The Karate Kid के बहाने : गीता उपदेश

एक पुरानी फिल्म “The Karate Kid” का रीमेक 2010 में आया था. इसका पुराना वाला (1984) भी कभी कभी टीवी पर दिखाते हैं इसलिए कई लोगों ने इसके दोनों रूप देखे होंगे.

नए वाले की ज्यादा याद इसलिए रहती है क्योंकि समय के साथ एक्टिंग के बदले हुए तरीकों और फिल्मांकन की वजह से वो ज्यादा आसानी से हजम होती है.

ये एक कराटे सिखाते जैकी चैंग और उस से सीखते जेडेन स्मिथ (विल स्मिथ का बेटा) की कहानी है (असल में कुंग फू सिखा रहा था, खाली नाम पुराने वाले की वजह से कराटे किड है).

फिल्म के शुरुआत में ही दिखाते हैं कि डेट्रॉइट की किसी ऑटोमोबाइल कंपनी में काम करती शैरी का ट्रान्सफर बेजिंग हो जाता है.

अकेले बच्चे को पालती शैरी वैसे ही परेशान है और ऊपर से किशोर Dre के बर्ताव से और परेशान होती रहती है. Dre को नया देश पसंद नहीं आ रहा होता, नए स्कूल में उसके कोई दोस्त भी नहीं हैं.

एक वायलिन बजाना सीखती मेयिंग नाम की चीनी लड़की इस बच्चे Dre को पसंद आने लगती है. लेकिन अश्वेत विदेशी Dre का मेंयिंग के करीब आना चेंग नाम के एक दूसरे लड़के को पसंद नहीं आता.

अपनी स्थिति से हैरान परेशान Dre जो वस्तुस्थिति को कबूलने को तैयार ही नहीं था, वो एक दिन चेंग और उसके साथियों से पिट ही रहा था कि घरों में मेन्टेनेन्स का काम करने वाला हान वहां पहुँच जाता है.

हान, Dre को गुंडों से बचा लेता है तो Dre को समझ आ जाता है कि ये साधारण मेन्टेनेन्स वाला कुंग फू में अच्छा है. वो हान से सीखने के पीछे पड़ जाता है.

जैसे तैसे सिखाने को तैयार हुआ हान, Dre को रोज एक जैकेट टांगने की प्रैक्टिस करने छोड़ देता है. कुछ दिन बाद जब Dre पूछता है उसे जैकेट गिराना-टांगना नहीं कुंग फू सीखना है तो हान उसे पीटने की कोशिश करता है, अब अचानक Dre को समझ आता है वो सीखता जा रहा है.

बेकार के सवालों में टाइम खराब करने के बदले अब Dre ढंग से आदेशों का पालन करना शुरू करता है.

वो अच्छा छात्र था, तेजी से सीखता है तो हान उसे मसल रिफ्लेक्स, यानी आपका विरोधी आपको ही कॉपी करने लगे, आपकी मर्जी से हमले का तरीका चुने, जैसी मुश्किल तकनीकें भी दिखाता है.

Dre को फिर पता नहीं होता कि उसने ये सीख लिया है या नहीं. हान जो सिखा रहा होता है, उसकी अपनी कहानी है. कभी गाड़ी के एक्सीडेंट में उसकी पत्नी-बच्चे की मौत हो गई थी.

अब वो हर साल उस गाड़ी को रिपेयर करता जिस से उसने एक्सीडेंट किया था. फिर शराब के नशे में वो गाड़ी को तोड़-फोड़ देता था. धीरे धीरे सिखाने में हान भी अपने अपराधबोध से मुक्त होता जाता है.

फिल्म के आखरी दृश्य में एक टूर्नामेंट में जब Dre लड़ रहा होता है तो उसका पैर टूट गया होता है.
अपने दुष्ट किस्म के शिक्षक के उकसाने पर चेंग उसकी टांग पूरी तरह तोड़कर जीतने पर तुला होता है.

ऐसे में Dre मसल रिफ्लेक्स की तकनीक इस्तेमाल कर पाता है और जीत भी जाता है.

जैसे फ़िल्में ख़त्म होती हैं, वैसे ही परिवार से बेहतर संबंधों पर, हान के पहले से बेहतर होने, Dre के मेयिंग के परिवार से तमीज से पेश आना सीखने, दूसरी संस्कृतियों का सम्मान सीखने जैसी चीज़ों पर ख़त्म होती है. बड़े होते बच्चों के लिए ये अच्छी फिल्म है.

मसल रिफ्लेक्स जैसी चीज़ें समझ ना आयें तो किसी जानवर पालने वाले को या दादी-नानी को बच्चों के साथ इसे इस्तेमाल करते देखना नामुमकिन नहीं होता.

फिल्म की कहानी में बार बार ये सवाल आता रहता है कि “मैं कल से कुछ बेहतर हूँ या नहीं?” क्या थोड़े दिन पहले मैं जैसा इंसान, या छात्र, या माता-पिता था उस से बेहतर हो पाया?

ये सवाल भगवद्गीता में भी आता है. अर्जुन के लिए ये एक महत्वपूर्ण सवाल था, और हमने फिल्म की कहानी के धोखे से वही सवाल दोबारा पढ़ा दिया है. अर्जुन योग के विषय में इस चिंता में भी था कि अगर आज कोशिश की और मरने से पहले तक पूरा नहीं सीख पाया, आधा ही सीखा तो क्या होगा? श्री कृष्ण उसे जीवन मरण के सरल रेखा होने के बदले, चक्रीय क्रम के बारे में समझाते हैं.

कर्मफल हमेशा कर्मों के हिसाब से मिलते हैं. फल की दृष्टि से कर्म दो तरह के हो सकते हैं. पहला तो, सकाम कर्म जो इसी दुनिया में मिल जाने लायक किसी लाभ (जैसे पैसा, संतान, नाम-यश) को प्राप्त करने की इच्छा से किए जाते हैं.

दूसरा निष्काम कर्म वैसे हैं जो मोक्ष प्राप्ति की इच्छा से किए जाएँ, या कहिये भगवान् को समर्पित हों. इसमें से हरेक सकाम कर्म, चाहे वो अच्छा हो या बुरा, उसका फल मिलेगा ही.

जो इसी जन्म में मिले उसे “दृष्टजन्मवेदनीयः” और जो कभी आगे फल देगा उसे “अदृष्टजन्मवेदनीयः” कर्म कहते हैं. जैकेट टांगने में लगे हुए फिल्म के बच्चे Dre की तरह, अर्जुन भी छठे अध्याय के सैतीसवें और अड़तीसवें श्लोक में वही पूछ रहा होता है.

कुछ होता तो दिख नहीं रहा का प्रश्न जैकेट गिराने टांगने में लगे बच्चे Dre के लिए तो था लेकिन उसका गुरु हान जब उसे मसल रिफ्लेक्स सिखा रहा होता है, तो वो ये नहीं सोचता कि फायदा हुआ या नहीं.

बच्चे को बाद में दिखाना पड़ता है, तुम्हें नहीं लगा, लेकिन तुम सीख गए हो. गुरु हान पूछता नहीं लेकिन उसे भी पता चलता है कि आगे वो अवसाद (और शराबी होने) जैसी समस्याओं से अपने आप मुक्त हो गया था.

आगे चालीसवें से लेकर छठे अध्याय का अंतिम (47वां) श्लोक श्रीभगवान् उवाच है और वहां इसी सवाल का यही जवाब लिखा है. आपने शायद सत्तर साल की समय सीमा के अन्दर देख इसलिए नहीं होता दिखा, लेकिन हुआ होगा.

छठे अध्याय का ये हिस्सा मुश्किल से दस श्लोकों का है, खुद पढ़ कर देखिएगा. क्योंकि ये जो हमने धोखे से पढ़ा डाला वो नर्सरी लेवल का है, और पीएचडी के लिए आपको खुद पढ़ना पड़ेगा ये तो याद ही होगा?

विद्या बालन जैसी पक्की फसल को नहीं पचा सकते सोशल मीडिया के कच्चे दिमाग़

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