हरियाणा दिवस : चाल ए बेबे पाणी न चालां

चाल ए बेबे पाणी न चालां
चाल ए ननदी पाणी न चालां
सूने पनघट देखे बाट
पीतल की टोकनी तार ए ननदी
इंडही लाइए वा लिली

दादी ने बनवाई थी
मामी न दूसर म दिया कंद का दामण
जिसपे मोर आळी कढाई थी

नानी न भात म भिजवाये कड़ी छिड़कले
मेरी नथ में मोती की लड़ी जड़वाई थी
चुन्दड़ी वा काढिये सच्चे गोटे आळी
जिसमें चांदी आळी कढाई थी

गळ का गुलीबन्द दिए री सासू दस तोले की जिसमे गढ़ाई थी
और दिए तागड़ी बोरला मेरे सुसरे न विदा प चढ़ाई थी
पहरूँगी रमझोल पैरां म आधा किलो की
मेरी बाबू न बनवाई थी…

पहर ओढ़ के सिंगर क पाणी न चालू
मन्ने गीत आळी भी बुलाई री
दो घड़ लाऊंगी गाळ देखेगी सारी

बोच बोच पग धरके पतली कमर जिब लचकेगी
छैल गाबरूआ की जान लिकड़ जागी सारी
जींद आळी जुत्ती जिब चरर चरर बोलेंगी गाळ म
महादे के पोते की बहु आळी कहेंगी लुगाई सारी

आ ए बेबे पाणी न चालां
आ ए ननदी पाणी न चालां
कुँए बाट देखे स म्हारी…

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