ज़िम्मेदार कौन? गुजरात-हिमाचल चुनावों के पहले जवाब दे दे कांग्रेस

अपने बचपन के दिनों में यानी 1995-96 में मुझे अच्छे से याद है कि रसोई गैस यानी एलपीजी खत्म हो जाने पर हम लोग दिन में 12 बजे घर से बाहर ऐसी गैस ट्रकों का इन्तज़ार किया करते थे जिन पर एलपीजी सिलेंडर लदे होते थे.

दिन में 12 से 2 बजे के बीच गैस से लदी हुई ट्रकें आती थी और हम हाथ दिखा कर उस ट्रक को रोकते. अपने खाली सिलेंडर उसे देते और उससे एक भरा हुआ सिलेंडर ले लेते.

मुझे उस ज़माने के गैस सिलेंडर के दाम तक याद हैं… 160 रुपये प्रति सिलेंडर. सन 2000 तक मुझे याद है कि घर पर एलपीजी सिलेंडर लेकर ट्राली से वेंडर आते थे और पूछते थे कि सिलेंडर चाहिए?

आज करीब 25 साल बाद जब मै देखता हूँ कि उसी गैस सिलेंडर को पाने लिए लोगों को कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं… कितनी दिक्कतें सहनी पड़ती हैं, तो लगता है कि देश ने क्या खाक तरक्की की है?

वही गैस सिलेंडर जो कभी हमें 160 रुपये का मिलता था वो आज 750 रूपये का मिलता है यानी 590 रुँपये महंगा…

सन 2004 में मैंने सीबीएसई बोर्ड से संचालित स्कूल में 450 रुपये महीने की फीस में हाई स्कूल किया था… लेकिन आज उसी स्कूल में हाई स्कूल की फीस 5000 रुपये महीने हैं.

आप कहते हैं कि ये तो अर्थशास्त्र का सामान्य सा नियम है कि जनसँख्या बढ़ने पर महंगाई बढती है… लेकिन कितनी???

महज़ 14 साल पहले जो साइकल 1500 से 1800 रूपये में मिल जाती थी वो आज 4500 में मिलती है… लेकिन हमारी यानी एक आम मध्यमवर्गीय व्यक्ति की औसत सालना आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ी जिस अनुपात में महंगाई बढ़ी है.

महंगाई और आय को संतुलित करने के लिए ही सरकार वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करती है जिससे कि एक सफाई कर्मी की तनख्वाह भी 20 से 25 हज़ार तक पहुँच गयी है.

सरकारी बाबू और चपरासी की तनख्वाह तो एक प्राइवेट मल्टीनेशनल कम्पनी में कार्यरत एक ब्रांच मैनेजर के बराबर होती है या शायद उससे थोड़ा कम…

अभी साल भर पहले लखनऊ सचिवालय में चपरासी के करीब 200 पदों पर भर्ती निकली थी जिसमे 25 लाख आवेदन आये थे…

इस पद की योग्यता सिर्फ इतनी थी कि आपको पांचवी कक्षा पास होना चाहिए और साइकल चलाना आना चाहिए… लेकिन इस पद पर 25 लाख से ज्यादा आवेदन आये जिसमें भारी संख्या में पीएचडी, बी टेक, एमएससी, बीएससी, बी एड जैसे डिग्रीधारी शामिल थे. हालाँकि बाद में ये भर्ती रद्द कर दी गयी.

मैं बस इतनी सी बात उन कथित बुद्धिजीवियों से पूछना चाहता हूँ कि वो बताएं कि पिछले 30 सालों में, जिसमें कि 24 साल इसी धर्मनिरपेक्ष कांग्रेस का राज देश पर रहा है… 160 रूपये की सिलेंडर को 750 रुपये तक लाने वाले कौन है?

स्कूलों में, मेडिकल कॉलेज में लाखों की फीस बढ़ा कर शिक्षा का बाज़ारीकरण करने वाले कौन है?

एक चपरासी के पद पर 25 लाख उच्च शिक्षित लोगों ने मज़बूरी में आवेदन किया… आखिर इतनी बड़ी जनसँख्या के पास आज भी स्वरोज़गार या एक सम्मानित नौकरी नहीं है इसका जिम्मेवार कौन है?

महाराष्ट्र सहित देश भर में आज़ादी के बाद लाखों किसानो ने आत्महत्या की है… इसका जिम्मेवार कौन है?…

कांग्रेस जैसे भ्रष्ट राजनीतिक दल, जिसने देश पर 60 साल शासन किया है, उसे गुजरात और हिमाचल के चुनावों में पहले इन सवालों के जवाब देश को देने चाहिए.

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