स्त्री के वक्षों में काम वासना नहीं, छुपा है एक गहरा राज सम्पूर्ण मातृ-शक्ति का

मुझे नहीं पता कि किसकी चेतना के हिसाब से कौन इस लेख को कैसे लेगा. पिछले 20 साल की मेरी आंतरिक यात्रा के इस सफर में, एक बात साफ हुई है कि औरत अगर सिर्फ अपने शरीर के रहस्यों को जीना शुरू कर दे; तो उसे किसी और ध्यान विधि की कोई जरूरत नहीं है.

पूरे शरीर को छोड़िए, सिर्फ अपने वक्षों पे अवधान करे जैसा कि ओशो ने एक विधि बताई है, काफी है उसी गहराई तक पहुँचने को जिस तक पुरुष ध्यान से पहुँचता है.

वक्ष किसी भी तरह से काम वासना का हिस्सा नहीं है. एक गहरा राज हैं ये सम्पूर्ण मातृ-शक्ति का, इस विश्व की हर रचनात्मकता का. एक साधारण मां सुख पाती है उसके बच्चे को अपने वक्षों से जोड़ के.

जिस दिन परमात्मा के मार्ग पर किसी साधिका को कुछ गहरा घटने लगता है, उसकी मातृ-शक्ति अंतहीन विस्तार लेने लगती है और इस ब्रह्मांड का हर पुरुष -तत्व, ना केवल इंसान, छोटे से छोटा जीव-जंतु, कीट-मकौड़ा भी उसके वक्षों के अंतहीन विस्तार में समाने लगता है.

अगर cosmic orgasm का किसी को अनुभव हुआ हो तो वो समझ सकता है कि cosmic motherhood भी एक अभूतपूर्ण अनुभूति है.

प्रणाम सबको…. हो सके तो comment मत कीजिएगा …. it’s something which made me so silent in the process of writing itself….

  • वनकन्या शून्यो

प्रेम प्रतीक्षा परमात्मा : तेरा मेरा क्या क्या नाता, सजनी, भाभी, मौसी, माता

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