Zika Virus : गर्भवती महिलाओं को हो सकता है अविकसित शिशु!

इन दिनों इन्दौर और पूरा मप्र हड्डी तोड़ बुखार से थर्र थर्र कांप रहा है. कोई इसे डेंगू मानकर इलाज करता है कोई चिकिन गुनिया. दोनों के टेस्ट निगेटिव आते हैं पर फिर भी हड्डी तोड़ बुखार की महामारी बुरी तरह से फैल रही है. इस बुखार के लक्षण “Zika Virus“ के जानलेवा बुखार से मिल रहे हैं. अगर यह Zika Virus का बुखार हुआ और किसी गर्भवती महिला को यह बुखार आ गया तो उनके गर्भ में पल रहे शिशु का सिर पूरा विकसित नहीं होगा.

हर साल बरसात के बाद सर्दी खांसी बुखार का सीज़न आता है. आम लोग इसे रूटीन मानकर सहते रहते हैं. पर पिछले कुछ सालों से इस जानलेवा बुखार के नए नए रूप देखने मिल रहे हैं. डेंगू, चिकिनगुनिया, स्वाइन फ्लू, और अज्ञात Virus से प्रदेश में लाखों लोग जूझ रहे हैं.

अभी तक यह बुखार मरीज़ों तक ही सीमित रहता था. अब इसने डाक्टरों को भी अपनी चपेट में ले लिया. मेरे परम प्रिय मित्र डा० गिरीश सिपाहा के अनुसार इस बुखार में ऐसा लगता है जैसे किसी ने कम्बल लपेटकर मोटे डंडे से जमकर पिटाई कर दी हो. इतनी बुरी तरह से हड्डी हड्डी चटकती है. इस बुखार के कारण इन्दौर के प्रख्यात सर्जन डा०शर्मा और मेडिकल कालेज के पैथोलॉजी विभाग के प्रमुख डा० भटनागर की बलि दी जा चुकी है. इन्दौर के एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अस्पताल के सर्जरी विभाग के आठ लोगों में से छ: सर्जन पिछले डेढ़ दो महीनों से सर्जरी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि हड्डी तोड़़ बुखार के बाद उनके पैर इतने चीबते हैं कि वें आपरेशन टेबल के पास खड़े नहीं रह सकते हैं. इतना ही नहीं अगर वें हिम्मत जुटा कर आपरेशन करने की कोशिश करते भी हैं तो उनके हाथ की ऊँगलियाँ मोड़ने पर कराहती हैं.

मैंने हड्डी तोड़़ बुखार की वीभत्सता देख कर जब वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं और WHO के लिट्रेचर को खंगाला तो मेरा निष्कर्ष निकला कि इस हड्डी तोड़़ बुखार के लक्षण “Zika Virus” के बुखार से मिलते जुलते है. Zika Virus यानि H5N1 Virus के होने की पुष्टि Virus के स्केनिंग से की जा सकती है जो मप्र में कहा जाता है कहीं उपलब्ध नहीं है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने 30 मई 2017 को भारत में Zika Virus फैलने की चेतावनी जारी की. इतना ही नहीं भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने 6 सितम्बर 2017 को एक “Action Plan“ जारी किया है जिसके अनुसार Zika Virus के बुखार से जूझा जाना चाहिये.

संलग्न वैज्ञानिक जानकारी से यह प्रमाणित किया जा सकता है कि वर्तमान में इन्दौर में हड्डी तोड़़ बुखार की जो महामारी फैली है यह “Zika Virus “ का बुखार भी हो सकता है.

Zika Virus की पहचान करने के लिये जब मैंने इन्टरनेट पर सर्च किया तो पता चला कि अपोलो अस्पताल हैदराबाद में RT-PCR नामक उपकरण की सुविधा है. मैंने इन्दौर स्थित सहयोगी अस्पताल के मुखिया श्री अंजन पोत्दार से फोन पर सम्पर्क किया और निवेदन किया कि वर्तमान में फैले Virus की पहचान हैदराबाद सीरम भेजकर करा लें. पर श्रीमान अन्जन पोत्दार ने एक टूक मनाकर दिया और कहा कि इस जांच में बीस हजार रूपये का ख़र्च आता है. इसे फ्री में नहीं किया जा सकता. मुझे उनके पूरी तरह प्रोफ़ेशनल आचरण पर आश्चर्य हुआ. जिस अपोलो ने मप्र सरकार से करोड़ों की छूट और सहूलियतें हासिल कर ली वह जन हित में बीस हजार रूपयों का टेस्ट फ्री में नहीं कर सकता. हम लोग कितने लोभी और स्वार्थी हैं. जो मप्र की भोली भाली जनता से जम कर कमाई तो करते हैं पर जनहित में कुछ भी परीक्षण फ्री में नहीं कर सकते!

मेरे मित्र डा० सुधाकर भारती ने मुझे बताया कि RT-PCR का उपकरण अरविन्दो अस्पताल में और देवी अहिल्या विवि के लाइफ़ साईन्स विभाग में रखे हैं पर उनका उपयोग कोई भी Virus स्कैनिंग को नहीं करता.

कितनी अजीबोग़रीब हालत है हमारी हालत “कस्तूरी का मृग ज्यों फिर फिर ढूँढे घास “ जैसी हो रही है. हमारे यहाँ सुविधाएं हैं पर उनका उपयोग करने वाला कोई नहीं है. सरकारी संस्थानों में करोड़ों के उपकरण रहते हैं पर उनकी जानकारी किसी को नहीं है. अगर है भी तो हमारे यहाँ उसका उपयोग करने वाला कोई भी मौजूद नहीं है.

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