मेकिंग इंडिया गीतमाला : ‘तुम’ अपना रंज ओ ग़म अपनी परेशानी मुझे दे दो

कल और आज में
फर्क सिर्फ इतना है कि
कल तुम्हारे दिल का दरवाज़ा बंद था
और आज आत्मा का भी बंद कर दिया है…

कुछ सन्देश की बात ही तो है,
तुम जो नहीं कहते
वो शब्द भी
मेरे दिल तक आ जाते हैं…

प्यार क्या है…….
भावों में बंधा मौन
जो कभी शब्दों का मोहताज नहीं…

तुम कौन????
मैं कौन?????
कभी हमारा परिचय नहीं हुआ..
तुम भी उसी चेतना का हिस्सा हो
जिसकी मैं,
अस्तित्व में एक चेतना के
ये दो रूप ही काफी है…
प्रेम की रीत रचने के लिए…

तुमने हमेशा जानना चाहा
मेरा ठिकाना,
और मैं हमेशा कहती रही
मैं “तुम” ही हूँ…

पाप का अर्थ
रात के अंधकार में
वासना के एक क्षण को जन्म देना नहीं,
पाप है प्रेम के सच्चे स्वरूप को
नकली नामों के पीछे छुपा देना…

हर वो स्पर्श पुण्य है
जब हम किसी अनजान की देह को
सच्चे भाव के साथ छूते हैं…
हर वो स्पर्श पाप है
जो किसी की आत्मा को नहीं छू पाता…

तुम रात के अँधेरे में चाँद की खिड़की से
चुपके से मेरे कमरे तक आना चाहते हो
मैंने अपने खुले दरवाज़े पर सूरज जला रखा है…

जो मेरी साँसों को तब तक गर्मी देता रहेगा
जब तक मैं तुम्हारे बर्फ हो चुके दिल को
पिघला न दूं…

हाँ एक दिन फिर हम अजनबी हो जाएंगे…
तुम खोज लोगे अपना नया प्रेम
और मैं इस बात से संतुष्ट
कि मैंने एक मृत चेतना को
जीवन दिया….

– धवल कमल पर कुछ क्षण को रुकी एक ओस की बूँद…

 

 

मेकिंग इंडिया गीतमाला : एक तेरे भरोसे पर बैठी हूँ सब भूल के

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