कांटे से कांटा निकालना चाहिए, एक बार वहां भगवा लहराने दीजिये, सफाई होती रहेगी

तीन साल पुरानी बात है शायद. बंगाल में शारदा चिट फण्ड घोटाले की आंच मुकुल रॉय तक पहुंचने लगी थी.

बंगाल में चर्चा थी. मुकुल रॉय कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं. केंद्र में मोदी आ चुके थे, CBI और ED (प्रवर्तन निदेशालय) शारदा घोटाले की जांच में जुटे थे.

शारदा के मालिक सुदीप्तो सेन, और तृणमूल कांग्रेस के सांसद कुणाल घोष और सृंजय बोस की गिरफ्तारी हो चुकी थी.

इसके अलावा बंगाल पुलिस के पूर्व डीजीपी और वर्तमान में तृणमूल के प्रदेश उपाध्यक्ष रजत मजूमदार, खेल और ट्रांसपोर्ट मंत्री मदन मोइत्रा जैसे बड़े (?) लोग भी जेल में थे.

ऐसे में तलवार मुकुल रॉय की गर्दन पर भी लटकी हुई थी…

मैं कोलकाता गया हुआ था. कोलकाता से 60 किलोमीटर दूर एक कस्बे में मेरे मित्र रहते हैं, मैं उनसे मिलने गया हुआ था.

वहीं मेरा एक और फेसबुक मित्र, एक युवक भी मिलने आ गया. हम उस मित्र के घर बैठे थे.

स्वाभाविक रूप से चर्चा बंगाल की राजनीति की हो रही थी. मेरे वो मित्र तो तृणमूल कांग्रेस के मुखर विरोधी थे और खुल कर मोमता दी की आलोचना कर रहे थे.

पर वो युवक सहमा सहमा सा, बहुत सोच समझ के, बड़ी धीमी आवाज़ में बोल रहा था… कुछ भी बोलने से पहले वो अगल-बग़ल दाएं-बाएं निगाह मार लेता था.

उसने मुझे बताया कि वो उस कस्बे का तृणमूल कांग्रेस का एक स्थानीय कार्यकर्ता है, पदाधिकारी है…

फिर उसने मुझे बताया कि वो दरअसल कट्टर मोदी भक्त और कट्टर भाजपाई है… पर क्या करें दद्दा…

बंगाल में अगर रहना है, बंगाल में अगर काम धंधा करना है, बंगाल में अगर ज़िंदा रहना है तो तृणमूल कांग्रेस करना पड़ेगा… करना पड़ेगा बोले तो तृणमूल कांग्रेस का समर्थन करना ही पड़ेगा… वर्ना…

वरना क्या???

बेरोज़गार युवक हूँ दद्दा… अपने घर पर ही एक कोचिंग सेंटर चलाता हूँ जिसमें कस्बे के ही 20 – 25 बच्चे पढ़ने आते हैं. महीने के 8 – 10 हज़ार बन जाते हैं.

आज अगर घर पर भाजपा का झंडा लगा लूँ तो शाम को तृणमूल कांग्रेस के गुंडे आएंगे, घर का सामान तोड़ फोड़ के सड़क पर डाल देंगे, कोचिंग फूँक देंगे… कस्बे में संदेश चला जायेगा और फिर मेरी कोचिंग में कोई नहीं आएगा पढ़ने…

पुलिस??? सरकार???

तृणमूल कांग्रेस का स्थानीय नेता (गुंडा) ही पुलिस है, वही सरकार है और वही न्यायालय है…

इतना आतंक? सरकार क्या कर रही है?

अजी ये सरकारी आतंक है. सत्तारूढ़ पार्टी का आतंक है. इन गुंडों को ताक़त सत्तारूढ़ पार्टी से ही मिलती है.

तो फिर ऐसी सरकार को आप लोग हटाते क्यों नहीं?

आखिर इन गुंडों को आपने चुना क्यों?

किसने चुना??? बंगाल की जनता ने इन्हें नहीं चुना…

फिर किसने चुना?

बंगाल की जनता ने आखिरी बार कब वोट डाला था… याद नही. शायद 60 के दशक में. उसके बाद तो कभी मौका ही न मिला पोलिंग बूथ तक जाने का…

हमारे वोट अपने आप पड़ जाते हैं. अव्वल तो तृणमूल कांग्रेस विरोधियों का नाम ही नहीं होता वोटर लिस्ट में. किसी तरह नाम अगर आ भी गया तो वोट डाल ही नहीं सकते. बूथ तक जाने ही नहीं देते…

कौन रोकता है?

आइये दिखाता हूँ…

वो मुझे घर से बाहर ले आया. अंग्रेजों का बसाया हुआ कस्बा था, सभी सड़कें एक दूसरे को 90° के एंगल पर काटती थीं.

उसने कहा, वो देखिये, वो जो चौक है न, वोटिंग वाले दिन सुबह 7 बजे तृणमूल कांग्रेस का स्थानीय गुंडा आ के खड़ा हो जाता है, और फिर पूरे शहर में अघोषित कर्फ्यू लग जाता है.

तृणमूल कांग्रेस विरोधी परिवारों का बाहर निकलना वर्जित होता है. सिर्फ तृणमूल कांग्रेस समर्थक ही बूथ तक जाने पाते हैं. बाकी सबका भोट पड़ जाता है…

आज जो गुंडागर्दी तृणमूल कांग्रेस कर रही है ये दरअसल राज्य-आतंकवाद (State Terrorism) है, जिसकी शुरुआत कभी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने की थी.

विरोधी को वोटर लिस्ट में मत घुसने दो, अगर किसी तरह वोटर लिस्ट में घुस भी गया तो पोलिंग बूथ में मत घुसने दो… जो न माने उसे राज्य की पुलिस, प्रशासन और राज्य/ पार्टी पोषित गुंडों से मरवा दो…

तो फिर आखिर उस CPM को ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने कैसे पराजित किया?

जब तृणमूल कांग्रेस मज़बूत होने लगी, और जनता विद्रोह पर उतारू हो गयी तो… CPM का सारा कैडर (गुंडे) CPM छोड़ तृणमूल कांग्रेस में आ गए. जो कल तक CPM के लिए बूथ कब्ज़ाते करते थे वो अब तृणमूल कांग्रेस के लिए करने लगे…

तो? अब ये तृणमूल कांग्रेस रूपी राक्षस कैसे मरेगा???

जब तृणमूल कांग्रेस का कार्यकर्ता/ कैडर (गुंडा, राज्य पोषित आतंकी) तृणमूल कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो जाएगा…

कब शामिल होगा???

जब दिल्ली से इशारा होगा…

कौन है इन गुंडों का सरगना?

मुकुल रॉय… मुकुल रॉय गया माने सब गया…

आपको क्या लगता है अब क्या होगा?

मेरे वो मित्र वाकई स्थानीय राजनीति को समझते थे… उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि CBI मुकुल रॉय को गिरफ्तार करेगी. उनको क्लीन चिट मिल जाएगी. इस शर्त पर कि वो तृणमूल कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ जाएंगे.

कब तक ऐसा होना चाहिए?

जब दिल्ली से हरी झंडी मिल जाये.

कब तक मिलेगी?

शायद विधानसभा चुनाव से पहले.

उसके बाद उन मित्र से हमेशा फोन पर चर्चा होती. विधान सभा चुनाव सिर पर थे. एक दिन वो बड़े निराश थे. मैने पूछा क्या हुआ?

दिल्ली से हरी झंडी नहीं मिल रही.

क्यों?

अमित शाह को लगता है कि अभी बंगाल में चुनाव जीतने लायक संगठन, जो बूथ लेबल तक होना चाहिए, वो तैयार नहीं है. कच्चा घड़ा पानी में नहीं तैराना चाहिए.

फिर??? अब क्या होगा विधान सभा चुनाव में? कितनी सीट आएगी?

2 या शायद 4…

बस???

जी.

तब से आज तक हम लोग दिल्ली से हरी झंडी का इंतज़ार कर रहे थे. आज अंततः मुकुल रॉय भाजपा में शामिल हो ही गए.

कुछ लोग उनके दागी अतीत पर सवाल खड़े कर रहे हैं. सवाल है कि बंगाल को कौमनष्टों और ममता बानो के जिहादी कुशासन से निजात दिलानी है या नहीं?

कब तक हम लोग बंगाल में आदर्शवाद और शुचिता की बकवास पेलेंगे???

कांटे से कांटा निकाल लेना चाहिए. मुकुल रॉय बंगाल से जिहादी मोमता को निकालने में काम आएगा. एक बार वहां भगवा लहराने दीजिये, सफाई होती रहेगी.

मुकुल रॉय का दोनो हाथ फैला, दिल खोल के स्वागत कीजिये बंगाल भाजपा में.

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