वास्तु विचार : क्या वाकई अशुभ है दक्षिणमुखी घर, दुकान या फैक्टरी

दक्षिण दिशा के बारे मे विद्वानों की व जन साधारण की धारणाएं अलग-अलग रही है. कुछ का कहना है कि दक्षिण दिशा शुभ फलदायक नहीं होती है तथा कुछ विद्वानों का कहना है कि दक्षिण दिशा भी शुभ फलदायक होती है. क्या वास्तव में दक्षिण दिशा शुभ फलदायक नहीं होती है या यह केवल हम लोगों की धारणा या सुनी सुनाई बातें हैं, यह बहुत ही महत्वपूर्ण व चर्चा का विषय है.

सबसे पहले तो यह जान लें कि कोई भी दिशा व्यक्ति द्वारा नहीं बल्कि ईश्वर ने प्रकृति के नियमों को ध्यान में रखकर निर्धारित की है. अतः ईश्वर द्वारा बनाई गई कोई भी दिशा गलत नहीं होती है, गलत होते हैं हम और आप, जो प्रकृति के नियमों की अवहेलना कर दिशाओं पर दोषारोपण करते हैं.

एक गलत सोच

किसी भी देश या प्रदेश का वास्तु वहां की जलवायु और वातावरण पर निर्भर होता है. जैसे आमतौर पर कहा जाता है कि दक्षिण दिशा शुभ नहीं होती है. दक्षिण मुखी प्लाट, मकान, दुकान, आफिस आदि होना अशुभ फलदायक माना जाता है.

संयोग से दक्षिण दिशा वाले प्लाट, भवन आदि को खरीदने पर कोई अनहोनी हो गई तो लोग सीधे तौर पर दक्षिण दिशा को दोष देते हुए कहते हैं कि दक्षिण मुखी होने से यह अनहोनी घटना हो गई है.

दक्षिण दिशा को लेकर ऐसा भ्रम क्यों?

दरअसल जिन क्षेत्रों में गर्मी अधिक पड़ती है उन क्षेत्रों में मकान, दुकान, घर, आफिस आदि का दरवाज़ा दक्षिण मुखी रखने से गर्मी अधिक झेलना पड़ती है, क्योंकि सूर्य का प्रकाश अधिकतर समय तक दक्षिण दिशा में ही रहता है जिसके कारण गर्मी के दिनों में दक्षिण दिशा अधिक कष्टदायक हो जाती है. इसलिये दक्षिण दिशा को अशुभ मान लिया गया है.

जिन देश प्रदेश के स्थानों पर ठण्डक अधिक रहती है वहाँ दक्षिण दिशा लाभदायक मानी जाती है क्योंकि ठंडक वाले स्थानों पर सूर्य की किरणों की अधिक आवश्यकता होती है.
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आपका घर, भवन, मकान, फैक्टरी आदि किसी भी दिशा में क्यों न हो, अगर उसका निर्माण व आन्तरिक साज सज्जा प्रकृति के नियमों के आधार पर वास्तु के नियमों का पालन कर किया जाये तो, हर दिशा शुभ फलदायक होती है. क्योंकि वास्तु का नियम ही सुख शांति सम्पत्ति वृद्धि विकास व प्रसन्नता प्रदान करना होता है.

वास्तु दोष के कारण

वास्तु दोष के कई कारण हो सकते हैं. अपने आसपास की भूमि के कारण, वातावरण के साथ सामंजस्य की कमी के कारण, मकान की बनावट के कारण, सही आकार की भूमि पर निर्माण न कर पाने के कारण, भवन की आन्तरिक साज सज्जा के कारण, दूषित भूमि के कारण, घरेलू उपकरणों को सही जगह व्यवस्थित न कर पाने के कारण घर, भवन, फैक्टरी आदि में वास्तु दोष की स्थिति उत्पन्न होती है जो हमारे जीवन में अनेकों समस्याओ का कारण होती है.

हमारा पूरा शरीर व सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड, पांच तत्वों आग, पानी, वायु, भूमि व आकाश से मिलकर बना है. इन तत्वों का सही समायोजन के अनुसार व वास्तु नियम अनुसार दिशाओं को उपयुक्त रुप से प्रयोग कर किया गया भवन निर्माण हमारे जीवन को, हमारे विचारों की दिशा, जीवन पद्धति को, स्वास्थ्य आदि को प्रभावित करते है.

आधार वास्तु

घर, मकान, दुकान, भवन, फैक्टरी आदि कैसी भूमि पर स्थित है?

भवन जिस भूमि पर स्थित है उसका आकार कैसा है?

भवन के कमरों, खिङकियों, स्तंभों, जल निकासी व्यवस्था, मल के निकास की व्यवस्था, प्रवेशद्वार, मुख्य द्वार आदि का संयोजन किस प्रकार किया गया है?

भवन में प्रकाश, वायु और विद्युत्, चुंबकीय तरंग के प्रवेश व निकासी की क्या व्यवस्था है?

भवन के चारों ओर अन्य इमारतें किस प्रकार बनी हुई हैं?

भवन के किस हिस्से में परिवार का कौन सा सदस्य रहता है?

भवन के किस दिशा में निर्माण सबसे भारी व किस दिशा मे हल्का निर्माण किया गया है?

भवन की कौन सी दिशा ऊँची व कौन सी दिशा नीची है?

भवन के किस दिशा में खुला व हल्का स्थान रखा गया है?

भवन में किस प्रकार के और किस जगह पर कैसे रंग-रोगन का प्रयोग किया गया है?

ऊर्जा, हवा, धूप, रोशनी, पानी का प्रवेश, ब्रह्मस्थल, वेध, कटा व बढा हिस्सा, यह सभी बातें कहीं भी, किसी भी भवन के वास्तु क्षेत्र को प्रभावित करती है, जो अपने अनुसार सकारात्मक व नकारात्मक परिणाम देती है.

भवन निर्माण के लिए वास्तु के कुछ नियम है, वास्तुशास्त्र एक भवन निर्माण की कला नहीं बल्कि मानव जीवन जीने की प्रकिया व कला है.

भवन निर्माण में वास्तु के नियमों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है तभी वास्तु के उद्देश्य सुख शांति सम्पत्ति प्रसन्नता विकास वृद्धि आदि को प्राप्त किया जा सकता है. वर्तमान में भवन निर्माण में हो रहे वास्तु दोष मानव जीवन में गम्भीर दुष्परिणाम भी दे रहे हैं.

इस प्रकार के भवन से जुड़ी हर गतिविधि का प्रभाव उस भवन में रहने वाले सदस्यों के जीवन पर भी पड़ता है, जीवन का कोई भी पहलू इससे अछूता नहीं रह पाता है.

मित्रों, भवन के निर्माण और उपयोग में हो रही वस्तुओं का दोष भी वास्तु दोष कहा जाता है. वास्तु दोष के दुष्प्रभाव से बचने के लिए भवन निर्माण से पहले और निर्माण करते समय वास्तु के नियमों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है ताकि एक वास्तु सम्मत संरचना का निर्माण कर मानव जीवन के लिए वास्तु के उद्देश्य को प्राप्त किया जा सके.

जय शिव.

डॉ संजीव अग्रवाल, मेरठ

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