कहाँ है टीपू की तथाकथित रामनामी अंगूठी-1

पिछले हफ्ते पंद्रह घंटों मैं टीपू सुल्तान की रामनामी अंगूठी खोजता रहा लेकिन वो कहीं भी प्राप्त नहीं हुई. भारत के ख्यात इतिहासकारों से लेकर छोटे लेखकों तक का सशक्त ढंग से यही कहना है कि टीपू के मरने के बाद वह रहस्यमयी अंगूठी एक अंग्रेज ‘उसकी ऊँगली’ से उतार लाया था.

ये अंगूठी टीपू के कुकर्मों को छुपाने का एक बेहतरीन जरिया बन गई. आज सुबह 6 बजे टीपू पर जो फेसबुक पोस्ट डाली थी, उस पर आए दो मित्रों की प्रतिक्रिया के बाद मैंने इस खोज को दूसरी दिशा में मोड़ दिया.

इन मित्रों का कहना था कि ऎसी कोई अंगूठी थी ही नहीं. इनका कहना था कि यह अंगूठी अब कहीं नहीं मिलेगी क्योंकि वामियों ने हिंदीभाषियों/ हिन्दुओं को बरगलाने बनाने के लिए जिस अंगूठी के चित्र उछाले थे उस पर देवनागरी में “राम” लिखा था. अब किसी ने उनकी इस चूक को पकड़ लिया तो सब तस्वीरें गायब हो गई.

अबकी बार खोज ‘क्रिस्टीज़ ऑक्शन हॉउस’ से शुरू होती है. ये वहीं नीलामी घर है जहाँ 2014 में रामनामी अंगूठी नीलाम होने की खबरें आई थी. तमाम बड़े मीडिया संस्थानों ने इस खबर को हाथों हाथ लिया. भारत में बीबीसी, एनडीटीवी और अन्य ने इस खबर के बहाने ‘ऊँगली से उतार लाने’ वाली सेकुलर अफवाह को प्रमुखता से आगे बढ़ाया.

ये भी कहा गया कि अंगूठी को करोड़ो रूपये में खरीदने वाला अपनी पहचान गुप्त रखना चाहता था इसलिए ‘क्रिस्टीज़’ ने पूरी गोपनीयता रखते हुए उसका वीडियो तक नहीं बनाया. अपने हर ऑक्शन का वीडियो यूट्यूब पर पोस्ट करने वाले ‘क्रिस्टीज़’ ने इस नीलामी का कोई वीडियो नहीं डाला.

तो रामनामी अंगूठी अब भी रहस्य के घेरे में थी. इसका केवल एक ही फोटो उपलब्ध था और उसके भी फर्जी होने का संदेह व्यक्त किया जा रहा था. जब लंदन में इस अंगूठी की नीलामी की पूर्व सूचना अख़बारों में छपती है तो अचानक एक संगठन ‘टीपू सुल्तान यूनाइटेड फ्रंट’ प्रकट हो जाता है.

बीबीसी के मुताबिक इंग्लैंड से ये फ्रंट मांग करता है कि कर्नाटक सरकार नीलामी में हिस्सा लेकर टीपू की इस अंगूठी को खरीद ले. जब मैंने इस फ्रंट की खोज की तो पता चला क़ि केवल गुलबर्गा में ऐसा संगठन है जो टीपू के पोस्टर लगाकर कट्टर गतिविधियों में लिप्त है. इस संगठन का इंग्लैंड में कोई ओर-छोर नहीं है.

नीलामी हुई, लेकिन उसकी एक फोटो तक बाहर नहीं आती और शोर मचा दिया जाता है कि टीपू की रामनामी अंगूठी नीलाम हो गई. ‘क्रिस्टीज़’ की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आता कि उनके यहाँ इस तरह की कोई नीलामी हुई भी थी.

‘क्रिस्टीज़’ की खबर को भी बीबीसी का एक संवाददाता ब्रेक करता है और उस खबर की कई मल्टीपल कॉपियां दुनिया में फ़ैल जाती हैं.

क्या वाकई में कोई रामनामी अंगूठी थी? क्या उस रात मरते समय टीपू ने अंगूठी पहन रखी थी? क्या इसे लेकर बड़ा झूठ फैलाया गया है? जिस रात टीपू मरा, उस रात की कहानी क्या थी? बस थोड़ी देर में जानिये अगले भाग में…

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