डरपोक कौम

साठ के अंतिम दशक में इज़रायल ने जेरुसलेम को इज़रायल में मिलाये जाने की घोषणा कर दी. इज़रायल की इस घोषणा से अरब देश बौखला गए. अरबी देश जॉर्डन ने इज़रायल पर ये आरोप लगाया कि जेरुसलेम को इज़रायल में मिलाने के बाद से जेरुसलेम में अरबी संपत्ति ज़ब्त की जा रही है और वहां से मुसलमानों को भगाया जा रहा है.

मुसलमानों के साथ इज़रायल का छत्तीस का आंकड़ा था… समस्या ये थी इज़रायल अकेला यहूदी राष्ट्र था जबकि इज़रायल के चारों तरफ अरबी देश थे. इस बीच एक और बखेड़ा खड़ा हो गया. 21 अगस्त 1969 के दिन इज़रायल के जेरुसलेम में स्थित 1400 साल पुरानी अल–अक्सा मस्जिद में एकाएक आग लग गयी.

अल अक्सा मस्जिद के बारे में कहा जाता है कि यहाँ हजरत मोहम्मद साहब स्वर्ग से वापस धरती पर लौटे थे. मस्जिद में आग कैसे लगी… किसने लगाईं… इस बात का पता नहीं चल पाया. लेकिन अल अक्सा अग्नि काण्ड साठ के दशक की सबसे चर्चित घटना बन गयी.

पूरी दुनिया में मुसलमान इस घटना के खिलाफ लामबंद हो गए. भारत में तो इस घटना के खिलाफ इतनी तीव्र प्रतिक्रिया हुई कि आगज़नी-पत्थरबाजी तक होने लगी और कर्फ्यू जैसे हालात हो गए.

उधर अरब देश संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) पहुंच गए… अरबों ने UNO को चेताया कि अगर इज़रायल के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गयी तो वो दुनिया को तेल आपूर्ति बंद कर देंगे. UNO ने इज़रायल से पूछा कि मस्जिद में आग कैसे लगी? पूरी दुनिया में बवाल हो गया है आपको पता है?

पिछले 20 सालों से लगातार अपनी मुस्लिम विरोधी छवि के कारण अरब देशों की आलोचना का शिकार बनने वाले इज़रायल के सब्र का पैमाना इस बार छलक गया… इज़रायली सरकार ने कड़े शब्दों में UNO से कह दिया कि हम नहीं जानते कि आग कैसे लगी… हम किसी मस्जिद के चौकीदार नहीं है जो दिन रात वहां पहरा दें…

लेकिन अरब वाले इज़रायल की इस सफाई से संतुष्ट नहीं थे. उनका कहना था कि आग इज़रायल वालों ने ही लगाईं है और इसका बदला लिया जाएगा… हमारे अल्लाह की शान में गुस्ताखी की गयी है… इस्लाम खतरे में आ गया…

इज़रायल सरकार ने भी कह दिया… जाओ, हमने ने ही लगाईं है आग…जो उखाड़ सको उखाड़ लेना…

सारे अरब देश एकजुट हो गए… सोवियत संघ ने अरबों को पैसा और हथियार दे दिए… उधर अमेरिका ने भी इज़रायल को फैंटम लड़ाकू विमान दे दिए… 9 सितम्बर 1969 यानी अल अक्सा अग्नि काण्ड के महज 18 दिनों बाद इज़रायल ने ही अरब देशों पर हमला कर दिया.

आपको बता दें कि पांच इस्लामिक देशों से इज़रायल अकेले भिड़ गया और महज़ 10 घंटे में अरबी देशों ने हार मान ली… इज़रायल ने 11 अरबी लड़ाकू विमानों को मार गिराया… अरब देश त्राहिमाम त्राहिमाम करते हुए UNO की शरण में पहुच गए.

जब सीधी लड़ाई में अरब देश इज़रायल का कुछ उखाड़ नहीं पाए तो उन्होंने वही गन्दा और घृणित काम किया जिसके लिए वे जाने जाते हैं… 5 सितम्बर 1972 के दिन जर्मनी के म्यूनिख शहर में ओलम्पिक खेलों में भाग लेने आये 11 इज़रायली खिलाडियों की फिलिस्तीन के आतंकी संगठन पीएलओ ने हत्या कर दी… और पूरी दुनिया को बता दिया… अरब और इज़रायल का ये संघर्ष हमेशा चलता रहेगा.

भारत में रह रहे 90 प्रतिशत बहुसंख्यक हिन्दू अभी तक इस्लाम की इस मूलभूत अवधारणा से परिचित नहीं है… इस्लाम जब खुल के आप से नहीं लड़ पाता तो घात लगाकर बदला लेता है.

जब वो बाबरी मस्जिद विध्वंस नहीं रोक पाता तो वो गोधरा स्टेशन पर खड़ी ट्रेन की बोगी में आग लगा देता है… और 50 लोगों को जिन्दा जला देता है… वो मुंबई में सीरियल बम धमाके कर के निहत्थों को मार कर के अपनी शूरवीरता का प्रदर्शन करता है.

अल अक्सा अग्निकांड का बदला जब वो प्रत्यक्ष युद्ध में नहीं ले पाता तो वो म्यूनिख में इज़रायल के निहत्थे ओलम्पिक खिलाडियों को गोलियों से भून देता है… जब ऐसी डरपोक कौम का प्रतिनिधित्व करने वाले कहते हैं कि वो अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरते तो कसम से मेरा तो अल्लाह ताला से विश्वास ही डगमगा जाता है.

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