विद्या और जवान : दोनों सही, पर Eve Teasing स्वीकार्य नहीं

चेन्नई में हूँ. यात्रा का आज चौथा दिन है. Sunday बाइक पर बीता.

जालंधर के अपने Riders मित्रों के साथ एक One Day Ride पर हिमाचल के एक Heritage Village परागपुर गए थे घूमने.

रात दिल्ली के लिए गाड़ी पकड़ ली. अगले दिन चेन्नई के लिए गरीब रथ पकड़ी. डेढ़ दिन रेल में बीता.

कल से फेसबुक पर विद्या बालन trend कर रही हैं. विद्या बालन को भाई लोगों ने इतना गरिआया है कि अब क्या बताएं.

इस विद्या बालन प्रकरण ने मुझे फौजी लड़कों की व्यथा याद दिला दी.

एक Coach और Mentor होने के नाते मैं हमेशा एक बात कहता हूँ, सीखने का एक मात्र तरीका है, कर के सीखो. First Hand Experience न हो तो आपको कुछ समझ नहीं आएगा.

आमतौर में 17-18 या अधिक से अधिक 20 साल की उम्र में लौंडा भर्ती हो जाता है. इस कच्ची उम्र में, घर से माँ बाप से दूर इतनी कठिन ट्रेनिंग…

सुबह 4 बजे उठ के, नहा के, शेव करके परेड ग्राउंड में fall in, उसके बाद न दिन देखा न रात… ट्रेनिंग से निकला तो चल बॉर्डर पे…

फौजी के शुरुआती साल बड़े कठिन होते हैं. इन्ही सालों में एक अच्छा फौजी बनता है.

फौजी जब छुट्टी काट के वापस ड्यूटी पर जाने लगता है तो उस समय घर परिवार की क्या मनोदशा होती है, इसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते.

और फिर जब शादी हो जाये तो??? 10 दिन की नवविवाहिता पत्नी को छोड़ के बॉर्डर पर जाना…

और पूरी जवानी यूँ ही पत्नी के वियोग में बिता देना… कभी सोच के देखिएगा… 22-24 साल का लड़का, कड़कड़ाती सर्दी में, रात के 2 बजे, कंधे पे राइफल टांगे, जब Quarter guard के गेट पर खड़ा संतरी की ड्यूटी कर रहा हो तो घर परिवार की, बीवी बच्चों की कितनी याद आती होगी…

वो दृश्य मुझे कभी भूलता नहीं है, किसी रेलवे स्टेशन पर एक फौजी अफसर की पत्नी उसे विदा करने आई हुई थी. वो ट्रेन में खिड़की के पास बैठा था और पत्नी बाहर प्लेटफॉर्म पर खड़ी रोये जा रही थी. उन दोनों को देख के हमारा कलेजा फटा जाता था.

फौजी बेचारे की सारी जवानी यूँ वियोग में ही बीत जाती है. वाकई Sex Starved (यौनतृप्ति वंचित) होते हैं बेचारे.

शांत क्षेत्रों (Peace Areas) में तो चलो फिर भी Family Accomodation मिल जाती है पर Border Areas जिन्हें Field Areas कहते हैं, वहां जीवन बहुत कठिन होता है.

और खासकर इन दिनों जब कि ये Cross Border Terrorism शुरू हुआ है, फौज की व्यस्तता और जिम्मेवारी पहले की अपेक्षा बहुत ज़्यादा बढ़ गयी है.

ऐसे में ड्यूटी से लौटते किसी फौजी ने अगर आपको निहार या घूर दिया तो ये उसका एक सामान्य व्यवहार मान नज़रंदाज़ कर देना चाहिए. ये तो हुआ उस फौजी का पक्ष.

पर जहां तक बात विद्या बालन की है, उनके बयान में कुछ भी गलत नहीं है. आप उनके बयान की सिर्फ एक लाइन मत पढ़िए. पूरा बयान पढ़िए.

वो अपने संघर्ष के दिनों की बात कर रही थी जब कि वो मुम्बई की लोकल ट्रेनों में यात्रा करती थीं, और ऐसी भीड़ भाड़ वाली जगहों पर महिलाओं को क्या-क्या सहना पड़ता है, इस से सब वाकिफ़ हैं.

एक काम कीजिये, लगातार एक साल इसी तरह भीड़ में यात्रा कीजिये. और लोग आपकी नितम्बों पे चिकोटी काटें, आपके वक्ष सहलाएं, कोई तो सीधे उंगली ही घुसेड़ दे, भीड़ का फायदा उठा के कोई आपकी ब्रा में ही हाथ डाल दे.

और ऐसा रोज़ाना हो, सुबह-शाम हो आपके साथ, तो आपकी क्या मनोदशा होगी, आप कैसे व्यवहार करेंगे, कैसे प्रतिक्रिया करेंगे, कैसी बेबसी-लाचारी का अनुभव होगा… और अगर आपके साथ ऐसा लगातार बीसियों साल तक होता रहे, होता रहे तो???

अपनी जगह अपनी बेटी, बहन, पत्नी को रख के देखिये…

अपनी बेटी के साथ चलिये किसी भीड़ भरी लोकल ट्रेन में और फिर देखिए कैसे आपके सामने ही लोग उसे चिकोटियाँ काटते हैं, उसके वक्ष सहलाते हैं…

जाइये कीजिये न ये Social Experiment… फिर लिखिए फेसबुक पर कि कैसा महसूस हुआ जब आपके सामने आपकी बेटी को लोग छू रहे थे, सहला रहे थे, चिकोटियाँ काट रहे थे, finger कर रहे थे…

पहले अपनी मनोदशा का बयान कीजिये और फिर अपनी उस बहन बेटी की मनोदशा का…

विद्या बालन महिला सुरक्षा और महिला सम्मान के विषय पर बोल रही थीं. उन्होंने किसी एक individual फौजी के व्यवहार की शिकायत की है, न कि एक संस्था के रूप में पूरी फौज की.

यदि कोई फौजी उन्हें घूर रहा था तो उन्हें पूरा हक़ है प्रतिकार करने का. आपकी बहन बेटी को कोई फौजी घूरेगा तो आप उसे allow करेंगे? चलो फौजी है, बेचारा Sex Starved फौजी, घूर लेने दो.

राष्ट्रवाद के अतिरेक में हम सब उस फ़ौजी के पक्ष में खड़े विद्या बालन को गरिया रहे हैं.

ये ठीक है कि फौजी का अपना पक्ष है पर विद्या बालन के पक्ष को आप कैसे नकार सकते हैं.

Eve Teasing एक कड़वी हक़ीक़त है. इसे स्वीकार कीजिये. Eve Teasing कोई भी करे, चाहे बेचारा Duty से लौटता कोई Sex Starved फौजी ही क्यों न हो, कोई स्वीकार नहीं करेगा.

विद्या बालन जैसी पक्की फसल को नहीं पचा सकते सोशल मीडिया के कच्चे दिमाग़

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY