राहुल जी, यूं ही नहीं सुधर गई Ease of doing business में भारत की रैंकिंग

वर्ल्ड बैंक की Ease of doing business की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने ‘व्यापार करने में आसानी’ के मामले में पिछले साल के मुकाबले 30 पायदान की छलांग लगाई है.

भारत 190 देशों की फेहरिस्त में 100वें नंबर पर आ गया है, जबकि पिछले साल 130वें नंबर पर था. उससे पिछले साल भारत की पोजिशन 131वीं थी.

[मोदी सरकार की नीतियों का असर : Ease of doing business रैंकिंग में भारत की बड़ी छलांग]

राहुल गांधी ने बुधवार को वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट पर खुश होने के लिए वित्त मंत्री अरूण जेटली पर निशाना साधा.

राहुल ने ट्वीट के जरिए कटाक्ष किया- ‘सबको मालूम है Ease of doing business की हकीकत लेकिन खुद को खुश रखने के लिए Dr. Jaitley ये ख्याल अच्छा है.’

राहुल गांधी के आरोपों को उनके ‘स्टेट आफ माइंड’ के सहारे छोड़कर वर्ल्ड बैंक की Ease of doing business रिपोर्ट के बारे में कुछ बातें जानना जरूरी है.

वर्ल्ड बैंक हर साल इस रिपोर्ट को तैयार करने में दस पैमाने पर दुनिया के देशों को परखता है, जो पूरी दुनिया के देशों पर एक जैसा लागू होती हैं.

जैसे किसी देश में नया उद्य़ोग लगाने में कितना समय लगता है और इसके लिए बिजली तथा अन्य बुनियादी सुविधायें कितनी आसानी से मिलती है.

गौर करने की बात ये है कि ऐसी रिपोर्ट तैयार करने में वर्ल्ड बैंक किसी देश के सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल नहीं करता बल्कि इसके लिए खुद सर्वे करके अलग अलग विषयों पर रिपोर्ट तैयार करता है.

इस रिपोर्ट में दुनिया भर की रैंकिंग करने के लिए वर्ल्ड बैंक ‘Distance to Frontier’ के तरीके का इस्तेमाल करता है.

इस तरीके का मतलब ये है कि पहले वर्ल्ड बैंक ये पता करता है कि चुने हुए दस पैमानों पर दुनिया में कौन सा देश सबसे अव्वल है.

फिर इस बात का आकलन किया जाता है कि उस नंबर 1 देश की तुलना में बाकी देश कितने पीछे हैं.

जिन दस बातों का आकलन वर्ल्ड बैंक अपनी रिपोर्ट में करता है वो हैं –

‘Starting a Business’

‘Dealing with Construction Permits’

‘Getting Credit’

‘Protecting Minority Investors’

‘Paying Taxes’

‘Trading across Borders’

‘Enforcing Contracts’

‘Resolving Insolvency’

मिसाल के तौर पर नया बिजनेस शुरू करने के लिए न्यूजीलैंड में सिर्फ एक औपचारिकता करनी पडती है और ये काम आधा दिन में ही पूरा हो जाता है.

उसकी तुलना में इस मामले में जो देश सबसे पीछे है वहां 18 औपचारिकताएँ पूरी करनी पडती हैं और इसमें 100 दिन का समय लगता है.

अब सवाल ये उठता है कि ये कमाल हुआ कैसे? दरअसल पिछले साल इस रैंकिंग में सिर्फ एक पोजिशन का सुधार होने पर मोदी सरकार को बड़ा झटका लगा था.

प्रधानमंत्री ने इस पर नाराज़गी भी जतायी थी. उसके बात सरकार ने उन चीजों का गहराई से अध्ययन किया जिन बातों को वर्ल्ड बैंक अपने सर्वे में शामिल करता है.

पहला बदलाव तो ये हुआ कि सरकार ने वर्ल्ड बैंक से कहा कि वो इस सर्वे के लिए सिर्फ मुंबई नहीं बल्कि दिल्ली को भी शामिल करे जो बात मान ली गयी.

इसके बाद सरकार ने खास तौर पर अफसरों को इस काम पर लगाया कि मुंबई और दिल्ली नगर पालिकाओं को इस बात के लिए तैयार किया जाए कि बिजनेस के लिए बिजली और पानी का कनेक्शन पानी की प्रक्रिया को आसान, छोटा और पूरी तरह से ऑनलाईन बनाया जाए.

कई मामलों में ऐसी व्यवस्था कि गई कि अगर ऑनलाइन एपलिकेशन पर तय समय के भीतर कारवाई नहीं की जाए तो उसे खुद ब खुद अनुमति मान ली जाए.

संबधित विभागों की वेबसाइट को साफ सुथरा, आसानी से समझने लायक बनाया गया और अहम कामों से जुडे कंप्यूटर और इंटरनेट को तेज और बेहतर बनाया गया. ताकि ऑनलाइन काम करने में कोई परेशानी न हो.

कंपनियों इन तमाम बदलावों के बारे में जानकारी दी गयी और बताया गया कि बिज़नेस को आसान बनाने के लिए क्या क्या बदलाव किये गए हैं.

भारत की रैंकिग को इस साल बेहतर बनाने में सबसे ज्यादा योगदान टैक्स देने का है जिसमें भारत का स्कोर पिछले साल के 47 के मुकाबले इस साल 66 हो गया है.

जीएसटी बेशक भारत के आर्थिक सुधारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है लेकिन वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट में अभी इसका कोई असर नहीं है. क्योंकि जीएसटी 1 जुलाई से लागू हुआ और वर्ल्ड बैंक नें इस रिपोर्ट को तैयार करने में सिर्फ 30 जून तक का आंकडा इस्तेमाल किया है.

Ease of doing business रिपोर्ट को लेकर आने वाले साल की रैंकिग में भारत की पोजिशन और बेहतर होने की उम्मीद है क्योंकि तब तक जीएसटी का असर भी इस रिपोर्ट में शामिल होगा.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY