च्वयनप्राश को कूड़े के ढेर में या आलमारी में बंद करने को स्वतंत्र हैं.

इतनी सामान्य सी सलाह जो सभी पहले से ही जानते हैं उसको लेख रूप में देने की आवश्यकता इसलिये महसूस हुई कि जिस तरह का प्रतिकूल वातावरण हम निर्मित होने दे रहे हैं उसके चलते आज दो दिन के लिये कोहराम मचा है. चार साल बाद यह एक माह और फिर उसके बाद पूरी सर्दियों भर ऐसा हो सकता है. बच्चे को कितने समय तक हास्पिटलाइज किया जायेगा?

अब वह समय आ गया है कि जीना है तो लड़ना पड़ेगा.

इस धरती पर सिर्फ योद्धाओं के लिये ही जीवन रह गया है. आनेवाली पीढ़ी को योद्धा बनाइये बीमार नहीं.

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