नीति शास्त्र : राजनीति शह और मात का खेल है!

युद्ध क्षेत्र में जब दुश्मन की सेनायें सामने हो, नीति शास्त्र (चाणक्य/विदुर नीति) कहता है, पहला प्रहार दुश्मन की रीढ़ की हड्डी पर करो.

दुश्मन की सप्लाई लाइन काट दो. दुश्मन के राजमार्ग हवाई अड्डे भीषण प्रहार से नेस्तनाबूत कर दो. इन्फेंट्री को आर्म्स और रसद सप्लाई करने वाले सब संसाधन उड़ा दो. युद्ध में निश्चित विजय आपकी होगी.

रीढ़ की हड्डी (सप्लाई लाइन) कटते ही दुश्मन रीढ़ विहीन (कमजोर) हो जायेगा.

फ़िल्म चाइना गेट का एक सुपरहिट डायलॉग है. “जगीरा से लड़ने के लिए कुत्तों की फौज तो बना लोगे परन्तु जगीरा जितना कमीनापन कहाँ से लाओगे?”

पश्चिम बंगाल के भौगालिक/राजनीतिक हालातों से अगर आप परिचित हो तो आज़ादी के बाद यहां लंबे समय तक कांग्रेस का (कु)शासन रहा.

भूमि अधिग्रहण के असंतोष के बाद उपजे हालातों से बंगाल के नक्सलवाड़ी से नक्सलवाद आंदोलन प्रारम्भ हुआ. जिसने (नक्सलवाद) आज देश के अनेक राज्यों में अपने पैर पसार लिए हैं.

नक्सल आंदोलन के बाद बंगाल में सत्ता का नया उदय हुआ …. नक्सलवादी वामपंथी सरकारों का सूर्योदय …. नतीजा …. हड़तालें …. तालाबंदी …. उद्योग धंधे चौपट हुए और उद्यमियों का बंगाल से पलायन हुआ …. राजनीतिक बन्धुवा वोट बैंक को सुदृढ करने के लिए सीमा पार से आये शरणार्थियों (घुसपैठियों) का राजनीतिक संरक्षण के कारण पनाहगार बना बंगाल…

तत्पश्चात एक लंबे संघर्ष के बाद बंगाल में “सुश्री ममता बनर्जी” ने वामपंथ के किले में सेंध लगा के उसे ध्वस्त किया…

लेकिन …. बट …. ईफ …. किंतु …. परन्तु ………. नतीजा ……… वो ही ढाक के तीन पात…….. कमोबेश कांग्रेस से वामपंथ के रास्ते टीएमसी के हाथों सत्ता आने तक/बाद भी बंगाल के हालात बद्द से बद्दतर हुए हैं/हो रहे हैं..

पश्चिम बंगाल में कल एक बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ. टीएमसी नेता और शारदा चिट फंड घोटाले के मुख्य सूत्रधार ”

” भाजपा में शामिल हुए.

विरोधी तो विरोधी, भाजपा के अपने समर्थंक और कार्यकर्ता भाजपा के इस फैसले की कड़ी निंदा कर रहे हैं.

भाजपा अब तक देश और प्रान्तों की सत्ता से विमुख रही इसका प्रमुख कारण… राजनीतिक शुचिता और नैतिकता का ठेका अकेले भाजपा ने ही बुलंद कर रखा था. वहीं विपक्षी दल साम दाम दण्ड भेद …. येन केन प्रकरेण …. नैतिकता अनैतिकता को ठेंगा दिखाते हुए देश और सभी प्रांतों पे सत्तानशीन रहे.

किंतु अब भाजपा ने अपनी नीतियों में बदलाव किया है. मोदी और शाह की कप्तानी में भाजपा ने दुश्मनों को उनके घर में घुस के उन्हीं के हथियार (साम दाम दण्ड भेद …. नैतिकता अनैतिकता) से पटकनी देनी शुरू कर दी है. ये बात विरोधियों को हजम नहीं हो रही है …. और वो भाजपा को उच्च राजनीतिक आदर्शों नैतिकता और सुचिता का पाठ पढ़ा रहे हैं…

काहे बे ?? ….

तुम करो तो चमत्कार… भाजपा करे तो बलात्कार…

तुम करो तो डांस… भाजपा करे तो का मुजरा…

कहाँ से लाते हो बे इतना वैचारिक दोगलापन?

जो लोग पश्चिम बंगाल …. केरल …. आसाम सहित पूरे नार्थ ईस्ट कॉरिडोर के हालातों से वाकिफ है …. उनको भाजपा के इस फैसले से कोई हैरानी नहीं होगी ….

ये भाजपा का मास्टर स्ट्रोक है ….

“मुकुल रॉय” की राजनीतिक हैसियत टीएमसी में फाउंडर मेम्बर की है.

दुश्मन को अगर खत्म करना है तो उसकी सप्लाई लाइन काट दो. टीएमसी की सप्लाई लाइन (रीढ़ की हड्डी) है “मुकुल रॉय”. ममता की रीढ़ की हड्डी पे ये भाजपा का पहला, सटीक और भीषण प्रहार है. आगे अभी और भी बहुत कुछ देखने/सुनने को मिलेगा. इसलिए मोदी शाह के कड़े फैसलों को झेलने की आदत आप अभी से डाल लीजिये.

राजनीति में कभी दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं होती है. ऊंट कब किस करवट बैठ जाये कहना मुश्किल होता है.

जगीरा से तो लड़ लोगे, पर जगीरा से लड़ने को जगीरा जितना कमीनापन कहाँ से लाओगे ?? ….

आपका दुश्मन जगीरा (तमाम विपक्षी विरोधी दल) है.

उनसे (जगीरा/विरोधी दलों) से अगर लड़ना है तो खुद के अंदर भाजपा को अपने दुश्मन (जगीरा/विरोधी दलों) जितना कमीनापन भरना होगा.

तमाम उच्च राजनीतिक आदर्शों, शुचिता, नैतिकता को घोड़े पे रखना होगा. (घोड़े को घोड़ा ही पढ़ें)

और साम दाम दण्ड भेद येन केन प्रकरेण दुश्मन को उसी के घर में घुस के उसी के हथियार से मात देना होगी.

राजनीति शह और मात का खेल है!

  • रितेश प्रज्ञांश

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