विकास के पागलपन का ही नतीजा है ये, कि पहचाने जा रहे देश में छिपे तमाम गद्दार

विकास पागल हो गया है. सचमुच पागल हो गया है. इसके पागल होने की शुरुआत भी गुजरात से ही हुई थी. पहली बार विकास 2002 में पागल हुआ था जब गोधरा में निहत्थे कारसेवकों को ट्रेन में ज़िंदा ही जला दिया गया था. तब पहली बार विकास ने अपने पागलपन का एहसास कराया था. बरसों बरस दंगों की आग में झुलसते रहे गुजरात ने विकास के इस पागलपन के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और न ही दुबारा कभी गुजरात में दंगा हुआ.

पहले विकास की बड़ी बुरी हालत थी. तब विकास बहुत ज़्यादा बिगड़ैल था. लुटियंस ज़ोन में कुछ दलालों के साथ ही ज़्यादा बैठता था. शराब, शबाब और क़बाब में ही डूबा रहता था. केवल कुछ नेताओं और दलाल पत्रकारों, अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों, उद्योगपतियों का ही विकास करता था. उन्हीं की महफ़िलों में ठुमके लगाता, झूमता गाता, उन्हीं के बिस्तरों में सोता था.

विकास कब कहाँ किसके साथ जायेगा, ये मुट्ठीभर लोग ही तय करते थे. देश की जनता त्राहिमाम त्राहिमाम करती, लेकिन विकास कुछ लोगों के साथ जमकर रंगरेलियां मनाता था. कश्मीर में जमकर पत्थरबाज़ी होती, सेना पर हमले किये जाते, सेना के जवान शहीद होते, घायल होते लेकिन विकास कभी उनकी सुध नहीं लेता था.

पाकिस्तान से लगातार आतंकवादी भारत में आते, निर्दोषों की हत्या करके चले जाते, लेकिन विकास इन सबसे आँखें मूँद लेता था बल्कि कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के साथ गलबहियाँ करता था और यही गद्दार नेता पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के ख़िलाफ़ लोगों को उकसाते और खुद का ही विकास करते जाते.

विकास इतना भ्रष्ट हो चुका था कि बिना रूपए लिए किसी काम को हाथ नहीं लगाता और पैसों के लिए देश के बाहरी और भीतरी दुश्मनों से भी मिल जाता. देश का हर साधारण व्यक्ति विकास की इन हरक़तों से तंग आ चुका था. बड़े से बड़े और बेहद ज़रूरी कामों को भी विकास रोककर बैठा रहता था. केवल एक परिवार और उसके चापलूसों, प्यादों, ग़ुलामों, दलालों का ग़ुलाम हो चुका था विकास.

समय ने करवट बदली और विकास को एक नई राह, नई दिशा मिली. अब विकास में परिवर्तन आने लगा था. अब विकास ने लुटियंस ज़ोन से किनारा कर लिया. देश की सेना को आतंकवादियों को उड़ाने की खुली छूट दे दी. कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की पोल खोलने लगा… पत्थरबाज़ों को कठोर जवाब देने लगा. आतंकवादियों ने भारत के वीर जवानों को शहीद किया तो सर्जिकल स्ट्राइक कर आया… दुश्मन को उसी के घर में घुसकर मार आया… विकास के पुराने साथी पाकिस्तान जाकर वापस पुराने विकास को पाने की गुहार लगाने लगे…

विकास अब नई राह पर चल चुका है. अब वो भ्रष्टाचारियों, टैक्स चोरों पर नकेल कस रहा है. रोज़ पिछली बार से ज़्यादा सड़कें बना रहा है… बुलेट ट्रेन ला रहा है… देशद्रोही NGO को बंद कर चुका है… लाखों परिवारों को गैस, शौचालयों की सुविधाएँ दे चुका है… गाँव गाँव बिजली पहुँचा रहा है… रेलवे का कायाकल्प कर रहा है… कई राज्यों में AIIMS बना रहा है… देश के दुश्मनों को नंगा कर रहा है, उन्हें कदम पीछे खींचने को मजबूर कर रहा है.. चौबीसों घंटे 365 दिन बिना रुके, बिना थके काम कर रहा है.

विकास जानता है अगर आज मैंने कड़े फैसले नहीं लिए तो भविष्य में इसके नुक़सान ज़्यादा घातक होंगे… विकास जानता है कि पहले ग़लत संगत में होने की वजह से जो नुक़सान हुए हैं उसकी भरपाई इतनी जल्दी होना असंभव है. वो इसी आशा के साथ देश की जनता की ओर देखता है कि वो भी उसके बदले हुए स्वरूप में उसका साथ दे, उसकी मंशा को समझे.

ये विकास के पागलपन का ही नतीजा है कि देश में छिपे तमाम गद्दारों की पहचान उजागर होती जा रही है… ये गद्दार दुबारा विकास को अपने कब्ज़े में लेकर बिगाड़ना चाहते हैं उसे अपना ग़ुलाम बनाना चाहते हैं…

इस देश को ऐसे ही पागल विकास की ज़रूरत है… अगर 10 सालों तक ऐसे ही पागलपन करता रहा तो पूरी दुनिया को पागल बना देगा… ऐसे ही पागल बने रहो विकास..

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