प्रशासनिक तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को उखाड़ने योगी का साहसिक अभियान

मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने उत्तरप्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के मकड़जाल को जिस प्रचण्डता से काटने का साहसिक अभियान छेड़ रखा है वह अद्वितीय है.

आज़ादी के बाद के 70 सालों में उत्तरप्रदेश ने ऐसा नजारा कभी नहीं देखा जैसा नज़ारा पिछले केवल 7 महीनों में योगी सरकार ने दिखाया है.

उत्तरप्रदेश सरकार ने कल लोकनिर्माण विभाग के 22 इंजीनियरों को बर्खास्त कर दिया है. बर्खास्त किए गए इंजीनियरों में 16 जूनियर इंजीनियर और छह सहायक व अधिशासी अभियंता शामिल हैं.

इसके अलावा 206 अवर अभियंताओं को बर्खास्तगी का नोटिस जारी कर दिया गया है. इतना ही नहीं, शासन ने विभिन्न मामलों में दागी 78 सहायक अभियंताओं और 127 उससे ऊपर के अभियंताओं को स्क्रीनिंग की दायरे में भी ले लिया है.

वरिष्‍ठ अफसरों की ओर से कराई गई गोपनीय स्‍क्रीनिंग में 550 से अधिक अफसरों पर गाज गिरने की बात कही जा रही है.

इसमें खास बात यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन के 94 विभागों से 50 साल से अधिक आयु के लापरवाह और भ्रष्ट तथा खराब रिकार्ड वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने या बर्खास्त करने की कार्रवाई करके रिपोर्ट मांगी थी. कार्रवाई के लिए हर विभाग में स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई है. 50 साल से अधिक आयु के नाकारा, भ्रष्ट और खराब रिकार्ड वाले अफसरों व कर्मचारियों को जबरिया रिटायर करने का शासनादेश 1985 का है, लेकिन पहली बार इस मामले में किसी सरकार ने सख्ती की है.

इससे पहले अगस्त महीने में मुख्यमंत्री योगी ने जल निगम में सहायक अभियंता के 122 पदों पर पिछले साल हुईं नियुक्तियां को रद्द कर दिया था. यह भर्तियां अखिलेश सरकार में चुनाव के ठीक पहले दिसंबर में हुई थीं.

रद्द हुई इन भर्तियों में 113 पद सहायक अभियंता सिविल, पांच पद सहायक अभियंता मैकेनिकल और चार पद सहायक अभियंता कंप्यूटर के थे.

भर्ती में गड़बडी का आरोप लगाकर कई असफल अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट की इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में याचिकाएं दायर की थीं. अदालत ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे. अभ्यर्थियों ने गड़बड़ियों के संदर्भ में जो तथ्य प्रस्तुत किए गए थे, जांच में वे सही पाए गए थे.

मुख्यमंत्री योगी की यह पहली या अकेली ऐसी कार्रवाई नहीं है. पिछले 7 महीनों में योगी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासनिक सुधार से सम्बंधित ऐसे कई कठोर एवं साहसिक फैसले किये हैं.

किन्तु दुर्भाग्य से मीडिया में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सिर्फ़ और सिर्फ़ उग्र बयानबाजी करनेवाले एक कट्टर हिन्दूवादी नेता मात्र के रूप में प्रस्तुत करने की साज़िश आज भी जारी है.

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