गुजरात : नित नई गहराइयाँ हासिल कर रही कांग्रेस क्या 25 सीट तक लुढ़केगी

बात 2012 की है. 2009 का लोकसभा चुनाव जीत के राहुल गांधी उत्साह से लबरेज़ थे. यूपी में उनको 21 सीट मिली थी. कांग्रेस बमबम, राहुल बमबम और मीडिया इन दोनों से ज़्यादा बमबम.

मीडिया इस विजय को राहुल गांधी का पुनर्जन्म बता रहा था. राहुल बाबा को मीडिया ने चने के झाड़ पर चढ़ा दिया था… और राहुल बाबा भी जवानी के जोश में, ऐसे झाड़ पर चढ़े जैसे महाराज छत्रसाल चढ़े थे.

महाराज छात्रसाल ऐसे योद्धा थे कि जिरह बख्तर पहने घोड़े की पीठ पर ही खा लेते थे और सो लेते थे… उसी तरह युवराज राहुल जी यूपी में चने के झाड़ पर ही होरहा खाते और वहीं निपट लेते थे…

जवानी के इसी जोश में युवराज 2012 का यूपी विधानसभा का चुनाव लड़े… 2009 के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग का आंकड़ा बता रहा था कि कांग्रेस 150 से ज़्यादा विधानसभा क्षेत्रों में अन्य दलों से आगे या बेहद नज़दीकी मुकाबले में थी…

ऐसे में कांग्रेस ये मान के चल रही थी कि अगर स्पष्ट बहुमत नहीं तो कम से कम सबसे बड़ी पार्टी तो ज़रूर बनेगी… कांग्रेसी भेड़िये सत्ता की बू बहुत दूर से सूंघ लेते हैं… उनकी पशु वृत्ति जागृत हो जाती है. पूरे चुनाव अभियान के दौरान सभी कांग्रेसी सिर्फ इस बात को ले के आपस मे कुत्तों की तरह लड़ते रहे कि मुख्यमंत्री कौन होगा?

अभी इसी साल 2017 में ही गोवा में कांग्रेस की ज़्यादा सीटें आयी थीं… दिग्गी राजा दिल्ली से गोवा गए सरकार बनाने… बहुमत के लिए 4 सीट कम थी. दिग्गी राजा पणजी पहुंचे तो सत्ता के लिए भूखे कांग्रेसी कुत्तों की माफिक लड़ रहे थे. वो यही तय न कर पाए कि मुख्यमंत्री कौन होगा.

उधर नितिन गडकरी ने रात भर में भाजपा के लिए ज़रूरी बहुमत जुटा के सुबह 10 बजे तक सरकार बनवा दी… और केंद्र में रक्षा मंत्री का पद छोड़ मनोहर पर्रिकर वहां मुख्यमंत्री बन गए…

सत्ता के लिए भूखे कुत्तों की तरह लड़ना कांग्रेस का सार्वभौम चरित्र है. सो इसी चरित्र से कांग्रेसी 2012 में यूपी में लड़े… परिणाम आया तो कांग्रेस 28 सीट… जो कांग्रेसी मुख्यमंत्री पद के दावेदार बने घूम रहे थे, उन्हें मुंह छिपाने की जगह न मिली, और चुल्लू भर पानी न मिला डूब के मरने को…

2014 लोकसभा चुनाव आया… न्यूज़ चैनल कांग्रेस को 160 सीट दे रहे थे देश भर में. उधर कांग्रेसी ललकार रहे थे कि मोदी कभी पीएम बन ही नहीं सकते. कांग्रेस ने कहा कि हम ज़्यादा से ज़्यादा दे सकते हैं तो ये अनुमति दे सकते हैं कि मोदी कांग्रेस के महाधिवेशन में चाय बेच लें.

हमारे एक दोस्त हैं, वो बहुत excited… कुछ सट्टेबाजी में हाथ आजमाने को आतुर… कितनी सीट आएगी कांग्रेस की? उनके साथ मैं हिसाब लगाने बैठा… दोनो हाथों से हमने सीटें लुटाई… फिर भी 62 से ऊपर न पहुंची. नतीजा आया तो कांग्रेस 44 पर लुढ़क गयी.

फिर 2017 आया. दो सितारों का ज़मीं पर हुआ मिलन… टिप्पू और पप्पू मिल के चुनाव लड़े. सरपंडे सब इतने excited कि सरकार बना रहे थे… दो युवाओं का गठबंधन हुआ तो पप्पू गान्ही को 7 सीट आयी!!! हे भगवान… अकेले लड़ते तो कितनी आती?

इस पूरे विश्लेषण में मैं सिर्फ ये बताना चाहता हूँ कि जो कांग्रेस 2012 में यूपी में सरकार बनाने के सपने देखती थी वो गठबंधन का भोट बटोर के भी सिर्फ 7 सीट की औकात पर आ गयी.

150 सीट से 7 सीट… कांग्रेस का पतन किस गति से हुआ है सोच लीजिये. मीडिया की मजबूरी है कि उसे अपना पेट पालने के लिए कांग्रेस को लड़ाई में बना के रखना है. इसलिए वो उसे अब भी 60 -65 सीट दे रहे हैं गुजरात में.

जबकि जमीनी हालात ये हैं कि कांग्रेस गुजरात मे भी इतिहास बनाएगी और आज तक का सबसे खराब प्रदर्शन करेगी. गुजरात मे कांग्रेस 25 के नीचे रह सकती है. क्यों?

ये लिखने का मेरे पास वैज्ञानिक आधार है. आंकड़े हैं. सवाल है कि विश्लेषण करने के लिए आधार किसे बनाया जाए. Reference point क्या होगा?

जब लोग 2017 विधानसभा चुनाव में यूपी में भाजपा का आंकलन कर रहे थे तो 2012 के वोट बंटवारे और सीटों को आधार बना के कर रहे थे. 2012 में यूपी में भाजपा के पास 15% वोट और 47 सीट थी.

उसी भाजपा/ NDA के पास लोकसभा में 42% वोट और 73 सीट थीं. तो 2017 में पार्टी की क्या पोज़िशन रहेगी इसका आंकलन 2012 के आंकड़े से होगा या 2014 के आंकड़े से? हमने 2014 के आंकड़े से आंकलन किया.

2014 में कितने लोगों ने भाजपा को वोट दिया? क्यों दिया? 2014 की तुलना में आज स्थिति खराब है या वैसी ही है या पहले से बेहतर हुई है? लोकसभा की तुलना में विधानसभा में वोट प्रतिशत में कितनी कमी आती है… अन्य राज्यों में 4 से 6% वोट घटा था भाजपा का, लोकसभा से विधानसभा की तुलना में.

हमने आंकलन किया कि अगर यूपी में 10% वोट भी घट गया तो भी 32% वोट मिलेगा और 32% पर यूपी में 280 सीट आएगी. वोट पड़ा तो भाजपा को मिला 41%… यानि लोकसभा की तुलना में कोई attrition नहीं… अब ये आंकलन स्वयं कीजिये कि यूपी में attrition क्यों नहीं हुआ?

यूपी की जनता ने वोट किसको दिया? भाजपा को? योगी आदित्यनाथ, राजनाथ सिंह, या कलराज मिश्र को? या फिर मोदी जी को?

अब आइये गुजरात पर. गुजरात में 2012 विधानसभा चुनाव में भाजपा को 49% वोट मिला था. 2014 लोकसभा चुनाव में बढ़ के 59% हो गया.

2014 में यूपी में 337 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को बढ़त थी. 2017 में 324 सीट आई. गुजरात में 2014 में भाजपा को 167 सीटों पर बढ़त थी. अब सवाल है कि आज आंकलन 2012 के आंकड़े से होगा कि 2014 के आंकड़े से?

2014 में 59% वोट और 167 सीट्स पर बढ़त को आधार बना के ही आंकलन करना पड़ेगा.

सवाल है कि 2014 के 59% मत प्रतिशत से कितना attrition माना जाए?

UP में बिल्कुल भी attrition नहीं हुआ और अन्य स्टेट्स में 4 से 6% होता है. गुजरात मे 6% attrition भी अगर मान लिया जाए तो भी 53% वोट मिलना चाहिए. इतने वोट पर 150 से ऊपर सीटें भी आ सकती हैं.

इस आशावाद का आधार ये है कि भाजपा के fundamentals strong हैं, भाजपा बुनियादे रूप से मज़बूत है.

पटेलों-पाटीदारों के बड़े नेता केशुभाई थे कि हार्दिक पटेल हैं? 2012 में अलग हो के गुजरात परिवर्तन पार्टी बना के केशुभाई ने क्या उखाड़ लिया था… 2% वोट भी नहीं पाए थे और 2 सीट निकाल सके थे. हार्दिक जो उखाड़ लेंगे सब जानते हैं.

2012 में मोदी ने गुजरातियों से CM बनने के लिए वोट मांगा था. आज मोदी PM बनने और बने रहने के लिए वोट मांगेंगे. गुजराती अस्मिता के लिए वोट मांगेंगे.

जहां तक नाराज़गी की बात है, GST पर चीख-चिल्ला के, रो-गा के व्यापारी वर्ग सिर्फ ज़्यादा से ज़्यादा रियायतें ले लेना चाहता है. व्यापारी वर्ग इतना मूर्ख नहीं है कि मोदी के खिलाफ वोट दे के कांग्रेस और कांग्रेसी मुस्लिम अराजकता को अपने सिर पर बैठा ले…

तीसरा कोण ये कि कांग्रेस निरंतर ढलान पर है. नित नई गहराइयाँ हासिल कर रही है. 404 से 44 पर… 28 से 7 पर… ‎गुजरात में भी कांग्रेस 50 से 25 पर आएगी.

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