चीन सीमा पर तैनात हैं योगी आदित्यनाथ के भाई सूबेदार शैलेंद्र मोहन

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मैंने जब से भारत के प्रारब्ध को समझा है तब से मुझे भारत के भविष्य को लेकर कभी भी कोई दुविधा नहीं रही है. लोगो को जरूर दुविधा में देखा है. मैंने 2014 से ही एक से एक राष्ट्रवाद की अलख जलाने वालों को अपने ही ज्ञान, अभिमान, स्वार्थ और हीनता में पत्थर से मोम बनते देखा है.

मैंने राष्ट्रवाद के गुलाल में रंगे लोगों को नोटबन्दी और जीएसटी पर 2014 में उनके द्वारा चुने नेतृत्व को श्राप देते और अपनी इस ‘गलती’ पर रोते हुये देखा है. इस सब रोने गाने के बाद भी मैं यह मानता हूँ कि भारत का प्रारब्ध अपरिवर्तनशील है.

लोग अपने चुने हुये नेतृत्व के निर्णयों के कारण हुई तकलीफों और नुकसान से परेशान और कुपित है, यह सब योग है, उनके अपने अपने योग है जिसका भारत के प्रारब्ध पर कोई फर्क नही पड़ने वाला है.

मेरा यह सब कहने का कारण इसलिये है क्योंकि किसी राष्ट्र का वर्तमान, उसके भविष्य की दस्तक, उसके शासकों के माध्यम से आपको संकेत देता है.

हमको इस बात का अर्थ सूक्ष्मता से समझना चाहिये कि क्यों भारत को तमाम विरोध के बाद भी 2014 में मोदी जी जैसे गृहस्थ आश्रम में ही सन्यास की गति प्राप्त करने की इच्छा वरण करने वाले प्रधानमंत्री मिले.

वहीं 2017 में उत्तरप्रदेश के रास्ते, तमाम बीजेपी में ही विरोध के बाद योगी आदित्यनाथ मिले हैं, जिनके राजनैतिक अंत की कामना सबसे ज्यादा भारतीय जनता पार्टी के ही लोग कर रहे है.

जैसे मोदी जी सब को काट के भारत के वर्तमान हैं, वैसे ही योगी भी मोदी के भारत के भविष्य है. यह मेरा मानना रहा है और जब से पता चला है कि योगी जी के अनुज भारतीय सेना में है तो मेरा यह विश्वास और भी दृढ़ हो गया है.

आज भारत के कितने ऐसे राजनीतिज्ञ हैं जिनके परिवार के लोग सेना में है? आज एक तरफ राजनीतिज्ञ और राजनैतिक दल, सेना के नाम पर भारत की जनता की नसों में खून तो दौड़ा देते है लेकिन उनके खुद अपने, सेना की विषमता से दूर, धंधे या उनकी विरासत को संभालते है.

वही योगी आदित्यनाथ के छोटे भाई सूबेदार शैलेन्द्र मोहन, भारतीय सेना की गढ़वाल स्काउट यूनिट में हैं और भारत-चीन की सीमा पर तैनात, सीमा की रक्षा कर रहे है.

वैसे तो इन बातों का कोई मतलब नहीं है, लेकिन इसका भारत के भविष्य से मतलब जरूर है.

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