जिस लड़की ने सिल्क स्मिता का रोल किया, उसे तो सरेआम छेड़ा जा सकता है! है न?

भाई लोग को विद्या बालन से सबसे बड़ी आपत्ति तो उनके The Dirty Picture में किये गए रोल से है.

तो चलिए लेख की शुरुआत The Dirty Picture से ही करते हैं.

Bollywood से हम लोगों की एक शिकायत हमेशा रही है कि ये Realistic Cinema नहीं बनाते. पर हक़ीक़त ये है कि जब कभी Realistic Cinema बना तो वो अधिकांश दर्शकों को पचा नहीं.

GoW (गैंग्स ऑफ़ वासेपुर) में भोत गाली गलौच है.

अपने असल जीवन मे सरदार खान और रामाधीर सिंह कौन सी भाषा बोलते हैं? वही न जो महाभारत सीरियल में बोली जाती थी?

या फिर वो जो संघ की शाखाओं और शिविरों में बोली जाती है? गैंगस्टर पे फ़िल्म बनेगी तो भाषा क्या होगी? शुद्ध संस्कृत?

सिल्क स्मिता पे फ़िल्म बनेगी तो उसमें सिल्क को कैसे दिखाया जाए? या फिर सिल्क पे फ़िल्म बनाई ही न जाये???

फिर तो सत्यवान सावित्री के अलावा कोई फिल्म ही नहीं बननी चाहिए. सीता राम पर फ़िल्म बने तो रावण को कैसा दिखाएं?

जहां तक बात The Dirty Picture (TDP) की है, मैंने वो फ़िल्म अपने लैपटॉप पर नहीं बल्कि सिनेमा हॉल में देखी थी और 50 किलोमीटर की यात्रा कर के सिर्फ फ़िल्म देखने माहपुर से बनारस गया था.

और इस फ़िल्म को में हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिनता हूँ. जिन्हें ये फ़िल्म अश्लील, कामुक, घटिया लगती है उन्हें Kate Winslet की The Reader देखनी चाहिए.

मुझे तो TDP कहीं से भी, किसी भी एंगल से घटिया गंदी अश्लील पिक्चर नहीं लगी.

अब आते हैं विद्या बालन पर.

पहला सवाल ये कि सिल्क स्मिता के जीवन पे फ़िल्म बने या न बने?

बने तो सिल्क को कैसा और कैसे दिखाया जाए?

अगर ऐसा realistic Cinema बनना है तो आखिर सिल्क का रोल कौन करेगा?

फिल्मों में रोल करने वाले क्या वास्तविक जीवन में भी वैसे ही होते हैं जैसे फिल्मों में दिखते हैं.

अमरीश पुरी, प्राण, प्रेम चोपड़ा, अमजद खान को तो फिर सड़कों पे दौड़ा दौड़ा के पीटा जाना चाहिए…

प्रेम चोपड़ा साहब की बहन-बेटी का तो सड़क पे सरेआम बलात्कार होना चाहिए… जो आदमी पर्दे पे खुद बलात्कार करता है उसे क्या हक़ है वास्तविक जीवन में बलात्कार का विरोध करने का???

विद्या बालन का मूल्यांकन सिर्फ The Dirty Picture में उनके रोल से क्यों हो रहा है? परिणीता से क्यों नही होता???

जिस लड़की ने सिल्क स्मिता का रोल किया है उसे सड़क पर सरेआम छेड़ा जा सकता है????????

किसको छेड़ा जा सकता है किसे नहीं, अब ये आप decide करेंगे?

कौन कैसे कपड़े पहनता है और किसकी कितनी चमड़ी दिखती है इससे decide होगा कि कौन छेड़नीय है और कौन अछेड़नीय?

यही पैमाना रहा तो Radical शांतिदूत के लिए तो हर वो हिन्दू औरत छेड़नीय हो जाएगी जो कि पर्दा नशीं नहीं, जो बेशर्मी से समाज में मुंह उघाड़ के चलती है.

हर वो औरत छेड़नीय हो जाएगी जो सिर पे पल्लू नहीं लेती है या जो sleeveless top पहनती है या जो नेकर पहन के साइकिल चला कर स्पोर्ट्स के लिए ग्राउंड पर जाती है???

अगर ये पैमाना सऊदी अरेबियन तय करने लगे तब तो हर वो औरत छेड़नीय हो जाएगी जो स्वयं Car या Scooty चला रही… या फिर हर वो औरत जो अकेली घर से बाहर निकली?

अब छेड़क तय करेंगे कि कौन छेड़नीय है और कौन अछेड़नीय???

और यदि एक बार लड़की छेड़नीय घोषित हो गयी फिर तो उसे अपनी छेड़छाड़ का प्रतिकार करने का हक़ भी आप छीन ही लेंगे जैसे कि आपने विद्या बालन का छीन लिया…

अस्पतालों में महिला डॉक्टर, नंगे लेटे पुरुष मरीजों को देखती-छूती हैं, उनका इलाज करती हैं. ऐसे में अगली बार कोई महिला डॉक्टर सड़क पर दिखे तो ये लोग उसके साथ क्या करेंगे???

घूरा-चार : एक राष्ट्रीय त्रासदी, सरकार को चैये कि कोई GHIM एप्प डेवलप करे

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY